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Department of Space, Indian Space Research Organisation

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Filling up the post of Controller in U R Rao Satellite Centre (URSC), Department of Space, ISRO, Bengaluru in Level 14 of Pay Matrix (7th CPC) on Deputation basis (Last date for submission is 15/11/2021)
Announcement of Opportunity for Chandrayaan-2 science data utilisationLast date for submission of proposals is Oct 31, 2021
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रिसैट-1 आंकड़े का उपयोग करते हुए समुद्री वायुमंडलीय सीमा परत (एम.ए.बी.एल.) का प्रेक्षण

रडार प्रतिबिंबन उपग्रह-1 (रिसैट-1) को श्रीहरिकोटा से पी.एस.एल.वी. सी19 द्वारा 26 अप्रैल, 2012 को प्रमोचित किया गया। रिसैट-1 भारत का प्रथम संश्‍लेषी द्वारक रडार (एस.ए.आर.) है जो सार्व मौसम परिस्थितियों में दोनों दिन एवं रात के दौरान भू सतह की आकृतियों का प्रतिबिंबन करना सक्षम बनाता है। रिसैट-1 का विभिन्‍न मोडों; 1. उच्‍च विभेदन क्रमवीक्षण - एच.आर.एस. (बिंदु प्रकाश क्रमवीक्षण, 2मी. से कम विभेदन), 2. परिष्‍कृत विभेदन क्रमवीक्षण - एफ.आर.एस.-1 (पट्टिका मानचित्र क्रमवीक्षण, विभेदन 3 मी.), एफ.आर.एस.-2 (पट्टिका मानचित्र क्रमवीक्षण, विभेदन 6 मी.), 3. मध्‍यम विभेदन क्रमवीक्षण - एम.आर.एस. (स्‍कैनसार क्रमवीक्षण, विभेदन 25 मी.) और सी.आर.एस. (स्‍कैनसार क्रमवीक्षण, 30 से 230 कि.मी. की रेंज में प्रमार्ज चौड़ाई के साथ 4. स्‍थूल विभेदन क्रमवीक्षण - विभेदन 50 मी.) में पृथ्‍वी की सतह का प्रतिबिंबन करने हेतु डिजाइन किया गया है।

सक्रिय सूक्ष्‍मतरंग सुदूर संवेदन मेघ वेधन एवं दिन-रात प्रतिबिंबन क्षमता मुहैया कराता है। एस.ए.आर. के ये अद्वितीय गुण कृषि, विशेषकर खरीफ ऋतु में धान की खेती का मानीटरण करने और बाढ़ तथा चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन में अनुप्रयोगों को सक्षम बनाता है। रिसैट-1 समुद्र सतह पर हलचल में परिवर्तनों का संसूचन करते हुए समुद्री वायुमंडलीय सीमा परत संरचनाओं का अध्‍ययन करने हेतु अवसर भी मुहैया कराता है जो समुद्र सतह के सामान्‍यीकृत राडार अनुप्रस्‍थ काट (एन.आर.सी.एस.) को अनुकूल बनाता है।

भारतीय महासागर में रिसैट-1 आंकड़े का उपयोग करते हुए समुद्री वायुमंडलीय सीमा पर (एम.ए.बी.एल.) को समझने हेतु अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (सैक), इसरो, अहमदाबाद द्वारा हाल ही में अध्‍ययन किया गया, जो पृथ्‍वी के साथ अंतर उष्‍णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (आई.टी.सी.जेड.) के कारण चिन्हित स्‍थान-कालिक परिवर्तनीयता को दर्शाता है। वायुमंडलीय सीमाओं, संवहनीय कोष्‍ठों, वायुमंडलीय तरंगों, संवहनीय बारिश कोष्‍ठों एवं वायुमंडलीय चुम्‍बकत्‍व जैसे विभिन्‍न आकर्षक वायुमंडलीय गुणों को एस.ए.आर. आंकड़े का उपयोग करते हुए पहचान की गई है, यद्यपि महासागरीय सहयोग से एम.ए.बी.एल. के संकेत को वियुग्मित करना हमेशा ही चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है। यह दूरदर्शिता है कि इस अध्‍ययन से कुछ रोचक एम.ए.बी.एल. की परिघटनाओं को बेहतर ढ़ंग से समझने हेतु सूक्ष्‍म संरचनाओं एवं पवन पैटर्न का समाधान निकालने में सहायता मिलेगी।

 

Atmospheric front (25th May, 2014, Bay of  Bengal

 

Convective Cells and Atmospheric Gravity Waves

 

RISAT-1 NRCS , Zoomed area of Rain-cell and Visualization of NRCSalong transect