अध्यक्ष इसरो, सचिव अंतरिक्ष विभाग

 

डॉ. के शिवन, पीएसएलवी परियोजना में 1982 में इसरो में शामिल हो गए और अद्योपांत मिशन योजना, मिशन डिजाइन, मिशन समाकलन और विश्लेषण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी पीएसएलवी की सिद्ध मिशन डिजाइन प्रक्रिया और अभिनव मिशन डिजाइन रणनीतियां जीएसएलवी, जीएसएलवी-एमके।।। और आरएलवी-टीडी जैसे इसरो प्रमोचन वाहनों की नींव बन गई हैं। वे 6डी प्रक्षेपपथ अनुकरण सॉफ्टवेयर सितारा के मुख्य वास्तुकार हैं, जो कि वास्तविक समय और सभी इसरो प्रमोचन वाहनों के गैर-वास्तविक समय प्रक्षेपपथ अनुकरण के मेरूदंड है। उन्होंने मिशन संश्लेषण और विश्लेषण के लिए इसरो में विश्व स्तरीय अनुकरण सुविधा की स्थापना की, जिसका उपयोग मिशन डिजाइन, उपप्रणाली स्तर सत्यापन और सभी इसरो वाहनों में एवियानिकी प्रणालियों के समाकलित सत्यापन के लिए किया जाता है। उन्होंने अभिनव दिन-प्रमोचन पवन बायसन रणनीति का विकास और कार्यन्वयन किया, जिससे किसी भी मौसम और मौसम की स्थितियों में वर्ष के किसी भी दिन रॉकेट प्रमोचन संभव किया है। वे पीएसएलवी (पीएसएलवी सी37) के एकल मिशन में प्रमोचन किए गए 104 उपग्रहों के मुख्य मिशन आर्किटेक्ट हैं।

उनके विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं वांतरिक्ष इंजीनियरी, अंतरिक्ष परिवहन प्रणाली इंजीनियरी, प्रमोचन वाहन और मिशन डिजाइन, नियंत्रण और मार्गदर्शन डिजाइन और मिशन अनुकरण सॉफ्टवेयर डिज़ाइन, मिशन संश्लेषण, अनुकरण और विश्लेषण और उड़ान प्रणालियों का सत्यापन, परियोजना प्रबंधन।

उनके कई पत्रिकाओं में अनेक प्रकाशन हैं और वे इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग, एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया और सिस्टम्स सोसाइटी ऑफ इंडिया के फैलो हैं। उन्हें अपने कैरियर में कई पुरस्कार प्राप्त हुए हैं जिसमें सत्यबामा विश्वविद्यालय का डॉ. डॉक्टर ऑफ साइंस (ऑनोरिस कौसा) और डॉ एम जी आर युनिवर्सिटी, चेन्नई, एमआईटी छात्रवृत्ति संघ, चेन्नई, का प्रतिष्ठित छात्रवृत्ति पुरस्कार, 2013 और डॉ. बीरेन रॉय स्पेस साइंस पुरस्कार 2011, वर्ष 2007 के लिए इसरो मेरिट पुरस्कार और 1999 में श्री हरि ओम आश्रम प्रेरित डॉ विक्रम साराभाई रिसर्च अवार्ड शामिल हैं।

शिक्षा

बीएससी, गणित, मदुरै विश्वविद्यालय, 1977
 बीटेक, एरोनॉटिक्स, मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, चेन्नई, 1980
 एमई, एयरोस्पेस, आईआईएससी, बैंगलोर,
 पीएचडी, एयरोस्पेस, आईआईटी, बॉम्बे, 2007


जन्म तारीख


14 अप्रैल, 1957

धारित पद

• 2015-2017 - निदेशक, वीएसएससी
• 2014-2015 - निदेशक, एलपीएससी
• 2014 - मुख्य नियंत्रक, वीएसएससी (अतिरिक्त प्रभार)
• 2011-2013 - परियोजना निदेशक, जीएसएलवी
• 2009-2010 - उप निदेशक, एरो एंड स्ट्रक्चर एंटिटी
• 2007-2008 - परियोजना निदेशक, आरएलवी-टीडी

पुरस्कार व सम्मान

"श्री हरि ओम आश्रम प्रेरित डॉ. विक्रम साराभाई रिसर्च अवार्ड", 1999
इसरो मेरिट अवॉर्ड, 2007
"डॉ. बीरेन रॉय स्पेस साइंस एंड / या डिजाइन अवार्ड", 2011
एमआईटी पूर्व छात्र संघ, प्रतिष्ठित छात्र पुरस्कार, 2013
सत्यबामा विश्वविद्यालय, चेन्नई, का डॉक्टर ऑफ साइंस (ऑनोरिस कौसा),2014
उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए इसरो पुरस्कार, 2016
आईआईटी –बाम्बे का प्रतिष्ठित छात्र पुरस्कार, 2017
डॉ. एमजीआर विश्वविद्यालय, चेन्नई का डॉक्टर ऑफ साइंस (ऑनोरिस कौसा), 2017

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में योगदान

वे पीएसएलवी (पीएसएलवी सी37) के एकल मिशन में प्रमोचन किए गए 104 उपग्रहों के मुख्य मिशन आर्किटेक्ट हैं। जीएसएलवी के परियोजना निदेशक के रूप में, उन्होंने जीएसएलवी के लगातार दो विफलताओं के कारण आद्योपांत डिजाइन को फिर से शुरू करने का नेतृत्व किया। डिजाइन मुद्दों का समाधान किया गया और प्रमोचन वाहन को प्रचालनीय किया । इसमें स्वदेशी क्रायो चरण का उड़ान परीक्षण भी शामिल था। जीएसएलवी ने दक्षिण एशिया उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रमोचन किया और भविष्य में चंद्रयान -2 के लिए इसे निर्धारित किया गया है।

जीएसएलवी एमके-III की पहली विकास उड़ान की सफलतापूर्वक उपलब्धि जिसने भारतीय धरती से सबसे भारी उपग्रह का प्रमोचन किया, जो उनके नेतृत्व में था। वे भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने और चरणबद्ध तरीके से मौजूदा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इसरो के अंतरिक्ष परिवहन और प्रौद्योगिकी दिशानिर्देश के मुख्य वास्तुकार हैं। उन्होंने स्क्रैमजेट इंजन उड़ान परीक्षण के साथ-साथ पुनःप्रयोज्य प्रमोचन वाहन (आरएलवी-टीडी) की प्रौद्योगिकी प्रदर्शन उड़ान के उड़ान परीक्षण का नेतृत्व किया। आरएलवी-टीडी के परियोजना निदेशक के रूप में, नियंत्रण और मार्गदर्शन और मिशन प्रबंधन रणनीतियों और उड़ान प्रदर्शन सहित आरएलवी-टीडी वाहन के डिजाइन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने पीएसएलवी का उपयोग करते हुए मंगल कक्षित्र मिशन (मोम) प्रमोचन के लिए लागत प्रभावी रणनीति विकसित की। इसके अतिरिक्त, वे 6डी प्रक्षेपपथ अनुकरण सॉफ्टवेयर सितारा के प्राथमिक विकासकर्ता हैं जिसे इसरो प्रमोचन वाहनों के मिशन योजना के लिए उपयोग किया जाता है। वे प्रमोचन-दिन के प्राथमिक विकासकर्ता भी हैं – जिसमें प्रमोचन वाहनों के लिए पवन बायसिंग रणनीति है जो कि सभी मौसमों में प्रमोचन को सक्षम करते हैं। उन्होंने पीएसएलवी के ऊपरी चरण (पीएस 4) की पुनरारंभ क्षमता के लिए रणनीति को लागू किया है जो एकल मिशन में विभिन्न कक्षाओं में विभिन्न पेलोडों का अंतक्षेपण करने से मिशन बहुमुखी प्रतिभा को बेहतर बनाता है। उन्होंने सभी इसरो प्रमोचन वाहनों के प्रदर्शन और विश्वसनीयता में वृद्धि में सराहनीय योगदान दिया है।

उन्होंने इसरो के प्रमोचन वाहन कार्यक्रम के लिए मिशन संश्लेषण और अनुकरण सुविधा, समानांतर कंप्यूटिंग सुविधा और हाइपरसोनिक पवन सुरंग सुविधा की स्थापना की है। इसके अतिरिक्त उन्होंने प्रमोचन वाहन के साथ-साथ सामाजिक अनुप्रयोगों के लिए कई प्रौद्योगिकी विकास पहलों पर बल दिया है।

उन्होंने ली-आयन सेलों, विद्युत नोदन के साथ-साथ इसरो के प्रमोचन वाहन कार्यक्रम के लिए उन्नत यानिकी के लिए प्रौद्योगिकी विकास कार्यक्रमों की शुरुआत की। ली-आयन सेल और विद्युत नोदन को प्रमोचन वाहनों और साथ ही उपग्रहों में शामिल किया गया है। उन्होंने सामाजिक उपयोग के लिए उद्योग के माध्यम से ली-आयन सेलों के व्यावसायीकरण की गतिविधियों को भी शुरू किया।

वीएसएससी में बहुविधा क्षेत्रों में डिजाइन ज्ञान पर विचार करते हुए, उन्होंने प्रमुख क्षेत्रों में चिकित्सा उपकरणों के विकास के लिए चिकित्सा बिरादरी के साथ चर्चा शुरू की। उन्नत माइक्रोप्रोसेसर नियंत्रित कृत्रिम अंग और कृत्रिम हृदय पंप जिसे वाम वेंट्रिकल असिस्ट डिवाइज कहा जाता है उनके विकास के प्रस्तावों को, अब प्रोटोटाइप विकास के लिए उद्योग भागीदारों के साथ-साथ फील्ड ट्रायल के लिए भी तैयार किया गया है।

अंतरिक्ष परिवहन प्रणाली डिज़ाइन और निर्माण के सभी क्षेत्रों में अपने अनुभव के आधार पर, स्प्रिंगर प्रकाशन द्वारा नवंबर 2015 में "इंटिग्रेटेड डिजाइन फॉर स्पेस ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम" नामक उनकी अनोखी किताब प्रकाशित की गई है ।

विज्ञान अकादमियों और संगठनों की फैलोशिप

• फेलो: इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग (आईएनएई)
• फेलो: भारतीय वैमानिकी सोसाइटी (एईएसआई)
• फेलो: सिस्टम्स सोसाइटी ऑफ इंडिया (एसएसआई)
• फेलो: इंडियन सिस्टम्स सोसाइटी फॉर साइंस एंड इंजीनियरिंग (आईएसएसई)
• सदस्य, अंतरिक्ष आयोग
• इसरो परिषद के उपाध्यक्ष
• अध्यक्ष, परियोजना प्रबंधन परिषद-अंतरिक्ष परिवहन प्रणाली
• अध्यक्ष, परियोजना प्रबंधन परिषद-क्षमता निर्माण
• अध्यक्ष, अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड
• सदस्य, केरल राज्य डिजिटल सलाहकार बोर्ड
• बोर्ड सदस्य, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजीकल यूनिवर्सिटी, केरल राज्य सरकार
• सदस्य, अनुसंधान परिषद, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय, केरल राज्य सरकार