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आईएसपी पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी: 'उद्योग के लिए रुझान और अवसर'

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड  के द्वारा इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के समन्वय से नई दिल्ली में नवंबर 20-21, 2017 के दौरान 'उद्योग के लिए रुझान और अवसर' विषय पर भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम (आईएसपी) पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी: का आयोजन किया गया था।

इस दो दिवसीय संगोष्ठी का उद्देश्य सर्वोत्तम प्रथाओं पर विचार-विमर्श करना था, जो भारत के अंतरिक्ष खंड के आगामी काम को समर्थन करने के लिए चल रही चर्चा प्रक्रिया को अपनाकर और जो सुसंगत ढांचे पर पहुंचने की सुविधा देती है, जहां भारत का अंतरिक्ष सेक्टर घरेलू और वैश्विक अवसरों को आगे बढ़ा सकता है, उन्नत भागीदारी और सहयोग के माध्यम से संगोष्ठी ने हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों और प्रमुख मील के पत्थर पर प्रकाश डाला और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।

इस संगोष्ठी का उद्घाटन श्री ए.एस. किरण कुमार, सचिव,अंतरिक्ष विभाग/अध्यक्ष, इसरो ने किया था। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने 'मेक इन इंडिया' और 'स्टार्ट-अप एंड स्टैंड-अप इंडिया' पहल की प्रगति के साथ प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दी गई दृष्टि और उद्देश्यों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र के मूल्य-श्रृंखला में उद्योग और हितधारक, देश की उन्नति के लिए आवश्यक प्रोत्साहन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने जोर दिया कि अंतरिक्ष क्षेत्र में मूल्य वृद्धि सार्वजनिक विकास भागीदारी (पीपीपी) जैसे विकास के सहयोगी मॉडल के साथ अपने दृष्टिकोण में बहुमुखी है, जो भविष्य की संभावनाओं के विकास के लिए नया आयाम जोड़ रहे हैं। उन्होंने निजी क्षेत्र से सहयोग करने और अंतरिक्ष क्षेत्र में विशाल क्षमता का पता लगाने का आग्रह किया।

जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जेएएक्सए) के अध्यक्ष और ग्लोबकोसमॉस, रूस के उप महानिदेशक ने उद्घाटन सत्र के दौरान विशेष संबोधन दिया और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत के साथ काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

कई अंतरिक्ष उद्योग और इसरो ने संगोष्ठी के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में भाग लिया था। इस प्रदर्शनी ने अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इसरो की हालिया उपलब्धियों का प्रदर्शन किया गया था। इसमें इसरो के प्रमुख केंद्रों को बड़े स्क्रीन डिस्प्ले के लिए पांच कियोस्क भी आवंटित किए गए थे, जो संबंधित केंद्र से उद्योग के लिए किए कार्य का प्रदर्शन करते थे।

प्रदर्शनी के उद्घाटन से पहले उद्घाटन सत्र के दौरान भारतीय अंतरिक्ष उद्योग पर एफआईसीसीआई कम्पेनियम का विमोचन किया गया था।

दो दिवसीय संगोष्ठी में "अंतरिक्ष उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र: उद्योग के लिए अवसर", "आईएसपी के लिए सतत प्रणोदन प्रणाली और अंतरिक्ष वाहन", "भारतीय उपग्रह कार्यक्रमों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी", "क्षमता निर्माण और प्रतिभा प्रबंधन" और अनुवर्ती कार्यक्रम में सत्र पैनल चर्चा में - "आईएसपी में उद्योग की भूमिका" और "अंतरिक्ष में अंतर्राष्ट्रीय औद्योगिक सहयोग" विचार विमर्श किया गया । प्रत्येक सत्र में इसरो, एंट्रिक्स, फिक्की, नीति आयोग, आईआईटी (बी), एमईए, बीईएल, एलएंडटी, एचएएल, एमटी एयरोस्पेस एजी, जर्मनी और जेएससी ग्लैकोस्मोस, रूस आदि के प्रमुख व्यक्तित्वों की अगुवाई की थी।

  • अगले दशक में इसरो के कार्यक्रम के परिप्रेक्ष्य में, रूसी अंतरिक्ष तंत्र के अनुभव, भारतीय अंतरिक्ष उद्योग के परिप्रेक्ष्य (इलेक्ट्रॉनिकी प्रणाली, मैकेनिकल प्रणाली), विदेशी आपूर्ति श्रृंखला के परिप्रेक्ष्य आदि पर "अंतरिक्ष उद्योग पारिस्थितिक तंत्र:उद्योग के लिए अवसर" सत्र के दौरान व्याख्यान रखा गया ।
  • प्रणोदन और संबंधित प्रौद्योगिकी, प्रक्षेपण वाहन और संबंधित प्रौद्योगिकी, नीति दृष्टिकोण आदि  "आईएसपी के लिए सतत प्रणोदन प्रणाली और अंतरिक्ष वाहन" पर सत्र के दौरान विचार विमर्श किए गए थे।
  • "उपग्रहों, पेलोड और संबंधित प्रौद्योगिकी, भारतीय अंतरिक्ष इलेक्ट्रॉनिकी उद्योग आदि के लिए संवर्धित प्रबंधन के अवसर "भारतीय उपग्रह कार्यक्रमों में सार्वजनिक-निजी साझीदारी का लाभ" पर सत्र के दौरान चर्चा आयोजित की गई थी।
  • भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में, अंतरिक्ष उपयोग में क्षमता निर्माण, अंतरिक्ष में अकादमी की भूमिकाएं विकसित करना, उद्योग और अकादमी के बीच सहक्रिया - सिंगापुर आदि के अनुभव, "क्षमता निर्माण और प्रतिभा प्रबंधन" सत्र में चर्चा हुई।
  • भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में उद्योग की भूमिका पर पैनल की चर्चा का नेतृत्व सीएमडी, एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा किया गया था जिसके पैनल में इसरो और फिक्की से विभिन्न उद्योगों के वक्ता शामिल थे।
  • अंतरिक्ष में अंतर्राष्ट्रीय औद्योगिक सहयोग पर पैनल चर्चा में जापान, सिंगापुर, रूस, थाईलैंड और यूएसए से पैनलिस्ट के साथ मानद सलाहकार, अंतरिक्ष प्रभाग, फिक्की द्वारा संयमन किया गया।

सत्र के अध्यक्ष की टिप्पणी और ग्रीन प्रमाणपत्र वितरण द्वारा प्रत्येक सत्र संपन्न हुआ।

समापन समारोह में भाषण देते हुए, विदेश सचिव डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि भारत को अपनी अंतरिक्ष क्षेत्र की उपलब्धियों पर गर्व है। उन्होंने उल्लेख किया कि अंतरिक्ष क्षेत्र पीएसएलवी, जीएसएलवी और जीएसएलवी मार्क III में तेजी से बढ़ता जा रहा है और आर्थिक विकास और देश का विकास कर रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योग, सरकार और उद्यमियों को प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'आम आदमी और अंतरिक्ष के बीच दूरी को मिटाने' की दृष्टि के साथ मिलकर काम करना है। उन्होंने कहा कि आम आदमी के समग्र विकास के लिए प्रयास करना चाहिए, ताकि अंतरिक्ष विकास के फायदे अंतिम छोर तक पहुंच सकें। उन्होंने कहा कि हाल ही में दक्षिण एशिया उपग्रह का प्रमोचन गर्व की बात है और भारत की "पड़ोस पहले" नीति को दर्शाता है।

संगोष्ठी विभिन्न हितधारकों के बीच अंतरिक्ष सहयोग के विभिन्न बहु-आयामी पहलुओं पर विचार-विमर्श और मंथन करने के लिए मंच प्रदान करता है। इस कार्यक्रम में इसरो, भारतीय अंतरिक्ष उद्योग, औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) और जापान, रूस, सिंगापुर, अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस और थाईलैंड से अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के प्रमुख दावेदारों की भागीदारी देखी गई। उद्योग, नीति निर्माताओं, विचारक नेतृत्वों और शिक्षाविदों के हितधारकों ने भारत सरकार के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार को लक्षित कर भारतीय उद्योग के वाणिज्यिक अंतरिक्ष खंड का फायदा उठाने के लिए भारत सरकार की सक्षम और प्रोत्साहन नीतियों पर चर्चा की।

आईएसपी पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी: 'उद्योग के लिए रुझान और अवसर'

 

आईएसपी पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी: 'उद्योग के लिए रुझान और अवसर'

 

आईएसपी पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी: 'उद्योग के लिए रुझान और अवसर'

 

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आईएसपी पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी: 'उद्योग के लिए रुझान और अवसर'

 

अध्यक्ष इसरो द्वारा प्रदर्शनी का उद्घाटन

 

आईएसपी पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी: 'उद्योग के लिए रुझान और अवसर'

 

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