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डीडब्लूआर डाटा का इस्तेमाल करते हुए पूर्वोत्तर क्षेत्र में झंझावात अद्यप्रसारण सेवा का प्रचालनीकरण

पूर्वोत्तर अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (एनईसैक 2015 से पूर्वोत्तर क्षेत्रीय नोड (एनईआर-डीआरआर) की पहल के रूप में पूर्वोत्तर क्षेत्रीय नोड के तहत भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) के लिए झंझावात अद्यप्रसारण (4 घंटे तक का पूर्वानुमान) सेवाएं प्रदान कर रहा है। यह इन्सैट-3डी/इन्सैट-डीडीआर सैटेलाइट इमेजर और साउंडर, स्वचालित मौसम स्टेशन के आंकड़ों और सांख्यिक मौसम पूर्वानुमान डेटा का विश्लेषण करने के लिए डेटा का उपयोग करता था। हालांकि, इस आंकड़े का उपयोग करके पता लगाना, ट्रैक करना और पूर्वानुमान करना मुश्किल था क्योंकि ज्यादातर झंझावात स्थानीय घटना थी, जो केवल दसेक किलोमीटर से अधिक के विस्तार की थी और एक घंटे से भी कम समय के जीवनवधि की थी। डीडब्लूआर डेटा की उपलब्धता ने झंझावाती मौसम प्रणालियों की सटीक पहचान के लिए नई विंडो खोल दी है, जो झंझावात पर नज़र रखता है और संभावित क्षेत्रों को कम लीड टाइम के साथ पूर्वानुमानित करता है जो प्रभावित हो सकते हैं ।

मेघालय के चेरापुंजी में पहला एस-बैंड दोहरी पोलरिमेट्रिक डॉपलर मौसम रडार (डीडब्ल्यूआर) स्थापित किया गया था जिसे 27 मई, 2016 को भारत के माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश को समर्पित किया था। तब से एनईसैक लगातार डीडब्ल्यूआर का प्रचालन कर रहा है, और डेटा को जनता के लिए निकट वास्तविक समय में मोसडैक(मौसम विज्ञान और महासागरीय डेटा अभिलेखीय केंद्र) और आईएमडी वेबसाइटों के माध्यम से उपलब्ध करा रहा है । डीडब्लूआर को नियमित अंतराल पर अंशांकन किया जाता है और डेटा और उत्पादों की पुष्टि हो रही है। यह पूरे राज्य मेघालय, त्रिपुरा, दक्षिणी असम और मिजोरम और मणिपुर को आच्छादित करता है। पश्चिमी और मध्य असम क्षेत्र के लिए, डीडब्लूआर में केवल 3 डिग्री उन्नयन से परे कवरेज है। डीडब्लूआर भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश के बड़े हिस्से को भी देखता है। रडार 11 मिनट में पूरी मात्रा का स्कैन पूरा करता है जिसमें 360 डिग्री दिगंश स्कैन किया जाता है, जो 0.5 से लेकर 21 डिग्री तक 10 डिग्री उन्नयन कोण से होता है। यह किसी भी घटना के उच्च अस्थायी अवलोकन के लिए क्षेत्र स्कैन (दोनों दिगंश और उन्नयन में) की अनुमति देता है। डीडब्लूआर 300मी. के स्थानिक विभेदन के साथ 250 किमी (मात्र 500 किमी तक Z के लिए) की दूरी को कवर करता है।

भारत के एनईआर पर झंझावात पूर्व-मानसून मौसम (अप्रैल-मई) की घटना है। 2016 के दौरान डीडब्लूआर द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों का उपयोग आंधी और झंझावात के व्यवहार को समझने और अद्यप्रसारण मॉडल को अंशाकन के लिए किया गया था। 2017 के दौरान अद्यप्रसारण सेवा प्रचालनीय की गई थी । दक्षिणी असम, मेघालय और त्रिपुरा के भारी झंझावात हेतु अद्यप्रसारण सेवाएं प्रदान करने के लिए मुख्य रूप से डीडब्ल्यूआर डेटा का इस्तेमाल किया गया था और बाकी एनईआर के लिए, पहले की पद्धति का इस्तेमाल किया गया था। डीडब्ल्यूआर द्वारा एकत्रित Z(रडार प्रतिबिम्ब), S(वर्णक्रमीय चौड़ाई) और V(वेग) डेटा के अतिरिक्त, ZDR(अंतर परावर्तन) और ρHV(सहसंबंध गुणांक) जैसे पोलरिमेट्रिक डाटा का व्यापक उपयोग भी झंझावती बादलों से गैर-झंझावाती बादल को अलग करने के लिए किया गया था ।

2017 के पूर्व-मानसून के मौसम के दौरान चेरापुंजी डीडब्ल्यूआर से डेटा का उपयोग करते हुए मेघालय, दक्षिणी असम और त्रिपुरा को प्रभावित करने वाले लगभग सभी झंझावातों को पहचाना जा सकता है । वर्णक्रमीय चौड़ाई (S) डेटा का उपयोग बादल प्रणाली में आंतरिक प्रक्षोभ को चिह्नित करने के लिए किया गया था जिससे विशेष बादल के झंझावात की क्षमता (S>5) को बढ़ाकर ZDR(0.5 से लेकर 0.5) और ρHV(~ 0.9) डेटा का उपयोग कर लक्षणों का पता लगाया जा सकता है । रडार प्रतिबिम्बता, Z और इसकी ऊर्ध्वाधर प्रोफाइल (मैक्स Z प्लॉट्स) झंझावात की पहचान और बृहत मेघ बैंडों में विशेष झंझावात कोशिकाओं की पहचान की रीढ़ थी जो उपग्रह प्रतिबिंबन में दिखाई देती थीं। सभी Z मूल्य वाले सभी बादल जो 40dBZ से अधिक हैं वे झंझावाती बादल बन सकते हैं और उन्हें वास्तविक समय में ट्रैक किया गया था। 50-56dBZ के Z को गंभीर झंझावात के रूप में वर्गीकृत किया गया था और 56dBZ से अधिक की Z झंझावातों को अति गंभीर झंझावात के रूप में वर्गीकृत किया गया था। बादलों की परावर्तकता और वेग प्रत्येक झंझावात को ट्रैक करने के लिए और स्थानीय वायुमंडलीय स्थिति का विश्लेषण करके अनुमानित ऐसे तूफानों की बढ़ति संभावना के आधार पर निश्चित समय के अंतराल के भीतर संभावित प्रभावित क्षेत्रों का पूर्वानुमान लगाया गया।

चेरापुंजी डीडब्लूआर डेटा के उपयोग ने मेघालय, दक्षिणी असम और त्रिपुरा राज्यों के बारे में झंझावात अध्यप्रसारण की सटीकता में सुधार हुआ है। 1 अप्रैल से 15 जून, 2017 की अवधि के दौरान इन तीनों राज्यों में 48 गंभीर और अति गंभीर झंझावात की संभावना है। 30 मिनट से लेकर 2 घंटें तक समय अंतराल के साथ अद्यप्रसारण में 90% से अधिक सटीकता है। एनईआर-डीआरआर वेबसाइट के माध्यम से और राज्य स्तर पर संबंधित को प्रत्यक्ष संचार के माध्यम से भी अब तक की सेवाएं उपलब्ध कराई गईं ।

डीडब्ल्यूआर, चेरापुंजी 3 डिग्री (बाएं) के लिए उन्नयन कोण कवरेज । गुब्बारा और पिशारटी सोंडे (दाएं) से हाइड्रोजन गैस से भरे धातु क्षेत्र का उपयोग करके डीडब्लूआर का अंशांकन   डीडब्ल्यूआर, चेरापुंजी 3 डिग्री (बाएं) के लिए उन्नयन कोण कवरेज । गुब्बारा और पिशारटी सोंडे (दाएं) से हाइड्रोजन गैस से भरे धातु क्षेत्र का उपयोग करके डीडब्लूआर का अंशांकन

डीडब्ल्यूआर, चेरापुंजी 3 डिग्री (बाएं) के लिए उन्नयन कोण कवरेज । गुब्बारा और पिशारटी सोंडे (दाएं) से हाइड्रोजन गैस से भरे धातु क्षेत्र का उपयोग करके डीडब्लूआर का अंशांकन

 

मेघालय, दक्षिणी असम और मणिपुर पर बने स्क्वॉल लाइन का स्पष्ट रूप से डीडब्लूआर डेटा (बाएं) के उपयोग कर पहचान लिया गया है। इन्सैट-3डी टीआईआर1 चैनल प्रतिबिंब को सम समय पर दिखाया गया है (दाएं)। डीडब्लूआर डेटा ने बड़े बादल बैंड में अलग-अलग झंझावात बादल कोशिकाओं की पहचान करने में मदद की, जैसा कि उपग्रह प्रतिबिंब में देखा गया है   मेघालय, दक्षिणी असम और मणिपुर पर बने स्क्वॉल लाइन का स्पष्ट रूप से डीडब्लूआर डेटा (बाएं) के उपयोग कर पहचान लिया गया है। इन्सैट-3डी टीआईआर1 चैनल प्रतिबिंब को सम समय पर दिखाया गया है (दाएं)। डीडब्लूआर डेटा ने बड़े बादल बैंड में अलग-अलग झंझावात बादल कोशिकाओं की पहचान करने में मदद की, जैसा कि उपग्रह प्रतिबिंब में देखा गया है

मेघालय, दक्षिणी असम और मणिपुर पर बने स्क्वॉल लाइन का स्पष्ट रूप से डीडब्लूआर डेटा (बाएं) के उपयोग कर पहचान लिया गया है। इन्सैट-3डी टीआईआर1 चैनल प्रतिबिंब को सम समय पर दिखाया गया है (दाएं)। डीडब्लूआर डेटा ने बड़े बादल बैंड में अलग-अलग झंझावात बादल कोशिकाओं की पहचान करने में मदद की, जैसा कि उपग्रह प्रतिबिंब में देखा गया है

 

मैक्स V (बाएं) और मैक्स S (दाएं) डीडब्ल्यूआर डेटा, चेरापुंजी । मैक्स V का प्रयोग वेग के अनुमान के लिए किया जाता है जिस पर मौसम प्रणाली गतिमान है और मैक्स S बादल प्रणाली के भीतर आंतरिक प्रक्षोभ के बारे में बताता है मैक्स V (बाएं) और मैक्स S (दाएं) डीडब्ल्यूआर डेटा, चेरापुंजी । मैक्स V का प्रयोग वेग के अनुमान के लिए किया जाता है जिस पर मौसम प्रणाली गतिमान है और मैक्स S बादल प्रणाली के भीतर आंतरिक प्रक्षोभ के बारे में बताता है

मैक्स V (बाएं) और मैक्स S (दाएं) डीडब्ल्यूआर डेटा, चेरापुंजी । मैक्स V का प्रयोग वेग के अनुमान के लिए किया जाता है जिस पर मौसम प्रणाली गतिमान है और मैक्स S बादल प्रणाली के भीतर आंतरिक प्रक्षोभ के बारे में बताता है