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Department of Space, Indian Space Research Organisation

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Filling up the post of Controller in U R Rao Satellite Centre (URSC), Department of Space, ISRO, Bengaluru in Level 14 of Pay Matrix (7th CPC) on Deputation basis (Last date for submission is 15/11/2021)
Announcement of Opportunity for Chandrayaan-2 science data utilisationLast date for submission of proposals is Oct 31, 2021
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डॉ.विक्रम साराभाई

डॉ.साराभाई भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक के रूप में जाने जाते थे; वे एक महान संस्था बिल्डर थे और विविध क्षेत्रों में बड़ी संख्या में संस्थानों को स्थापित या स्थापित करने के लिए मदद की। उन्होंने अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थीः1947 में कैम्ब्रिज से स्वतंत्र भारत में लौटने के बाद, उन्होंने अहमदाबाद में अपने घर के पास परिवार और दोस्तों के द्वारा नियंत्रित चैरिटेबल ट्रस्ट को एक शोध संस्था को दान करने के लिए राजी किया । इस प्रकार, विक्रम साराभाई ने, 11 नवंबर, 1947 को अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) की स्थापना की । उस समय वे केवल 28 वर्ष के थे। साराभाई निर्माता और संस्थाओं के जनक थे और पीआरएल इस दिशा में पहला कदम था। विक्रम साराभाई ने 1966-1971 तक पीआरएल में कार्य किया।

वे परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष भी थे। अन्य अहमदाबाद के उद्योगपतियों के साथ मिलकर उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, अहमदाबाद के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाई।

डॉ. साराभाई द्वारा स्थापित जाने माने कुछ संस्थान हैं:

  1. भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), अहमदाबाद
  2. भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), अहमदाबाद
  3. कम्यूनिटी साइंस सेंटर, अहमदाबाद
  4. कला प्रदर्शन के लिए दर्पण अकादमी, अहमदाबाद (अपनी पत्नी के साथ)
  5. विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम
  6. अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, अहमदाबाद (साराभाई द्वारा स्थापित छह संस्थानों/ केन्द्रों के विलय के बाद यह संस्था अस्तित्व में आई)
  7. फास्टर ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (एफबीटीआर), कलपक्कम
  8. परिवर्ती ऊर्जा साइक्लोट्रॉन परियोजना, कलकत्ता
  9. भारतीय इलेक्ट्रॉनकी निगम लिमिटेड (ईसीआईएल), हैदराबाद
  10. भारतीय यूरेनियम निगम लिमिटेड (यूसीआईएल), जादुगुडा, बिहार

 

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के तहत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक थी। उन्होंने भारत जैसे विकासशील देश के लिए रूस स्पुतनिक के सफलतापूर्वक प्रक्षेपण के बाद अंतरिक्ष कार्यक्रम के महत्व पर सरकार को राजी कर लिया। डॉ साराभाई अंतरिक्ष कार्यक्रम के महत्व पर यह वक्तव्य बल प्रदान करता है:

   " कुछ लोग प्रगतिशील देशों में अंतरिक्ष क्रियाकलाप की प्रासंगिकता के बारे में प्रश्न चिन्ह लगाते हैं। हमें अपने लक्ष्य पर कोई संशय नहीं है। हम चन्द्र और उपग्रहों के अन्वेषण के क्षेत्र में विकसित देशों से होड़ का सपना नहीं देखते । किंतु राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अर्थपूर्ण भूमिका निभाने के लिए मानव समाज की कठिनाइयों के हल में अति-उन्नत तकनीक के प्रयोग में किसी से पीछे नहीं रहना चाहते।"

डॉ होमी जहांगीर भाभा, भारत के परमाणु विज्ञान कार्यक्रम के जनक के रूप में व्यापक रूप से प्रख्यात हैं, डॉ साराभाई के समर्थन से भारत के पहले राकेट प्रमोचन केंद्र की स्थापना की गई । यह केंद्र मुख्य रूप से भूमध्य रेखा के लिए अपनी निकटता के कारण अरब सागर की तट पर तिरुवनंतपुरम के निकट थुम्बा में स्थापित किया गया था। अवसंरचना, कार्मिक, संचार लिंक, और लांच पैड की स्थापना में उल्लेखनीय प्रयास के बाद, सोडियम वाष्प पेलोड के साथ 21 नवंबर, 1963 को प्रारंभिक उड़ान का प्रमोचन किया गया था।

1966 में नासा के साथ डॉ साराभाई की बातचीत के परिणाम स्वरूप, 1975 जुलाई से जुलाई 1976 के दौरान (जब डॉ.साराभाई नहीं रहे) - उपग्रह निर्देशात्मक दूरदर्शन प्रयोग (साइट) शुरू किया गया था।

डॉ साराभाई ने भारतीय उपग्रह के संविरचन और प्रक्षेपण के लिए परियोजना शुरू कर दिया था । नतीजतन, पहला भारतीय उपग्रह, आर्यभट्ट, को 1975 में रूसी कास्मोड्रम से कक्षा में रखा गया था।

डॉ साराभाई की विज्ञान की शिक्षा में बहुत अधिक रुचि थी और उन्होंने 1966 में एक कम्यूनिटी साइंस सेंटर की स्थापना की । आज अहमदाबाद में, इस केंद्र को विक्रम ए साराभाई कम्यूनिटी साइंस सेंटर कहा जाता है ।