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Department of Space, Indian Space Research Organisation

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Filling up the post of Controller in U R Rao Satellite Centre (URSC), Department of Space, ISRO, Bengaluru in Level 14 of Pay Matrix (7th CPC) on Deputation basis (Last date for submission is 15/11/2021)
Announcement of Opportunity for Chandrayaan-2 science data utilisationLast date for submission of proposals is Oct 31, 2021
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पीएसएलवी-C37 की अनोखी सफलता

15 फरवरी, 2017 का, पीएसएलवी-C37, इसरो के विश्वसनीय प्रक्षेपण यान का 39वां मिशन है, जिसने 714 किलो के इसरो के कार्टोसेट -2 सीरीज उपग्रह और दो इसरो नैनो उपग्रह अर्थात् आईएनएस-1ए (8.4 किलो) और आईएनएस-1 बी (9.7 किग्रा) वजन के और छह विदेशी देशों के 101 नैनो उपग्रहों को पृथ्वी से ऊपर 506किमी की सूर्य-समकालिक कक्षा (एसएसओ) में, 97.46 डिग्री के झुकाव के साथ कक्षा में अंतक्षेपण किया । विविध नैनो उपग्रहों का भार 1 से 10 किलोग्राम तक है । पीएसएलवी-C37 के ऑनबोर्ड पर वहन किए सभी 104 उपग्रहों का कुल वजन 1,378 किलोग्राम था।

इस मिशन में उपग्रहों की बड़ी संख्या उपग्रह सामंज्यस्य और मिशन के डिजाइन में नवीन दृष्टिकोण को अपनाने की मांग करता था ।

पारंपरिक उपग्रह एडेप्टर के अलावा, अर्थात्, पेलोड एडाप्टर (पीएलए) और बहु उपग्रह एडाप्टर (एमएसए), नव विन्यस्त छह कस्टम मेड एडेप्टरों को और नैनो उपग्रहों को बिठाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। इन एडेप्टर में से कुछ में बहु स्तरों में उपग्रहों को रखा गया था और उनमें से कुछ वाहन उपकरण बे पर ही लगाए गए थे। इस वास्तुकला ने पेलोड मात्रा का इष्टतम उपयोग करने के साथ ही इसे क्षमता सक्षम बनाया ।

भू केंद्रों की सीमित अवधि दृश्यता बाधा के दौरान उपग्रहों के इन बड़ी संख्या में सुरक्षित पृथकरण का प्रबंध किया गया था और समय की लंबी अवधि में पृथक हुए उपग्रहों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखना दूसरी आवश्यकता थी।

PS4 चरण जिसके साथ उपग्रह जुड़े थे इन उपग्रहों को पृथक करने के लिए अद्वितीय डिजाइन अनुक्रमण और समय द्वारा और जटिल कौशल के साथ प्रबंधित किया गया था । पृथकरण अनुक्रम, दिशा और समय के व्यापक अध्ययन से 105 वस्तुओं(PS4 चरण सहित) को कक्षा के बीच सुरक्षित दूरी सुनिश्चित करने के आधार पर अंतिम रूप दिया गया है, जो जोड़ो में 5460 बार प्रदर्शित होते हैं ।

अगली प्रमुख घटना में संबंधित उपग्रहों को पूर्वनिर्धारित अनुक्रम में  लांचर के आदेश से पृथकरण की पहुंच को सुनिश्चित करने के लिए, जिसमें जटिल विद्युत तारों की योजना शामिल थी । तारों में किसी भी तरह की त्रुटि का परिणाम गलत उपग्रह को अवमुक्त करने और उन दोनों के बीच टकराव की अवांछनीय स्थिति हो सकती है।

इस मिशन में एक और नई सुविधा वाहन चरणों के ऑनबोर्ड पर व्यापक वीडियो इमेजिंग प्रणाली का उपयोग कर सभी पृथकरण की घटनाओं और 104 उपग्रहों को कैप्चर करना था।

सावधानीपूर्वक योजना संयोजन और सभी उप प्रणालियों और उपग्रह तैयारी की हैंडलिंग एसडीएससी शार के प्रक्षेपण परिसर में किया गया था । इसके अलावा एसएसओ में प्रमोचन, उप जीटीओ और बहु ​​कक्षा मिशन, पीएसएलवी ने एक बार फिर से विश्वसनीय वाहन के रूप में पीएसएलवी-C37 की तरह बहुत जटिल मिशनों को  उत्तरदायित्व लेने को स्थापित किया है।

देखें-  पीएसएलवी-C37 उत्थापन और ऑनबोर्ड कैमरा वीडियो

पीएसएलवी-C37 के साथ 104 उपग्रहों का उत्थापन

पीएसएलवी-C37 के साथ 104 उपग्रहों का उत्थापन