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Department of Space, Indian Space Research Organisation

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Announcement of Opportunity for Chandrayaan-2 science data utilisationLast date for submission of proposals is Oct 31, 2021
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स्कैटसैट-1 डेटा का उपयोग कर ध्रुवीय सागर बर्फ मानीटरण

सागर बर्फ कवर एक महत्वपूर्ण पैरामीटर है जोकि जलवायु परिवर्तन के लिए ध्रुवीय प्रतिक्रिया को इंगित करता है। सागर बर्फ स्थिति के बारे में जानकारी समुद्री नेविगेशन और समुद्री परिसंचरण समझने और भू जलवायु परिवर्तन की भविष्यवाणी के लिए बेहद उपयोगी है। ध्रुवीय क्षेत्रों में सागर बर्फ वायुमंडल और समुद्र के बीच पतली विद्युतरोधी के रूप में कार्य करता है। उपग्रह सुदूर संवेदन वैश्विक स्तर पर समुद्री बर्फ स्थिति पर नजर रखने में मदद करता है।

स्कैटसैट -1 (26 सितम्बर 2016 को प्रमोचित) ऑनबोर्ड केयू-बैंड प्रकीर्णमापी इसरो की दूसरी अंतरिक्ष जनित प्रकीर्णमापी ओशनसैट -2 ऑनबोर्ड प्रकीर्णमापी के OSCAT के समान है । यह पेलोड विश्व स्तर पर सागर के ऊपर हवा पैटर्न, वायु-समुद्र अन्योन्यक्रिया, सागर परिसंचरण और मौसम के मिजाज पर उनके समग्र प्रभाव का अध्ययन करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला महत्वपूर्ण उपकरण है। जलवायु गुणवत्ता के आंकड़े हिमालय की बर्फ गठन और पिघलन, भारतीय तटीय रेखा के पास चक्रवात गठन, ग्रीनलैंड में बर्फ पिघलन आदि, के बारे में सही जानकारी प्रदान करेगा ।

संकर वर्गीकरण तकनीक समुद्री बर्फ और खुले समुद्र के पानी का अंतर करने के लिए स्कैटसैट -1 वर्गीकृत डेटा (2.25 किमी) विकसित किया गया है। यह दोनों क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर ध्रुवण (σ0H और σ0V) में σ0 कंपोजिट का उपयोग करता है और सामान्यीकृत छद्म ध्रुवीकरण गुणवत्ता जिसे सक्रिय ध्रुवीकरण अनुपात (एपीआर) के रूप में जाना जाता है उसे परिभाषित करता है।

स्कैटसैट -1 डेटा के समय श्रृंखला में स्पष्ट रूप से आर्कटिक में बढ़ता समुद्री बर्फ और अंटार्कटिक में घटता समुद्री बर्फ को नवंबर 2016 से जनवरी 2017 तक दिखाता है । यह 5-दिनों के अंतराल में स्कैटसैट -1 के एफसीसी से तैयार एनीमेशन आर्कटिक और अंटार्कटिक पर डेटा (2.25किमी) में दिखाया गया है ।

आर्कटिक और अंटार्कटिक पर समुद्र बर्फ बदलाव को दिखाता स्कैटसैट-1 डेटा

बढ़ता समुद्री बर्फ घटता समुद्री बर्फ
आर्कटिक अंटार्कटिक
आर्कटिक

अंटार्कटिक

मुख्य अवलोकन

नवंबर 2016 के प्रथम सप्ताह में मैत्री के पास अंटार्कटिक तट (भारतीय अंटार्कटिक अनुसंधान केंद्र) में स्कैटसैट -1 से उपलब्ध स्तर 4 डेटा ने भारत खाडी के पास पोलिन्या (समुद्री बर्फ से घिरा खुले पानी का क्षेत्र), के प्रारंभिक गठन का पता चला। दिसंबर 2016 के प्रथम सप्ताह तक पोलिन्या का आकार बड़ा हुआ। 36 साल के जनित डेटा के विश्लेषण से पता चलता है कि सागर बर्फ बनने की संभावना नवंबर महीने की शुरुआत से  दिसंबर अंत तक के दौरान पोलिन्या का गठन होता है।

स्कैटसैट-1 डेटा का उपयोग कर ध्रुवीय सागर बर्फ मानीटरण


आर्कटिक गर्मियों में न्यूनतम सागर बर्फ कवर परिवर्तन स्कैटसैट -1 डेटा(अक्टूबर 02, 2016) और OSCAT डेटा (अक्टूबर 02, 2011) का उपयोग कर देखा गया। यह भी देखा गया है कि 2016 के दौरान समुद्र बर्फ कवर 2011 तुलना में कम पाया गया है, जो पिछला सबसे कम समुद्री बर्फ रिकॉर्ड किया गया था ।

स्कैटसैट-1 डेटा का उपयोग कर ध्रुवीय सागर बर्फ मानीटरण