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ठीक 25 साल पहले प्रमोचित आईआरएस -1 बी की याद

अगस्त 29, 2016

आईआरएस -1 बी, भारत देश में विकसित सुदूर संवेदन उपग्रहों की श्रृंखला का दूसरा उपग्रह, जिसे बैकनूर,  सोवियत कास्मोड्रोम से 29 अगस्त, 1991 को सफलतापूर्वक ध्रुवीय सूर्य समकालिक कक्षा में प्रमोचित किया गया था। इसने त्री रेखीय इमेजिंग स्व-स्कैनिंग (लिस) को 0.45-0.52 माइक्रोन, 0.52-0.59 माइक्रोन, 0.62-0.68 माइक्रोन, और 0.77-0.86 माइक्रोन के चार वर्णक्रमीय बैंड में काम करने वाले रिमोट सेंसिंग उपकरणों को वहन किया था।  38.5 किलो लिस- I प्रतिबिंब 148 किलोमीटर प्रमार्ज, 72.5 मीटर के विभेदन के साथ, जबकि 80.5 किलो लिस-।। ए प्रतिबिंब, और लिस-।।बी संकरा क्षेत्र दृश्य (74 किमी प्रमार्ज)प्रदर्शन किया, लेकिन समग्र 145 कि.मी. प्रमार्ज प्रदान करने के लिए जिसे 3 किमी ओवरलैप और 36.25 मीटर के विभेदन के लिए संरेखन किया गया ।

आईआरएस -1 बी में आईआरएस -1 ए की तुलना में बेहतर जायरो संदर्भ जैसे बेहतर अभीमुखीकरण संवेदक, कैमरा संचालन के लचीलेपन के लिए समय चिह्नित आदेशन, बेहतर डेटा उत्पाद जनन के लिए रूपरेखा गणना जानकारी सुविधाएं थी।

आईआरएस -1 बी, ने उपयोगकर्ता समुदाय के लिए नियमित रूप से डेटा प्रदान की बेहतर प्रदर्शन के साथ आईआरएस -1 ए के समान है। उपग्रह से डेटा एकीकृत मिशन के क्षेत्र कृषि, वानिकी, बाढ़ मानचित्रण, बंजर भूमि मानचित्रण, भूमि उपयोग/भूमि कवर मानचित्रण, बर्फ गलन और रनऑफ अध्ययन, शहरी फैलाव अध्ययन, गेहूं उत्पाद अनुमान, पानी के स्रोत का पता लगाने आदि के दीर्घकालिक विकास के विभिन्न उपयोग के लिए किया गया था ।

आईआरएस -1 बी ने 12 साल और 4 महीने के लिए सेवा प्रदान की और मिशन 20 दिसंबर, 2003 को पूरा हो गया था । इस उपग्रह ने भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रहों में आत्मविश्वास पैदा किया और जिसने भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए निरंतर समर्थन दिया था, और धीरे-धीरे लैंडसैट से उपयोगकर्ताओं को आईआरएस-1B के लिए स्थानांतरित कर दिया गया था ।

तीन मौसमों (रबी, खरीफ और ग्रीष्मकालीन) के डेटा सेट इसरो की अभिलेखीय नीति के अनुसार संग्रहीत किया गए थे। 1991 से 2001तक लिस-। के 64,939 दृश्य और लिस-।। के 2,59,756 दृश्य डेटा संग्रहित किए गए थे । आईआरएस -1 बी के लिस-। के 6126 के उत्पादों और लिस-।। के 41,640 उत्पादों के डेटा को विभिन्न उपयोगकर्ताओं के लिए वितरित किया गया है जिससे 14.5 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया गया है।

आज भी, समय श्रृंखला के अध्ययन के लिए संग्रहीत डेटा का शिक्षाविदों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है और ये ऐतिहासिक डेटा विधि अध्ययन के नए उभरते अनुप्रयोगों के लिए बहुत उपयोगी होते हैं।