अध्यक्ष इसरो, सचिव अं.वि.

 

श्री आलुरू सीलिन किरण कुमार, विशिष्ट वैज्ञानिक (एपेक्स) और निदेशक, अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, अहमदाबाद, ने 14 जनवरी, 2015 को सचिव, अंतरिक्ष विभाग, अध्यक्ष, अंतरिक्ष आयोग और अध्यक्ष, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का पद ग्रहण किया ।

श्री किरण कुमार बेहद निपुण अंतरिक्ष वैज्ञानिक और प्रतिष्ठित इंजीनियर कैरियर के साथ उपग्रह पेलोड और उपयोगों डोमेन में इसरो में चार दशकों से हैं।

उन्होंने एयरबोर्न के लिए इलेक्ट्रो ऑप्टिकल इमेजिंग सेंसर, निम्न भू कक्षा और भू-स्थिर कक्षा में उपग्रहों में भास्कर टीवी से शुरू करके मार्स ऑर्बिटर मिशन तक पेलोड का डिजाइन और विकास के लिए अपार योगदान दिया है।

श्री किरण कुमार ने मंगल ग्रह के अच्छी तरह से मंगल कक्षा निवेशन की ओर मंगल कक्षित्र यान संचालन के लिए सफल रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने भूमि, सागर, वायुमंडलीय और ग्रह के अध्ययन में व्यापक अवलोकन युक्ति शामिल करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

श्री किरण कुमार नेशनल कॉलेज, बैंगलोर के सम्मानित शिक्षण संस्थान के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने भौतिकी (ऑनर्स) की डिग्री बैंगलोर विश्वविद्यालय से 1971 में, बाद में 1973 में उसी विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक्स में मास्टर डिग्री प्राप्त की, और उसके बाद एमटेक की डिग्री भौतिकी इंजीनियरिंग में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलोर से 1975 में हासील की ।

श्री किरण कुमार ने 1975 में अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (सैक) में इसरो में अपने कैरियर को शुरू किया, बाद में वे सहनिदेशक बन गए और मार्च 2012 में सैक के निदेशक के रूप में पदभार संभाल लिया।

सैक में, श्री किरण कुमार ने पेलोड और पृथ्वी अवलोकन, संचार, नौवहन, अंतरिक्ष विज्ञान और ग्रहों के अन्वेषण उपयोग गतिविधियों के डिजाइन, विकास और प्राप्ति का संचालन किया है।

श्री किरण कुमार कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान/पुरस्कार जैसे 2014 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त पद्मश्री सहित अनेक पुरस्कार के प्राप्तकर्ता हैं, 2008 में कार्टोसेट के लिए एस्ट्रोनॉटिक्स इंटरनेशनल अकादमी, और 2013 में चंद्रयान -1 के लिए टीम अचीवमेंट अवार्ड, वर्ष 1994 में इंडियन सोसायटी रिमोट सेंसिंग (आईएसआरएस) अवार्ड, वर्ष 1998 में वासविक पुरस्कार (इलेक्ट्रॉनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी), वर्ष 2001 में एस्ट्रोनॉटिकल सोसायटी इंडिया अवार्ड (अंतरिक्ष विज्ञान और उपयोग), 2006 में इसरो व्यक्तिगत सेवा पुरस्कार, 2007 में आईएसआरएस के लिए भास्कर अवार्ड और 2008 में इसरो निष्पादन उत्कृष्टता अवार्ड।

वे भारतीय राष्ट्रीय इंजीनियरिंग अकादमी, इंडियन सोसायटी ऑफ रिमोट सेंसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार इंजीनियर संस्था, और भारतीय मौसम विज्ञान सोसायटी जैसे पेशेवर संस्थानों के फेलो हैं। इसके अलावा, वे एस्ट्रोनॉटिक्स इंटरनेशनल अकादमी के सदस्य हैं।

श्री किरण कुमार ने विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ), भू अवलोकन उपग्रह समिति (सीईओएस) और नागरिक अंतरिक्ष सहयोग पर भारत-अमेरिका संयुक्त कार्य समूह जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों में इसरो का प्रतिनिधित्व किया है।

शिक्षा

बीएससी ऑनर्स (भौतिकी), 1971, बंगलौर विश्वविद्यालय
एमएससी (भौतिकी), 1973, बंगलौर विश्वविद्यालय इलेक्ट्रॉनिक्स में विशेषज्ञता के साथ
एम टेक, भौतिक इंजीनियरिंग, 1975, भारतीय संस्थान विज्ञान, बंगलौर

जन्म तारीख

अक्टूबर 22, 1952 हासन, कर्नाटक

राष्ट्रीय मान्यता

पद्म श्री पुरस्कार
इसरो के लिए गांधी शांति पुरस्कार 2014

धारित पद

1998 - 2006 - समूह निदेशक (प्रधान अन्वेषक, चंद्रयान -1), विद्युत प्रकाशिकी सेंसर विकास
2004 -- 2004 - एसोसिएट परियोजना निदेशक, कार्टोसैट 2 सैटेलाइट पेलोड
2006 -- 2006 - उप निदेशक, सेंसर विकास क्षेत्र, अंतरिक्ष उपयोग केंद्र
2008 -- 2008 - समूह निदेशक (प्रधान अन्वेषक, चंद्रयान -1), टीएमसी/ HySI उपकरण, अंतरिक्ष उपयोग केंद्र
2009 - एसोसिएट निदेशक, अंतरिक्ष उपयोग केंद्र
2012 - निदेशक, अंतरिक्ष उपयोग केंद्र
2015 -- 2015 - सचिव, अंतरिक्ष विभाग, अध्यक्ष, अंतरिक्ष आयोग और अध्यक्ष, इसरो

मुख्य उपलब्धियां

श्री ए एस किरण कुमार, अध्यक्ष, इसरो, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम उपयोगों के अभीमुखी कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार हैं, जो कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में देश का तेजी से विकास में मदद करता है । वे इस क्षत्र में, उपग्रहों और भू अवलोकन, संचार, नौवहन, मौसम विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए संबंधित प्रौद्योगिकियों के विकास के साथ-साथ अंतरिक्ष के लिए सुनिश्चित पहुँच प्रदान करने के लिए स्वदेशी प्रक्षेपण वाहन और संबंधित तकनीकों के विकास के संचालक हैं। उन्होंने विद्युत प्रकाशिकी प्रणाली के विकास में कई बेहतरीन प्रौद्योगिकियों को लागू किया है और इन पहुलूओं से अब भारत में सुदूर संवेदन उपग्रहों की स्पृहनीय समूह के रूप में उभरा है। ग्रहों के अन्वेषण मिशन की सफलता में अर्थात्,चंद्रयान -1 1 और मंगल कक्षित्र मिशन (संकल्पना चरण से महत्वपूर्ण कक्षीय प्रविष्टि तक) उसी तरह अंतरिक्ष विज्ञान मिशन -एस्ट्रोसैट में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भारतीय राष्ट्रीय क्षेत्रीय नौवहन प्रणाली ((आईआरएनएसएस) ) और गगन के लिए उन्नत संचार नीतभार के उच्च प्रवाह क्षमता/बैंडविड्थ उपलब्ध कराने, नौवहन नीतभार उनकी देखरेख में विकसित किया है।

श्री किरण कुमार सक्रिय रूप से भू अवलोकन उपग्रह (सीईओ) समिति के अंशांकन और सत्यापन की गतिविधियों के कार्य समूह में जुड़े रहे (CEOS) और 2012 के दौरान सीइओएस की अध्यक्षता की । मौसम विज्ञान उपग्रहों की समन्वय समूह(सीजीएमएस), उपग्रह प्रणाली पर विशेषज्ञ समूह - विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ की ईटसैट) और भारत-अमेरिका संयुक्त कार्य समूह नागरिक अंतरिक्ष सहयोग(CGMS),जैसे अन्य । (वे )अंतर्राष्ट्रीय मंचों में योगदान दिया है मेघा-ट्रापिक्स औरसरल और अब सक्रिय रूप सेनासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (निसार) के विकास में अग्रणी भूमिका सहित अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ कई उपग्रहों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण सदस्य रहे हैं। (निसार).

वे विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में शासन और विकास के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी आधारित उपकरणों को बढ़ावा देने की पहल में अग्रणी रहे हैं, अभिनव अंतरिक्ष उपयोग संकल्पना, अंतरिक्ष उपयोग की भूमिका को बढ़ाने के लिए मंत्रालयों और क्षमता निर्माण के तंत्र को मजबूत बनाने में शासन में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठों की स्थापना की है । उनके योगदान ने जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण प्रभाव के साथ अत्याधुनिक उपयोग प्रदान करने के लिए भारत को सुदूर संवेदन, संचार और नौवहन प्रणाली उपग्रह के उपयोग में सक्षम बनाया है। विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके योगदान को मान्यता देने के लिए `भारत सरकार ने वर्ष 2014 में प्रतिष्ठित ’ पद्मश्री 'पुरस्कार से सम्मानित किया वे 2008 में कार्टोसेट और 2013 में चंद्रयान -1 के लिए एस्ट्रोनॉटिक्स इंटरनेशनल अकादमी की टीम अचीवमेंट सम्मान के प्राप्तकर्ता हैं ।

शासन और विकास संबंधी पहल

श्री किरण कुमार के नेतृत्व में, इसरो विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में शासन और विकास में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी आधारित उपकरणों को बढ़ावा देने की पहल पर मुहिम चला रहा है। उनके नवीन अंतरिक्ष उपयोग संकल्पना जी-गवर्नेंस पहल से अंतरिक्ष उपयोग की भूमिका को बढ़ाने के लिए केंद्रीय मंत्रालयों में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कोष्ठ की स्थापना और क्षमता निर्माण के तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में असली ताकत है। गगन सक्षम स्थान आधारित सेवाओं के उपयोग को अधिकतम करने के पीछे उनका हाथ है।

एवं सम्मान

  • भारत के माननीय राष्ट्रपति द्वारा 2014 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित
  • इसरो को गांधी शांति पुरस्कार 2014
  • गुजर मल मोदी विज्ञान फाउंडेशन द्वारा जी.एम.मोदी विज्ञान पुरस्कार 2016
  • आंध्र प्रदेश विज्ञान अकादमी द्वारा लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्ड 2016
  • कर्नाटक सरकार दवारा राज्योत्सव पुरस्कार में 2015
  • आईआईएससी भूतपूर्व गणमान्य छात्र पुरस्कार वर्ष 2015
  • सर एम विश्वेश्वरैया वरिष्ठ वैज्ञानिक राज्य पुरस्कार वर्ष 2013
  • गुजरात अभिनव सोसायटी द्वारा गुजरात रत्न "लाइफ फार इनोवेशन" पुरस्कार प्रदत्त
  • एस्ट्रोनॉटिक्स इंटरनेशनल अकादमी द्वारा टीम अचीवमेंट अवार्ड 2013(चंद्रयान -1) के लिए सम्मान इसरो निष्पादन उत्कृष्टता पुरस्कार 2008
  • इसरो निष्पादन उत्कृष्टता पुरस्कार 2008
  • एस्ट्रोनॉटिक्स इंटरनेशनल अकादमी द्वारा टीम अचीवमेंट अवार्ड 2008 (कार्टोसेट) के लिए सम्मान
  • इंडियन सोसायटी रिमोट सेंसिंग 2007 द्वारा भास्कर पुरस्कार प्रदत्त
  • इसरो व्यक्तिगत सेवा पुरस्कार 2006
  • एस्ट्रोनॉटिकल सोसायटी ऑफ इंडिया अवार्ड (अंतरिक्ष विज्ञान और उपयोग) 2001
  • वासविक पुरस्कार (इलेक्ट्रॉनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी) 1998
  • इंडियन सोसाइटी द्वारा रिमोट सेंसिंग अवार्ड 1994

He has had a distinguished career adorned with accomplishments spanning beyond 41 years in space technology, applications and space programme management.

  • Starting his career as an Avionics Engineer in May 1971 at ISRO’s Vikram Sarabhai Space Centre (VSSC), Thiruvananthapuram; he commendably held several decisive positions in ISRO later such as Project Director for setting up Regional Remote Sensing Centers (1987-89); Director of Budget & Economic Analysis for entire ISRO (1987-97); Director of National Natural Resources Management System-Regional Remote Sensing Service Centers (1989-97); Mission Director of Integrated Mission for Sustainable Development and Deputy Director of National Remote Sensing Agency (1997-2000); Director of National Remote Sensing Agency (2005-08); Director of Vikram Sarabhai Space Centre (2007-09); and Member, Space Commission (October 2008-October 2009) with some responsibilities in concurrence.
  • During July 2000-November 2005, he had a stint in the Department of Ocean Development (currently Ministry of Earth Sciences) as the Founder Director of Indian National Centre for Ocean Information Services and the first Project Director of Indian National Tsunami Warning System.
  • He held several important positions at the international level during his tenure at Department of Ocean Development and also in ISRO. The prestigious positions include Vice Chairman of Intergovernmental Oceanographic Commission (2001-05), Regional Coordinator (Indian Ocean) for International Project on Argo Profiling Floats (2001-05), Founder Chairman of Indian Ocean Global Ocean Observing System (2001-06), Chairman of the Working Group of the Whole of UN-COPUOS STSC (2008-2009) and Leader of Indian delegation to UN-COPUOS (2008-09).

In November 01, 2009, Dr. Radhakrishnan assumed the concomitant responsibilities of Chairman of Space Commission and Secretary, Department of Space, Government of India as well as the Chairman of ISRO Council (Chairman, ISRO).

  • Also, he has been also holding related ex-officio portfolios as (i) Chairman of INSAT Coordination Committee; (ii) Chairman of Board of Management of Indian Institute of Space Science & Technology (IIST), Thiruvananthapuram; (iii) Chairman of Management Council of Semiconductor Laboratory (SCL),Chandigarh; (iv) Chairman of Governing Council of North-Eastern Space Applications Centre, Shillong; (v) Chairman of Governing Council of National Atmospheric Research Laboratory, Tirupati; (vi) Member of Council of Physical Research Laboratory, Ahmedabad, and (vii) Member of Planning Committee of National Natural Resources Management System (PC-NNRMS). He was Chairman of the Board of ANTRIX Corporation Ltd during Nov 2009-July 2011.
  • He is Member of the CSIR Society and Governing Body (since 2011) and Chairman of Research Council, National Aerospace Laboratory of CSIR (since April 2010).
  • He is Ex-officio Member of the Scientific Advisory Committees to PM and to the Cabinet. Also, he is a Member of the Council of NITs, Governing Councils of several IISERs.

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए योगदान

श्री किरण कुमार 1975 में इसरो के अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (सैक) अहमदाबाद में सेवा प्रारंभ की । सैक में चार दशकों के अपने कैरियर की अवधि के दौरान, उन्होंने एयरबोर्न, निम्न भू कक्षा (Leo) और भू-स्थिर कक्षा(जीइओ) प्लेटफॉर्म से संचालित 50 से अधिक इलेक्ट्रो ऑप्टिकल इमेजिंग सेंसर के विकास के लिए अपार योगदान दिया है - भास्कर टीवी पेलोड से शुरू करते हुए भूमि, समुद्र और वातावरण अवलोकन योजना के विकास में नेतृत्व किया है । इन अभियानों से प्राप्त डेटा देश के बृहत उपयोग कार्यक्रम की रीढ़ रही है, जिससे भोजन और पानी की सुरक्षा सुनिश्चित करना, पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखना, मौसम और जलवायु को समझना, प्राकृतिक संसाधनों का मानीटरण और विकासात्मक गतिविधियों की योजना और मानीटरण, प्रबंधन के लिए समर्थन और शासन के लिए जानकारी, आपदा की घटनाओं के दौरान प्रबंधन और शमन करना है ।

निदेशक, अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के रूप में, श्री किरण कुमार के संचार, नौवहन, माइक्रोवेव और ऑप्टिकल रिमोट सेंसिंग पेलोड, अंतरिक्ष आधारित विभिन्न उपयोगों के डिजाइन, विकास व प्राप्ति के साथ केंद्र में उत्कृष्ट प्रशासनिक और प्रबंधन कौशल सुनिश्चित करते हुए नेतृत्व किया।

उन्होंने अध्यक्ष/सदस्य के रूप में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से महत्वपूर्ण अंतरिक्ष यान प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए डिजाइन की समीक्षा और क्रांतिक प्रक्रियाओं में योगदान दिया है। इनमें भू निम्न कक्षा में उपग्रहों, भूस्थिर उपग्रहों और ग्रहीय मिशन उपग्रहों सहित मिशन तत्परता समीक्षा, पीएसएलवी का प्रक्षेपण प्राधिकार बोर्ड, जीएसएलवी मिशन और जीएसएलवी मार्क III के एकीकृत तकनीकी समीक्षा आदि शामिल हैं। उन्होंने भू खंड की गतिविधियों, सेटेलाइट डाटा अधिग्रहण, डाटा प्रोसेसिंग, भूभौतिकीय पैरामीटर पुनर्प्राप्ति, उत्पाद जनन और आईआरएस और इन्सैट श्रृंखला दोनों के लिए उत्पाद के प्रकीर्णन में योगदान दिया है।

उन्होंने इलेक्ट्रो ऑप्टिकल इमेजिंग सेंसर एयरबोर्न, निम्न भू कक्षा(एलईओ) और भू-स्थिर भू कक्षा(जीईओ) प्लेटफॉर्म की विस्तृत श्रृंखला के लिए भास्कर टीवी पेलोड से शुरू करते हुए मोम के लिए एमएसएम, टीआईएस और एमसीसी पेलोड के लिए आधारित इमेजिंग सेंसर के डिजाइन और विकास के लिए प्रेरित किया है । वे 1992 से इन्सैट -2 ए/2बी/2ई, कल्पना के लिए उच्च विभेदन रेडियोमीटर के विकास और इन्सैट -3 ए के लिए मौसम संबंधी उपयोगों के लिए भूस्थिर कक्षा से मल्टी चैनल प्रतिबिंबों और मौसम संबधी अनुप्रयोग प्रदान करने और इन्सैट-3 डी के लिए अगली पीढ़ी के 6 चैनल इमेजर और 19 चैनल परिज्ञापक उपकरणों के लिए जिम्मेदार हैं, उसके परिणाम स्वरूप देश में मौसम के मानीटरण और पूर्वानुमान सेवाओं के संबंध में गुणात्मक वृद्धि हुई है । इसके अलावा, वे इन्सैट आधारित मौसम विज्ञान डाटा प्रोसेसिंग प्रणाली (IMDPS) भारत मौसम विज्ञान विभाग, नई दिल्ली और सैक, भोपल के भू केंद्र के बैक अप प्रणाली प्रचालनीकरण की दिशा में टीम का नेतृत्व किया । इस मूल्यवान डेटा के परिचालन की उपलब्धता, कल्पना -1 वीएचआरआर और इन्सैट -3 ए सीसीडी पेलोड के प्रतिबिंब पर आधारित हर आधे-घंटे के प्रतिबिंब देश में विभिन्न उपयोगकर्ताओं को डेटा के उपयोग में काफी सुधार हुआ है।

श्री किरण कुमार ने महासागर पवन वैक्टर सदिश आवश्यक जनन के लिए संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल में उपयोग के लिए ओशनसैट -2 स्कैट्रोमीटर डेटा के प्रचालनीकरण में बड़े पैमाने पर योगदान दिया है और इसे वैश्विक उपयोगकर्ता समुदाय के लिए उपलब्ध बनाने की दिशा में काम किया है।

उन्होंने ``स्पष्ट वेग में कमी'(चरण और ताक अवधारणा) की अवधारणा में अनुपलब्धता मुद्दों पर काबू पाकर बहुत ही उच्च विभेदन उप-मीटर इमेजिंग क्षमता को लाने की टीईएस(2001), कार्टोसैट -2, 2ए और 2 बी मिशन के हिस्से के रूप में सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया जबकि उसी समय पूश ब्रुम प्रौद्योगिकी को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ।

स्थलाकृतिक/भूमि उपयोगों के लिए, रिसोर्ससैट -2 से आईआरएस -1 सी के लिए 3-टियर इमेजिंग अवधारणा से स्थूल विभेदन बृहत प्रमार्ज, मध्यम विभेदन मध्यम प्रमार्ज और उच्च विभेदन छोटे प्रमार्ज को साकार किया और कार्टोसेट-1 मिशन से अनुवर्तन स्टीरियो पेलोड के साथ उच्चतम स्थानिक विभेदन का विकास किया जो पूरे देश के लिए डिजिटल एलिवेशन मॉडल (डीईएम) की प्राप्ति हेतु मार्गदर्शन प्रदान किया । उन्होंने भारत के पहले माइक्रोवेव इमेजिंग उपग्रह रीसैट -1 के लिए अंतरिक्ष जनित सिंथेटिक एपर्चर रडार के विकास के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया है।

उन्नत संचार पेलोड के प्रवाह क्षमता/बैंडविड्थ उपलब्ध कराने के, भारतीय राष्ट्रीय क्षेत्रीय नौवहन प्रणाली (आईआरएनएसएस) और गगन के लिए नेविगेशन पेलोड उनकी देखरेख में विकसित किया गया है। उन्होंने स्वदेशी आईएमएस -1 में वाहित सीसीडी प्रौद्योगिकी और आईआर संवेदनशील क्वांटम डॉट क्षेत्र व्यूह संसूचकों के विकास करने के लिए प्रेरित किया है।

चंद्रयान -1 मिशन

उन्होंने चंद्रयान -1 मिशन की मिशन अवधारणा (अध्ययन टीम के सदस्य के रूप में) के सफल शुरुआत की दिशा में कई महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने नीतभार/मिशन के प्रचालनों और प्रबंधन में, कक्षा प्रचालनों, डाटा संसाधन के प्रचालनीकरण, चंद्र एटलस को तैयार करने और प्रमुख के रूप में टेरेन मैपिंग कैमरा और हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजर की अन्वेषक विज्ञान अनुसंधान समुदाय के लिए डीईएम और हैपरस्पेक्ट्रल की उपलब्धता सुनिश्चित की है (खोज से 20 से अधिक सह-लेखक पत्रों के प्रकाशन हुए हैं) ।

मंगल कक्षित्र मिशन

मंगल कक्षित्र मिशन के सफल क्रियान्वयन के लिए अनुकरणीय योगदान दिया है । वे सक्रिय रूप से मिशन के प्रत्येक चरण जैसे मिशन योजना, अंतरिक्ष यान विन्यास, पेलोड चयन, डिजाइन, विकास और ऑप्टिकल पेलोड (मंगल कलर कैमरा, मंगल के लिए मीथेन सेंसर और तापीय इन्फ्रारेड प्रतिबिंब संवेदक) की प्राप्ति, प्रमोचन पश्च अनुवर्तन गतिविधियों, भू ज्वलन, ट्रांस-मंगल ग्रह अंतःक्षेपण, नौवहन, मंगल ग्रह कक्षा प्रविष्टि, उच्च परिशुद्धता कक्षा कौशल (पूर्व/पश्च प्रविष्टि), नीतभार प्रचालनों और अन्य डेटा संसाधन प्रचालनीकरण के लिए जुड़े रहें ।

उनके अन्य योगदानों में भारतीय भू-प्रेक्षण कार्यक्रम और ग्रह विज्ञान के लिए अंतरिक्ष संविरचना, भू खंडों की स्थापना शामिल है । उनके नेतृत्व करने के लिए धन्यवाद, देश की सुदूर संवेदन क्षमताओं ने अब उन्नत देशों के साथ बराबरी की है और संभावित मत्स्य क्षेत्रों से लेकर खतरों के आकलन की जानकारी के माध्यम से समाज को मदद मिली है। इन स्वदेशी घटनाक्रमों ने राष्ट्र के लिए प्रौद्योगिकी आधार बनाने में मदद मिली है।

विज्ञान अकादमियों और संगठनों की फैलोशिप

  • भारतीय विज्ञान नेशनल एकेडमी (आई एन ए एस)
  • भारतीय राष्ट्रीय इंजीनियरिंग अकादमी (आईएनएई)
  • रिमोट सेंसिंग इंडियन सोसायटी (आईएसआरएस))
  • इलेक्ट्रानिक्स और दूरसंचार इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (आईईटीई)
  • भारतीय मौसम विज्ञान सोसायटी (आईएमएस)
  • गुजरात विज्ञान अकादमी (जीएसए) (GSA)
  • आंध्र प्रदेश विज्ञान अकादमी

व्यावसायिक निकायों में सदस्यता / भूमिका

अध्यक्ष:
रिमोट सेंसिंग इंडियन सोसायटी (आईएसआरएस) जियोमेटिक्स इंडियन सोसायटी (आईएसजी) भारत के एस्ट्रोनॉटिकल सोसायटी (एएसआई)(ASI)

सदस्य :
एस्ट्रोनॉटिक्स इंटरनेशनल अकादमी (आईएए)(IAA)

श्री किरण कुमार को काजीरंगा विश्वविद्यालय और डॉ एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय सहित 10 से अधिक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से मानद उपाधी से सम्मानित किया है।/p>

प्रकाशन

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं दोनों में 76 अनुसंधान प्रकाशन।
किताबें, मोनोग्राफ और पत्रिकाओं सहित छह प्रकाशन
पुस्तकों में एक अध्याय के रूप में कई लेख

अंतरराष्ट्रीय निकायों के साथ सहयोग

श्री किरण कुमार को अंशांकन और सत्यापन की गतिविधियों के फोरम जैसे भू अवलोकन उपग्रह (सीईओ) समिति, मौसम विज्ञान उपग्रह समन्वय समूह (CGMS), उपग्रह प्रणाली पर विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ का इटसैट) में टीम विशेषज्ञ और नागरिक अंतरिक्ष सहयोग पर भारत-अमेरिका संयुक्त कार्य समूह हेतु योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है । अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में जब वह भू अवलोकन उपग्रह अंतर्राष्ट्रीय समिति (सीईओ) के अध्यक्ष थे और 2012 मे सीइओ का नेतृत्व एक और सफलता है । श्री किरण कुमार ने कई द्विपक्षीय सहयोग में सफलताएं प्राप्त की है – जिनकी वजह से इसरो वैश्विक इकाई बना और अंतरिक्ष में विकासशील देश के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया । उन्होंने एल और एस बैंड एसएआर के संयुक्त उपग्रह विकास के लिए इसरो-नासा के सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।