जियोएमजीमनेरगा का राष्ट्रीय रोलआउट, विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित

राष्ट्रीय स्तर पर मनरेगा परिसंपत्तियों की जियोटैगिंग पहल की  माननीय श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, ग्रामीण विकास के केन्द्रीय मंत्री ने  30 नवंबर, 2016 को नई दिल्ली में रोलआउट की शुरूआत की। यह मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) की प्रगति में एक ऐतिहासिक क्षण था। मनरेगा देश में ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण प्रमुख कार्यक्रमों में से एक है। यह ग्रामीण भूमिहीन आबादी के लिए सार्थक और गुणात्मक रोजगार के अवसर पैदा करता है। ग्रामीण रोजगार सृजन ग्रामीण गरीबों की आर्थिक कमजोरी को कम करने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।

सुदूर संवेदन (आरएस) और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) को प्रभावी ढंग से संग्रहण, भंडारण तथा विश्लेषण महात्मा गांधी नरेगा परिसंपत्तियों (वाटरशेड स्थानों, खेत तालाब, अंतःस्त्रावी टंकी, बांधों, सड़क निर्माण, सिंचाई चैनलों, आदि) की जांच के लिए उपयोग किया जा सकता है। परिसंपत्ति प्रबंधन के क्षेत्र में जीआईएस के उपयोग के साथ, इससे मानसिक चित्रण और परिसंपत्ति की भौगोलिक संदर्भ को समझने और परिसंपत्ति प्रबंधन की दक्षता में सुधार करना संभव है। मनरेगा परियोजनाओं में जीआईएस के उपयोग से जियोटैगिंग तकनीकों के माध्यम से मनरेगा कार्य की जांच में मदद मिलती है और समय के साथ स्थान विशेष जानकारी की रिपोर्टिंग की जा सकती है।

सभी परिसंपत्ति डेटा का स्थानिक जांच इसका एक प्रमुख पहलू है और जीआईएस दृश्य और इससे उचित निर्णय लेने के लिए जानकारी के साथ-साथ सभी परिसंपत्तियों का मापन कर सकते हैं। मनरेगा के तहत परिसंपत्तियों का तकनीकी समाधान जियोटैगिंग जीपीएस आधारित स्थान जानकारी मोबाइल एप्लिकेशन का माध्यम अपनाकर की गई और भुवन जिओपोर्टल. पर क्षेत्र के बारे में जानकारी का चित्रण डाला गया है। जबकि पारदर्शिता और सुशासन लाने में यह तकनीक सटीक मानीटरण और परिसंपत्तियों के निर्माण में प्रगति के आकलन के लिए सक्षम बनाता है। ग्रामीण विकास मंत्रालय(एमओआरडी) ने संपत्ति डेटाबेस के निर्माण में यह दृष्टिकोण अपनाया है इससे संपत्ति परियोजना प्रबंधन के संबंध में और लंबे समय में लाभ मिलेगा । एनआईसी सर्वर और एनआरएससी भू-स्थानिक सर्वर के बीच स्थापित लिंकेज अत्याधुनिक वेबजीआईएस समाधान प्राप्त करने के इस पहल की अनूठी उपलब्धि होगी।

प्रारंभ मे परिसंपत्तियों के जियोटैगिंग के लिए मनरेगा पर  समझौता ज्ञापन(एमओयू)

के तहत 24 जून, 2016 को ग्रामीण विकास विभाग (DoRD), ग्रामीण विकास मंत्रालय, नई दिल्ली और राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी), इसरो, हैदराबाद, के बीच हस्ताक्षर किए गए थे । बाद में, मनरेगा के तहत भुवन क्षमता निर्माण 29 जुलाई, 2016 को आयोजित किया गया था । अगस्त 2016 के दौरान "जियोटैगिंग उपयोग" का उद्घाटन राष्ट्रीय उन्मुखीकरण कार्यशाला में किया गया था। बाद में, विस्तृत जानकारी मैनुअल के साथ वेब जियोपोर्टल के माध्यम से जियोटैगिंग और मानिटरण  के लिए '88 जिलों जियोटैगिंग रोलआउट' आयोजित किया गया था।

श्री नरेंद्र सिंह तोमर, ग्रामीण विकास मंत्री  ने उद्घाटन के बाद मनरेगा की प्रगति में राष्ट्रीय रोलआउट घटना को एक ऐतिहासिक क्षण होने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों की अपनी स्थापना के बाद से पूरा परिसंपत्तियों के पूरे देश भर में 6.5 लाख की संपत्ति की एक सूची और जियोटैगिंग   को साकार करने में इसकी अहम भूमिका को रेखांकित किया।

इस अवसर पर अन्य गणमान्य व्यक्ति डॉ जितेंद्र सिंह, राज्य मंत्री, पीएमओ, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा, श्री राम कृपाल यादव, ग्रामीण विकास राज्य मंत्री, श्री ए.एस. किरण कुमार, अध्यक्ष इसरो/सचिव, अंतरिक्ष विभाग, और श्री अमरजीत सिन्हा, सचिव, ग्रामीण विकास मंत्रालय उपस्थित थे । राज्य ग्रामीण विकास, एनआईआरडी, एनआईसी, एनआरएससी, डीओआरडी, आदि के अधिकारियों ने भी समारोह में भाग लिया।

केंद्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर और डॉ जितेंद्र सिंह ने संयुक्त रूप से "जियो मनरेगा 'का शुभारंभ करने के बाद स्टैंडर्ड आपरेटिंग मैनुअल पुस्तक का विमोचन किया ।

केंद्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर और डॉ जितेंद्र सिंह ने संयुक्त रूप से "जियो मनरेगा 'का शुभारंभ करने के बाद स्टैंडर्ड आपरेटिंग मैनुअल पुस्तक का विमोचन किया ।

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जियोटैग किए गए परिसंपत्तियों का भौगोलिक वितरण

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कर्नाटक में जियोटैग की गई परिसंपत्तियां - मॉडरेशन एवं सांख्यिकी

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