विश्वविद्यालय/शैक्षणिक संस्थान उपग्रह

इसरो ने संचार, सुदूर संवेदन एवं खगोलविज्ञान हेतु उपग्रह बनाने जैसी अपनी गतिविधियों से शैक्षणिक संस्थानों को प्रभावित किया है। चंद्रयान-1 के प्रमोचन ने प्रयोगात्मक विद्यार्थी उपग्रह बनाने की दिशा में विश्वविद्यालयों एवं संस्थापनों में रुचि बढ़ायी है। सक्षम विश्वविद्यालय एवं संस्थान निम्नलिखित तरीकों से इसरो के मार्गनिर्देशन एवं सहायता से कक्षीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में प्रयास कर सकते हैं।

नीतभार विकास (विश्वविद्यालयों/संस्थानों द्वारा)

हर उपग्रह नीतभार एवं मुख्य बस का वहन करता है, नीतभार मिशन लक्ष्य प्राप्त करने हेतु वांछित प्रकार्य निष्पादित करता है और मुख्य बस नीतभार प्रकार्य संभालती है। नीतभारों के विकास में संसूचक, इलेक्ट्रानिकी एवं सहयोगी एल्गोरिथम शामिल हैं जो इसरो की चालू (लघु या प्रचालनात्मक) उपग्रह परियोजनाओं पर प्रयोगात्मक परारोही नीतभार हो सकता है।

संसूचकों, नीतभार इलेक्ट्रानिकी एवं संबंधित एल्गोरिथ्म/प्रयोगों की डिजाइन एवं विकास, जो मानवजाति हेतु अंतरिक्ष सेवाओं के अनुप्रयोग उन्नत बनाते हैं, विश्वभर में कई शैक्षणिक संस्थानों में सतत अनुसंधान एवं विकास की गतिविधि है। शैक्षणिक संस्थान, इसरो के लघु उपग्रहों पर प्रमोचित किए जाने हेतु उनके द्वारा विकसित नीतभारों का प्रस्ताव कर सकते हैं।

इस विकल्प के तहत, विश्वविद्यालयों या संस्थानों द्वारा नीतभार केवल विकसित किए जाते हैं और इसरो के उपग्रह मिशनों के साथ प्रमोचित किए जाते हैं, जिसमें इसरो के नीतभार शामिल हैं। आंकड़ा प्रहस्तन एवं आंकड़ा संचार उपग्रह बस के भाग के रूप में इसरो द्वारा किया जाता है।

प्रमोचन के पश्चात इसरो नीतभार आंकड़ा अर्जित करेगा और आगे की कार्रवाई एवं विश्लेषण हेतु विश्वविद्यालयों/संस्थानों में वितरित किया जाएगा।

विश्वविद्यालयों/संस्थानों द्वारा उपग्रह डिजाइन एवं संविरचन

इस विकल्प के तहत, विश्वविद्यालयों को उपग्रह बस एवं नीतभार की डिजाइन, संविरचन एवं जांच करनी है तथा प्रमोचन हेतु समेकित अंतरिक्षयान सुपूर्द करना है। डिजाइनिंग, संविरचन एवं जांच में तकनीकी निर्देशन इसरो द्वारा मुहैया कराया जाएगा। अंतरिक्ष मिशन हेतु कुछ क्रांतिक सामग्री भी इसरो द्वारा मुहैया कराई जाएगी।

डिजाइन एवं जांच परिणाम की इसरो टीम द्वारा समीक्षा की जाएगी।

इस विकल्प के तहत, एक से अधिक विश्वविद्यालय/संस्थान भाग ले सकते हैं। उनमें से एक इसरो के लिए केंद्र बिंदु होगा। प्रमोचन पश्चात, प्राप्त आंकड़ा संग्रहित किया जाएगा और विश्वविद्यालय/संस्थानों द्वारा वितरित किया जाएगा।