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Department of Space, Indian Space Research Organisation

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मंगल कक्षित्र मिशन द्वारा प्रेक्षित मंगल ग्रह के ऊपरी वायुमंडल पर वैश्विक धूल भरी आंधी के प्रभाव

सौर मंडल के भौतिक ग्रहों का वायुमंडल लगातार बाह्य अंतरिक्ष में क्षय होता जा रहा है। इस क्षय की दर मुख्‍य रूप से किसी ग्रह के आकार तथा उसके ऊपरी वायुमंडल के तापमान पर निर्धारित की जाती है। चूंकि, मंगल पृथ्‍वी की तुलना में छोटा ग्रह है, इसके वायुमंडल का क्षय तेज गति से हो रहा है। इस क्षय के दर में ऊपरी वायुमंडलीय तापमान में बदलावों के कारण परिवर्तन हो सकता है। अत:, मंगल के ऊपरी वायुमंडल का अभिलक्षणीकरण इस क्षय के दर को समझने में अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है एवं यह मंगल से संबंधित हाल ही के मिशनों, जैसे नासा का मंगल वायुमंडल तथा वाष्‍पशील उत्‍पत्ति (एम.ए.वी.ई.एन.) तथा इसरो का मंगल कक्षित्र मिशन (एम.ओ.एम.), का मुख्‍य लक्ष्‍य है। एक वैश्विक धूल की आंधी, जिसे और भी सटीक ढंग से ''ग्रह के चारों ओर धूलवाली घटना'' कहा जाता है, मंगल पर एक गतिकी मौसम विज्ञानीय घटना है, जो इसके ऊपरी वायुमंडलीय तापमान को कई डिग्रियों से बढ़ा सकता है। इसके परिणामस्‍वरूप, मंगल ग्रह के ऊपरी वायुमंडल पर इन वैश्विक धूल की आंधियों का प्रभाव कई गुणा होने की संभावना है, जिसमें से कुछ के बारे में जानना अभी बाकी है। इन प्रभावों में से कुछ के बारे में जानने के लिए, भारतीय एम.ओ.एम. अंतरिक्षयान द्वारा किए गए वर्तमान मापनों ने महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जून 2018 के पहले सप्‍ताह में मंगल पर एक वैश्विक धूल भरी आंधी की शुरुआत हुई तथा जुलाई 2018 के प्रथम सप्‍ताह तक इसने पूरी तरह से परिपक्‍व रूप धारण कर लिया। इस वैश्विक धूल भरी आंधी की वृद्धि को चित्र 1 के निचले पैनल में देखा जा सकता है, जो कि मंगल ग्रह की सतह के निकट 9.3 µm अवरक्‍त अवशोषण कॉलम धूल प्रकाशिकी गहराई (सी.डी.ओ.डी.) को दर्शाता है। सी.डी.ओ.डी. का अधिक मान मंगल पर अधिक धूल के बारे में इंगित करता है। इस समय के दौरान, एम.ओ.एम. अंतरिक्षयान ने 155 कि.मी. जैसी नीचे गहराई में जाते हुए मंगल को शाम के समय देखा। मंगल बहिर्मंडलीय निष्‍प्रभावी संरचना विश्‍लेषक (एम.ई.एन.सी.ए.) उपकरण, जो कि एम.ओ.एम. पर लगा हुआ एक द्रव्‍यमान स्‍पेक्‍ट्रोमीटर है, जिसने मंगल के तापमंडल के (जो कि 100 से 200 कि.मी. के बीच होता है) निष्‍प्रभावी घनत्‍वों का मापन किया है। इन मापनों का विश्‍लेषण करने के बाद, राष्‍ट्रीय वायुमंडलीय अनुसंधान प्रयोगशाला, गादंकी के वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया कि मंगल का ऊपरी वायुमंडल गर्म हो रहा है तथा उसका विस्‍तार हो रहा है। चूंकि यह धूल भरी आंधी धीरे-धीरे मंगल ग्रह को एक महीने की अवधि में ढक लेती है। (चित्र 1 के निचले पैनल के काले धब्‍बों वाला वक्र), वैज्ञानिकों ने यह पाया कि मंगल के तापमंडल में निष्‍प्रभावी घनत्‍वों में अधिक वृद्धि हुई है (चित्र 1 के ऊपर के पैनल के नीले धब्‍बे)। ऐसी वृद्धि की पुष्टि एम.ए.वी.ई.एन. मिशन द्वारा भी की गई है, जो कि समानांतर ढंग से सुबह के वक्‍त मंगल के तापमंडल का मापन कर रहा था। (चित्र 1 मध्‍य पैनल में नीले धब्‍बे)। यह नोट किया जाए कि इस धूल भरी आंधी के प्रभाव को स्‍पष्‍ट रूप से कम करने के लिए, एम.ए.वी.ई.एन. मापनों से घनत्‍वों के मामूली स्‍थानीय समय परिवर्तनों को किया गया तथा धूल वाली आंधी के अल्‍पकालीन समय के दौरान नापे गए घनत्वों को हटा दिया गया। एम.ओ.एम. द्वारा शाम के समय मापे गए वायु घनत्‍व एम.ए.वी.ई.एन. द्वारा सुबह के समय मापे गए वायु घनत्‍वों से सदैव अधिक थे (चित्र 1)। ऐसी भिन्‍नता मुख्‍य रूप से वायुमंडलीय वायु परिचालन के कारण शाम के समय गर्माहट तथा सुबह के समय ठंडा होने के कारण हो रहा था।

चित्र 1 में दर्शाए गए धूल भरी आंधी के प्रभावों को चित्र 2 के योजनाबद्ध चित्रों के माध्‍यम से वर्णित किया गया है, जो बिना धूल भरी आंधी वाले मंगल ग्रह के तापमंडल तथा धूल की आंधी के कारण इसके विस्‍तार को दर्शाता है (नीले धब्‍बों वाला क्षेत्र)।

इस वैश्विक धूल भरी आंधी ने महत्‍वपूर्ण ढंग से मंगल के ऊपरी वायुमंडल को गर्म कर इसे विस्‍तारित किया है, ताकि किसी भी दी गई तुंगता पर धूल भरी आंधी के दौरान घनत्‍व अधिक होगा, जो कि उसके बिना नहीं हो सकता। इन परिणामों से यह निष्‍कर्ष निकलता है कि वैश्‍विक, धूल भरी आंधी के गर्म होने तथा उसके बढ़ने से इसके वायुमंडल के एक भाग को जल्‍द ही बहिर्मंडल आधार तुंगता (जो कि ~ 220 कि.मी. पर स्थित है) में पहुंचा पाया। बर्हिमंडल तुंगता के ऊपर किसी भी गर्म गैसों का और अधिक ऊँचाई पर जाना एवं उसके बाद बाह्य अंतरिक्ष में प्रवेश करना और अधिक संभावित है।

अत: वर्तमान अध्‍ययन के परिणामों से यह निष्‍कर्ष निकाला जा सकता है कि वर्ष 2018 की वैश्विक धूल भरी आंधी के कारण मंगल ग्रह के वायुमंडल के बाहर निकलने में और अधिक वृद्धि हुई।

इन परिणामों को अभी हाल ही में अमरीकी जियोफिजिकल यूनियन (ए.जी.यू.) की एक पत्रिका, जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च-प्‍लैनेट, में प्रकाशित किया गया। (https://agupubs.onlinelibrary.wiley.com/doi/abs/10.1029/2020JE006430). इस अध्‍ययन के द्वारा एम.ओ.एम. अंतरिक्ष यान की वैज्ञानिक क्षमताओं तथा ग्रहीय वायुमंडलों की खोज में बहु-अंतरिक्षयान मापनों के लाभों के बारे में दोहराया गया है।

 

Effects of the 2018 global dust storm on the Martian thermosphere

चित्र 1 : वर्ष 2018 के वैश्विक धूल भरी आंधी का मंगल के तापमंडल पर प्रभाव। पहला तथा दूसरा पैनल क्रमश: एम.ओ.एम. तथा एम.ए.वी.ई.एन. अंतरिक्षयान द्वारा प्रेक्षित 170 कि.मी. पर Ar घनत्‍वों में आए बदलावों को हटाने के बाद दर्शाया गया है। नीचे वाले पैनल, मंगल के सतह के निकट 9.3 µm अवरक्‍त अवशोषण कॉलम धूल प्रकाशिकी गहराई (सी.डी.ओ.डी.) को दर्शाता है। सी.डी.ओ.डी. एक धूल सूचकांक के रूप में कार्य करता है, जिससे यह पता चलता है कि अधिक मान वाला सी.डी.ओ.डी. मंगल पर अधिक धूल की ओर इंगित करता है (वेंकटेश्‍वर राव तथा अन्‍य द्वारा 2020 में संशोधित)।

An artistic impression of the Mars upper atmospheric expansion due to the global dust storm

चित्र 2: वैश्विक धूल भरी आंधी के कारण मंगल के ऊपरी वायुमंडलीय विस्‍तार का एक कलात्‍मक दृश्‍य। चित्र में दर्शाए काले तीर के निशान वैश्विक धूल भरी आंधी के कारण ऊपरी वायुमंडल के विस्‍तार को चित्रित करते हैं, (नोट करें कि एम.ओ.एम. अंतरिक्षयान, मंगल ग्रह तथा उसके ऊपरी वायुमंडलीय सीमाओं का सापेक्ष आकार स्‍केल पर आरेखित नहीं किए गए है। यहां लिए गए चित्र मंगल रंगीन कैमरा, एम.सी.सी./एम.ओ;एम. से लिए गए है। (पिछली धूल भरी आंधी के दौरान एम.सी.सी. से ऐसे चित्र प्राप्‍त नहीं किए गए थे)। 

संदर्भ:

वेंकटेश्‍वर राव, एन. गुप्‍ता, एन एवं काडने, यूआर. (2020)। वर्ष 2018 प्‍लैनेट- धूल भरी आंधी में घेराबंदी की घटना के साथ संबंधित मंगल ग्रह के तापमंडल में बढ़े हुए घनत्‍व: मेनका/एम.ओ.एम. तथा एन.जी.आई.एम.एस./एम.ए.वी.ई.एन./ जर्नल ऑफ जियो-फिजिकल रिसर्च: प्‍लैनेट, 125 ई2020जेई006430। https:// doi.org/10.1029/2020JE006430