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चंद्रयान-2 मिशन पे-लेड

Chandrayaan2 Payloads

मिशन पे-लेड

ऑर्बिटर पे-लोड

  • टेरेन मैपिंग कैमरा (टीएमसी 2)

    टीएमसी चंद्रयान-I मिशन में इस्तेमाल किये गये टेरेन मैपिंग कैमरे का सूक्ष्म रूप है। इसका मूल उद्देश्य चंद्रमा के 100 किलोमीटर की ध्रुवीय कक्षा से 20 किलोमीटर स्वैद में पांच मिलियन की हाई स्पेसियल रेजोल्यूशन से पैन-क्रोमैटिक स्पैक्ट्रम बैंड (0.5 से 0.8 माइक्रोन) में चंद्रमा की सतह का नक्शा तैयार करना है। टीएमसी से एकत्र आंकड़ों से हमें चंद्रमा के अस्तित्व में आने और उसके क्रमिक विकास के बारे में संकेत मिल सकेंगे और हमें चंद्रमा की सतह का 3 डी मानचित्र तैयार करने में मदद मिलेगी।
  • चंद्रयान-2 लार्ज एरिया सॉफ्ट एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (सीएलएएसएस)

    सीएलएएसएस मैग्निशियम, एल्यू्मिनियम, सिलिकॉन, कैल्शियम, टाइटेनियम, (आयरन) लौह और सोडियम जैसे प्रमुख तत्वों की मौजूदगी का पता लगाने के वास्ते चंद्रमा के एक्स-रे फ्लोसेसेंस ( एक्स आर एफ) के स्पेक्ट्रा ( व्यास) को मापता है। एक्स आर एफ तकनीक से इन तत्वों की खोज की जाएगी क्योंकि सूर्य की किरणें पड़ने पर इन तत्वों से खास तरह की एक्स-रे निकलती हैं।
  • सोलर एक्स-रे मॉनीटर ( एक्स एस एम)

    एक्स एस एम सूर्य और उसके कोरोना से निकलने वाली एक्स-रे को देखकर इन किरणों के सौर विकिरण की तीव्रता मापता है और सीएलएएसएस (CLASS) को सहयोग देता है। इस पे-लोड का मुख्य उद्देश्य 1 से 1.5 KeV क्षमता की एनर्जी (एक्स एस एम) रेंज में सोलर एक्स-रे स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराना है। सीएलएएसएस (CLASS) से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण के लिए/ इनपुट के तौर पर सोलर एक्स-रे स्पेक्ट्रा का हाई-एनर्जी रेज़ौल्यूशन और हाई-क्रेडेंस माप (प्रतिक्षण पूर्ण स्पेक्ट्रम) उपलब्ध कराएगा।
  • ऑर्बिटर हाई रेजोल्यूशन कैमरा( ओएचआरसी)

    ओएचआरसी लैंडिंग साइट (उतरने की जगह) के हाई रेज़ॉल्यूशन चित्र उपलब्ध करता है-यान से अलग होने से पहले यह सुनिश्चित करता है कि उस जगह कोई गड्ढा या चट्टान न हो दो अलग-अलग कोणों से खींचे चित्रों से दोहरा फायदा होता है। पहला यह कि इनकी मदद से लैंडिंग साइच ( उतरने की जगह) का डिजिटल एलीवेशन मॉडल तैयार किया जा सकता है और दूसरा यह कि उतरने के लिए यान से अलग होने के बाद वैज्ञानिक अनुसंधान में भी इनसे मदद मिलती है। ओएचआर सी के चित्र दो ऑर्बिटर से गुज़रने के वक्त खींचे जाएंगे जिसमें 12 किलोमीटर X 3 किलोमीटर क्षेत्र को 0.32 मीटर के ग्राउंड रेजोल्यूशन से कवर किया जाता है।
  • इमेजिंग आईआस स्पेक्ट्रोमीटर (आईआईआरएस)

    आई आई आर एस के दो मुख्य उद्देश्य हैं:
    • ~20 एनएस के हाई रेजोल्यूशन पर पहली बार ~0.8-5.0 um की स्पेक्ट्रल रेंज में चंद्रमा का वैश्विक खनिज-आधारित मानचित्र बनाना; और
    • (~80m) हाई स्पेसियल औऱ ( ~20nm) के स्पेक्ट्रल रेजोल्यूशन पर पहली वार करीब 3.0um के आसपास के जल/ हाईड्रोक्सिल फीचर का पूर्ण चित्रण करना।
    आई आई आर एस चंद्रमा की 100 किलोमीटर कक्षा से 256 स्पेक्ट्रल बैंडस में चंद्रमा की सतह से परावर्तित (रिफ्लेक्ट) होने वाले सौर विकिरण (रेडिएशन) को भी मापेगा ।
  • ड्यूअल फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक अपर्चर रडार (एल और एस)

    ड्यूएल फ्रीक्वेंसी (एल और एस) एसएआर-चँद्रयान-I के एस-बैंड मिनि एसएआर के मुकाबले /ज्यादा क्षमता प्रदान करेगा:

    • ज्यादा गहराई ( 5-10 मीटर की गहराई तक जो एस बैंड से दुगुनी है) तक पहुंचने के लिए एल बैंड,

    • गोलाकार और पूर्ण ध्रुवीकृत --रेजोल्यूशन विकल्प ( स से 75 मीटर ) और आयातन कोण ( इन-सिटु एंगल्स) (9 से 35 डिग्री) की रेंज़ में- ताकि स्थायी रूप से छायांकित भागों की विशेषताओं का अध्ययन किया जा सके

    इस पे-लोड के मुख्य वैज्ञानिक उद्देश्य हैं:

    • ध्रुवीय क्षेत्रों में हाई-रेजोल्यूशन मानचित्र बनाना,

    • ध्रुवीय क्षेत्रों में जमा पानी वाली बर्फ की मात्रा का अनुमान लगाना,

    • बर्फीली चट्टान की मोटाई और उसके वितरण का अनुमान लगाना।

  • चंद्रयान -2 एटमॉस्फियरिक कंपोजिशन एक्सपलोरर (चेस-2)

    चेस -2 चंद्रयान-I द्वारा किये परीक्षण आगे जारी रखेगा। यह चार ध्रुवों वाला विशाल स्पेक्ट्रोमीटर है जिससे चंद्रमा के न्यूट्रल बाहरी वातावरण की स्कैनिंग की जा सकती है और वह भी ~0.5 एएमयू के विशाल रेजोल्यूशन में 1 से 300 amv की व्यापक रेंज में । चेस-2 का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के न्यूट्रल बाहरी वातावरण की संरचना और वितरण तथा उतार-चढ़ाव का वहीं (इन-सिट) अध्ययन करना है।
  • इयुआल फ्रीक्वेंसी रेडियो सांइस (डीएफआरएस) परीक्षण

    चंद्रमा के आयनमंडल में इलेक्ट्रोन डेंसिटी (घनत्व) की अस्थायी उत्पत्ति का अध्ययन । उपग्रह से एक्स (मेगाहर्टज़) बैंड के सिगनल (संकेत) एक साथ ट्रांसमिट (प्रसारित) किए जाते हैं और ज़मीन पर डीप स्टेषन नेटवर्क रिसीवरों से प्राप्त किए जाते हैं ।

विक्रमा पे-लोड

  • चंद्रमा पर जा रहे हाइपरसेंसिटिव ऑयनमंडल और वायुमंडल की रेडियो एनाटॉमी (राम्भा)

    चंद्रमा का ऑयनमंडल उच्च गतिशील प्लाज़्मा का वातावरण राम्भा जैसे लैंगमुइर अध्ययन इन परिस्थितियों में जानकारी एकत्र करने का प्रभावी निदान उपकरण सिद्ध हुए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य इन पहलुओं का आकलन करना है:-

    • चंद्रमा की सतह के पास एम्बिएंट इलेक्ट्रोन डेन्सिटी /टैम्प्रेचर

    • सतह के पास बदलती और परिस्थितियों में थोड़े समय के लिए उभरने वाला चंद्र प्लाज़्मा घनत्व।

  • चंद्रमा का सतह ताप-भौतिकी परीक्षण (चेस्ट)

    चेस्ट चंद्रमा की सतह के टैम्प्रेचर ग्रेडिएंट(तापमान के उतार-चढ़ाव) और थर्मल कंडक्टिविटी (तापीय चालकता) को मापता है। इसमें तापीय सेंसर्स औऱ एक हीटर लगा होता है जिसे चंद्रमा की चट्टान (रेलोलिथ) में ~10 सेंटोमीटर नीचे तक घुसा दिया जाता है। चेस्ट दो मोड्स में काम करता है यानी दो प्रकार से काम करता है:-

    • अप्रत्यक्ष मोड संचालन जिसमें विभिन्न गहराईयों तक लगातार इनसिटु तापमान मापा जाता है,

    • सक्रिय मोड के संचालन में संपर्क में आई चंद्रमा की चट्टान (रेगोलिथ) का निर्धारित अंतराल में तापमान का उतार चढ़ाव मापा जाता है।

  • चंद्रमा की भूकंपीय गतिविधि मापने का यंत्र ( इलसा)

    इलसा तीन धरियों वाला एमईएमएस -आधारित भूकंप मापक यंत्र है जो चंद्रमा के भूकंप से होने वाली जमीन की मामूली हिलजुल, गति और तीव्रता का पता चल जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लैंडिंग साइट के आसपास भूकंप की संभाव्यता जानना है। इल्सा से 100mg/ hz जितनी हल्की-सी हिलडुल और +0.5g की गतिशील रेंज और 40 हर्टज़ की बैंडविड्थ का भी पता चल सकता है। डायनामिक रेंज़ पाने के लिए दो सेंसर प्रयोग किये जाते हैं: एक कोर्स रेंज़ वाला और एक फाइन रेंज़ वाला सेंसर।

प्रज्ञान पे-लोड

  • अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एपीएक्सएस)

    एपीएक्सएस का मुख्य उद्देश्य लैंडिंग साइट के पास वाली चंद्रमा की सतह की तत्व-संरचना जानना। यह एक्स-रे फ्लोरेसेंस स्पेक्ट्रोस्कॉपी तकनीक से किया जाता है जहां एक्स-रे या अल्फा कणों की मदद से सतह को सक्रिय किया जाता है। एपीएक्सएस में रेडियोधर्मी क्यूरियम (244) धातु को प्रयोग किया जाता है, इस धातु से हाई इनर्जी अल्फा कण और एक्स-रे निकलती हैं जिससे एक्स-रे एमिशन स्पेक्ट्रोस्कोपी और एक्स -रे फ्लोरेसेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी दोनों सक्रिय हो जाती हैं। इन तकनीकों से एसीएक्सएस सोडियम, मैग्निशियम, एल्यूमिनियम, सिलिका, कैल्शियम, टाईटेनियम, आयरन जैसे तत्वों का और कुछ मामूली मात्रा में मौजूद तत्वों जैसे स्ट्रोंटियम,वाईत्रियम और जैड-त्रियम की मौजूदगी का पता चल जाता है।
  • लेज़र इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (लिब्स)

    लिब्स का मुख्य उद्देश्य लैंडिंग साइट के पास तत्वों की भारी मात्रा में मौजूदगी का पता करना है। इसके लिए विभिन्न स्थानों में हाई पावर लेज़र पल्स फायर किये जाते हैं और खत्म हो रहे प्लाज़्मा से होने वाल रेडिएशन (विकिरण) का विश्लेषण किया जाता है।

अप्रत्यक्ष परीक्षा

  • लेज़र रेट्रोरिफ्लेक्टर अर्रे (एलआर ए)

    पृथ्वी के चंद्रमा का सिस्टम सम्भालने के लिए और चंद्रमा के भीतरी भाग में से संकेत प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।