जुलाई 10, 2015

पीएसएलवी-C28/डीएमसी3 मिशन

ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) की तीसवां उड़ान (पीएसएलवी-C28) में, सर्वे सैटेलाइट टेक्नोलॉजी लिमिटेड (एसएसटीएल), यूनाइटेड किंगडम (यूके) द्वारा निर्मित तीन समान डीएमसी3 ऑप्टिकल भू अवलोकन उपग्रहों का प्रक्षेपण किया गया । तीन डीएमसी3 उपग्रह, प्रत्येक का वजन 447 किलो को 647 किमी सूर्य-समकालिक कक्षा (एसएसओ) में पीएसएलवी उच्चतम संस्करण(पीएसएलवी-एक्सएल) का उपयोग कर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा (एसडीएससी-शार) के भारत के स्पेसपोर्ट से प्रमोचित किया गया । पीएसएलवी-C28, 'एक्सएल' विन्यास के साथ पीएसएलवी की नौवीं उड़ान है ।

पीएसएलवी-C28, तीन डीएमसी3 उपग्रहों के अलावा, इसने ब्रिटेन दो सहायक उपग्रहों को वहन किया, अर्थात CBNT -1, एसएसटीएल द्वारा निर्मित प्रौद्योगिकी प्रदर्शक भू अवलोकन सूक्ष्म उपग्रह और D-OrbitSail, सर्वे स्पेस सेंटर द्वारा निर्मित प्रौद्योगिकी प्रदर्शक नानोसेटेलाइट ।

एंट्रिक्स/इसरो द्वारा पांच उपग्रहों का 1440 किलो भार के समग्र उत्थापन के साथ, अब तक का सबसे भारी वाणिज्यिक मिशन है।

पीएसएलवी की मौजूदा पेलोड फेअरिंग के 3 मीटर की ऊंचाई के भीतर में डीएमसी3 के तीन उपग्रहों का प्रत्येक का सामंजस्य एक चुनौती थी। इस विशिष्ट प्रयोजन के लिए नए डिजाइन किए प्रमोचक पर इन उपग्रहों को माउंट करने के लिए, वृत्तीय लांचर एडाप्टर जिसे एल एडाप्टर और त्रिकोणीय डेक जिसे बहु सैटेलाइट एडाप्टर-संस्करण 2 (एमएसए-V2), कहा जाता है का निर्माण इसरो द्वारा किया गया था ।

ये अंतरराष्ट्रीय ग्राहक उपग्रहों को डीएमसी इंटरनेशनल इमेजिंग (DMCii), एसएसटीएल, ब्रिटेन की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी; और एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एंट्रिक्स), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अंतरिक्ष विभाग के तहत सरकार की व्यावसायिक शाखा के बीच में किए गए व्यवस्था के तहत प्रमोचित किए जा रहे थे ।