अप्रैल 23, 2007

पीएसएलवी-सी8

पीएसएलवी-सी8, इसरो के ध्रुवीय प्रमोचन यान (पीएसएलवी) की ग्यारहवीं उड़ान है और साथ ही यह पहला वाणिज्यिक प्रमोचन है। इस उड़ान में, पीएसएलवी भूमध्य रेखा पर 2.5 डिग्री की आनति सहित 550 कि.मी. वृत्तीय कक्षा में 352 कि.ग्रा. वाले इतालवी खगोलीय उपग्रह एजिले को प्रमोचित करेगा। मिशन कंप्यूटर, नौसंचालन और दूरमिति प्रणालियाँ जैसी उन्नत प्रमोचन यान उड्डयनकी प्रणालियों के परीक्षण के लिए, 185 कि.ग्रा. भार वाला एक उन्नत उड्डयनकी मॉड्यूल (एएएम) भी पीएसएलवी-सी8 के उड़ान पर रहा है।

पीएसएलवी-सी 8 में एक दोहरा प्रमोचन अनुकूलक (डीएलए) लगा है और एजिले को डीएलए के ऊपर आरूढ़ किया गया है, जबकि एएएम को डीएलए के भीतर आरोपित किया गया है। हलके नीतभार और कक्षा की निम्न आनति के साथ, जिसमें एजिले को रखा जाना है, पीएसएलवी-सी 8 को प्रथम चरण के छह ठोस नोदक स्ट्रैप-ऑन मोटर्स के बिना विन्यस्त किया गया है। इसके अलावा, पिछली पीएसएलवी उड़ान की तुलना में चौथे चरण में नोदक को लगभग 400 कि.ग्रा. घटा दिया गया है। क्रोड-मात्र पीएसएलवी सी-8 का उत्थापन भार लगभग 230 टन होगा।

अब तक नौ लगातार सफल उड़ानों के साथ पीएसएलवी इसरो के सबसे कार्योपयोगी प्रमोचन यान के रूप में उभरा है। 1994 में इसके पहले सफल प्रमोचन के बाद से, पीएसएलवी ने 550-800 कि.मी. उच्च ध्रुवीय सूर्य तुल्यकाली कक्षाओं (एसएसओ) में आठ भारतीय सुदूर संवेदी उपग्रह, एक अव्यावसायिक रेडियो उपग्रह, हैमसैट, एक अंतरिक्ष कैप्सूल पुनप्राप्ती एसआरई-1 और विदेशी ग्राहकों के लिए छह छोटे उपग्रह प्रमोचित किए हैं। इसके अलावा, इसने भारत के अनन्य मौसमविज्ञानी उपग्रह, कल्पना-1 को भी भूतुल्यकाली अंतरण कक्षा (जीटीओ) में प्रमोचित किया है। 2008 के दौरान पीएसएलवी का उपयोग चंद्रमा के लिए भारत के प्रथम अंतरिक्ष-यान मिशन, चंद्रयान-1 को प्रमोचित करने के लिए भी किया जाएगा।

अपने मानक विन्यास में, 44 मी. ऊँचे पीएसएलवी का उत्थापन भार 295 टन है। यह एक चार चरण वाला प्रमोचन यान है जिसमे पहले व तीसरे चरण और साथ ही साथ, प्रथम चरण को घेरने वाले छह स्ट्रैप-ऑन में एचटीपीबी आधारित ठोस नोदक का उपयोग किया गया है। पीएसएलवी का पहला चरण दुनिया में बृहद् ठोस नोदक बूस्टरों में से एक है। इसके दूसरे और चौथे चरण द्रव नोदक का उपयोग करते हैं। पीएसएलवी के बल्बनुमा नीतभार फ़ेयरिंग का व्यास 3.2 मीटर है। यान में अपने स्वास्थ्य और उड़ान स्थिति के मॉनिटरन के लिए क्रमशः एस-बैंड दूरमिति तथा सी-बैंड प्रेषानुकर प्रणाली है। इसमें चरण और नीतभार फ़ेयरिंग पृथक्करण प्रणालियाँ जैसी परिष्कृत सहायक प्रणालियाँ भी मौजूद हैं।

पीएसएलवी मूल रूप से 1,000 कि.ग्रा. वर्ग के भारतीय दूरसंवेदी उपग्रहों को 900 कि.मी. ध्रुवीय एसएसओ में स्थापित करने के लिए परिकल्पित किया गया था। पीएसएलवी की नीतभार क्षमता को क्रमशः बढ़ाया गया है और मई 2005 में उसकी नौवीं उड़ान, पीएसएलवी-सी6 में दो नीतभार प्रमोचित किए गए- 620 कि.मी. एसएसओ में-1560 कि.ग्रा. कार्टोसैट-1 और 42 कि.ग्रा. हैमसैट। अपनी पिछली उड़ान पीएसएलवी सी-7 में इसने चार नीतभार- 680 कि.ग्रा.कार्टोसैट-2, 550 कि.ग्रा. अंतरिक्ष सम्पुट पुनःप्राप्ति परीक्षण (एसआरई-1), इंडोनेशिया का 56 कि.ग्रा. लापान-ट्यूबसैट और अर्जेन्टीना का 6 कि.ग्रा. पेहुएनसैट-1 का 635 कि.मी. उच्च ध्रुवीय एसएसओ में भूमध्य रेखा के संदर्भ में 97.9 डिग्री आनति सहित प्रमोचन किया। 

चेन्नै से उत्तर दिशा में लगभग 80 कि.मी. की दूरी पर आंध्र प्रदेश राज्य के नेल्लूर जिले में स्थित भारत के अंतरिक्ष पत्तन सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र शार, श्रीहरिकोटा के द्वितीय प्रमोचन पैड से पीएसएलवी-सी8 प्रमोचित किया गया। विश्व के कई अंतरिक्ष प्रमोचन केंद्रों की तुलना में, श्रीहरिकोटा की भूमध्य रेखा से निकटता विशेष रूप से पूर्व की ओर नीतभार के प्रमोचनों के लिए लाभदायक रही है। यहाँ ठोस नोदक प्रक्रमण, ठोस मोटर के स्थैतिक परीक्षण, प्रमोचन यान एकीकरण और प्रमोचन के प्रचालन, दूरमिति, अनुवर्तन और आदेश नेटवर्क समाविष्ट परास प्रचालन व मिशन नियंत्रण केंद्र की सुविधा है। द्वितीय प्रमोचन पैड, मई 2005 में कार्यशील हो गया।

पीएसएलवी-सी8 चरण की एक झलक
 
चरण-1
चरण-2
चरण-3
चरण-4
नामावली
कोर (पीएस1;)
पीएस2
पीएस3
पीएस4
नोदक
ठोस एचटीपीबी आधारित
द्रव यूएच25+एन2ओ4
ठोस एचटीपीबी आधारित
द्वि-नोदक एमएमएच + एमओएन-3
भार (टन)
138.0
41.0
7.6
1.6
अधिकतम प्रणोद (केएन)
4762.0
800
246
7.3X2
ज्वलन समय (से.)
108
148
122
299
चरण व्यास (मी.)
2.8
2.8
2.0
2.8
चरण लंबाई (मी.)  

20

12.8
3.6
2.9