मई 08, 2003

जीएसएलवी - डी2

 

भू-तुल्यकाली उपग्रह प्रमोचक रॉकेट (जीएसएलवी) परियोजना का उद्देश्य भू-तुल्यकाली उपग्रहों के लिए प्रमोचन क्षमता हासिल करना है। यान की पहली परीक्षण उड़ान, जीएसएलवी-डी1, 18 अप्रैल, 2001 में सफलतापूर्वक संचालित हुई, जब 1,540 कि.ग्रा. के प्रायोगिक उपग्रह, जीसैट-1 को भू-तुल्यकाली अंतरण कक्षा (जीटीओ) में स्थापित किया गया।

जीएसएलवी-डी2 यान की दूसरी विकासात्‍मक परीक्षण उड़ान है। इस उड़ान में जीएसएलवी एक भारी उपग्रह- 1800 कि.ग्रा. भार वाले जीसैट-2 को 180 कि.मी. उपभू (पृथ्‍वी से निकटतम बिंदु) और 36,000 कि.मी. अपभू (पृथ्‍वी से दूरस्‍थ बिंदु) की भूतुल्‍यकाली अंतरण कक्षा में स्‍थापित करेगा। उच्‍चतम नीतभार क्षमता निम्न के समावेश द्वारा हासिल की गई:

  • क्रोड ठोस मोटर में संवर्धित नोदक भारण
  • द्रव नोदक स्‍ट्रैप-ऑन तथा द्वितीय चरण में उच्‍च दाब इंजन और
  • संरचनात्‍मक घटकों का इष्‍टतमीकरण

अपने वर्तमान व्‍यास में जीएसएलवी एक 49 मी. ऊँचा, लगभग 414 टन भार वाला तीन चरण वाहन है। प्रथम चरण में एक ठोस नोदक मोटर (एस139) और चार द्रव नोदक स्‍ट्रैप-ऑन मोटरें (एल40एच) समाविष्ट हैं। एस139 चरण की लंबाई 139 मी. और व्‍यास 2.8 मी. है तथा यह 138 टन हाइड्रॉक्‍सिल टर्मिनेटेड पॉली ब्‍युट़डीन (एचटीपीबी) आधारित ठोस नोदक वहन करता है। यह चरण लगभग 4736 किलो न्‍यूटन प्रणोद उत्‍पन्‍न करता है और 107 सेकंड तक प्रज्‍वलित रहता है।

चार स्‍ट्रैप-ऑन (एल40एच) चरणों की लंबाई 19.70 मी. और व्‍यास 2.1 मी. है। इनमें से प्रत्‍येक में 42 टन हाइपरगोलिक नोदक (यूएच25) और नाइट्रोजन टेट्रॉक्‍साइड (एन2ओ4) भरा होता है। प्रत्‍येक 765 किलो न्‍यूटन प्रणोद उत्‍पन्‍न करता है और 149 सेकंड तक प्रज्‍वलित रहता है।

जीएसएलवी के द्वितीय चरण की लंबाई 11.6 मी. और व्‍यास 2.8 मी. है। यह 39.3 टन हाइपरगोलिक नोदक (यूएच25) और नाईट्रोजन टेट्रॉक्‍साइड (एन2ओ4) से भरा रहता है। यह 804 किलो न्‍यूटन प्रणोद उत्‍पन्‍न करता है। यह चरण लगभग 136 सेकंड तक प्रज्वलित रहता है।

जीएसएलवी का तृतीय चरण रूस से प्राप्‍त एक निम्नतापीय चरण (सीएस) का उपयोग करता है। इस चरण की लंबाई 8.7 मी. और व्‍यास 2.9 मी. है तथा 12.6 टन द्रव हाईड्रोजन और द्रव ऑक्‍सीजन वहन करता है तथा 73.5 किलो न्यूटन नाममात्र प्रणोद उत्पन्न करते हुए लगभग 705 सेकंड तक प्रज्वलित रहता है।

नीतभार फ़ेयरिंग, जो 7.8 मी. लंबा और जिसका व्यास 3.4 मी. है, यान के इलेक्ट्रॉनिक्स और वायुमंडलीय आरोहन के दौरान अंतरिक्ष यान की रक्षा करता है। यान द्वारा लगभग 115 कि.मी. तुंगता हासिल करने के बाद उसे त्याग दिया जाता है।

अंतर-चरण संरचनाएँ, जो जीएसएलवी के विभिन्न चरणों को जोड़ती हैं, उड्डयनकी और नियंत्रण प्रणाली को आश्रय देती है। संसाधित्र, नौसंचालन प्रणाली, नियंत्रण प्रणाली, मार्गदर्शन प्रणाली, दूरमिति प्रणाली, दूरादेश प्रणाली, आदि जैसी इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों को आश्रय देने वाला यान उपकरण खंड, निम्नतापीय चरण के ऊपर आरूढ़ किया जाता है।

अंतरिक्ष यान, जो नीतभार अनुकूलक के माध्यम से उपकरण खंड के ऊपर आरूढ़ किया जाता है, मरमैन क्लैम्प-बैंड जोड़ और अपेक्षित पृथक्करण वेग प्रदान करने वाली स्प्रिंग यंत्रावली द्वारा पृथक किया जाता है।

जीएसएलवी का प्रमोचन चेन्नई से लगभग 100 कि.मी. उत्तर दिशा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र-शार (एसडीएससी-शार), श्रीहरिकोटा से संचालित किया गया।