सितंबर 02, 2007

जीएसएलवी-एफ़04

जीएसएलवी-एफ़04 भारत के भू-तुल्‍यकाली उपग्रह प्रमोचक रॉकेट (जीएसएलवी) की पाँचवी उड़ान है, जिसने इन्सैट-4सीआर उपग्रह को भूमध्‍यरेखा पर 21.7 डिग्री कक्षीय आनति सहित 170 कि.मी. उपभू तथा 35,975 कि.मी. अपभू भू-तुल्‍यकाली अंतरण कक्षा (जीटीओ) में 2 सितंबर, 2007 को प्रमोचित किया। तत्‍पश्‍चात् उपग्रह को स्वयं उसकी नोदन प्रणाली के उपयोग द्वारा भू-स्थिर कक्षा में युक्तिचालित किया गया।

49 मी. ऊँचा जीएसएलवी, 415 टन उत्थापन भार सहित, ठोस, द्रव और निम्नतापीय चरणों सहित एक तीन-चरण वाला यान है। जीएसएलवी का प्रथम चरण, विश्‍व में सबसे बड़ा है, हाईड्रॉक्‍सिल पॉलीब्‍यूटडीन आधारित नोदक प्रयुक्‍त करता है। द्वितीय चरण तथा प्रथम चरण को घेरने वाले चार स्ट्रैप-ऑन मोटर द्रव नोदक ‘विकास’ इंजन का उपयोग करते हैं, जो यूएच25 और नाइट्रोजन टेट्राक्‍साइड जलाते हैं। तृतीय चरण निम्नतापीय चरण है जिसमें द्रव हाईड्रोजन का ईंधन के रूप में और द्रव ऑक्‍सीजन का ऑक्‍सीकारक के रूप में उपयोग किया जाता है। जीएसएलवी यान के कार्य निष्‍पादन मॉनीटरन, अनुवर्तन, परास सुरक्षा / उड़ान सुरक्षा और प्राथमिक कक्षा निर्धारण सक्षमता के लिए एस-बैंड दूरमिति और सी-बैंड प्रेषानुकरों का उपयोग करता है।

नीतभार फ़ेयरिंग, जिसकी लंबाई 7.8 मी. और व्यास 3.4 मी. है, यान के इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और अंतरिक्षयान के वायुमंडल में आरोहण के दौरान सुरक्षा करता है। जब यान लगभग 115 कि.मी. की ऊँचाई पर पहुँच जाता है तो इसे अलग कर दिया जाता है।

जीएसएलवी की अतिरिक्‍त स्‍ट्रैप-डाउन जड़त्वीय नौसंचालन प्रणाली/जड़त्‍वीय निर्देशन प्रणाली, जो उसके उपकरण कक्ष में स्थित होती है, यान को उत्‍थापन से अंतरिक्षयान अंतःक्षेपण तक निर्देशित करती है। अंकीय ऑटो-पायलट और बन्‍द लूप निर्देशन योजना वांछित अभिवृत्ति युक्ति कौशल सुनिश्चित करती है और निश्चित कक्षा में अंतरिक्षयान के अंतःक्षेपण को निर्देशित करती है।

जीएसएलवी विभिन्‍न पृथक्‍करण प्रणालियाँ जैसे कि प्रथम चरण के लिए नम्‍य रैखिक आकृति के आवेश, दूसरे चरण के लिए ताप चालित समानुक्रमी उत्‍सर्जन प्रणाली और तृतीय चरण के लिए मरमैन बैंड बोल्‍ट कटर पृथक्करण यांत्रिकी का उपयोग करता है। पृथक्‍करण अंतरापृष्‍ठ पर आरूढ़ स्प्रिंग प्रणोदकों द्वारा अंतरिक्षयान पृथक्‍करण होता है।

भारत के अन्‍य सभी उपग्रह प्रमोचक रॉकेटों की भाँति जीएसएलवी को भारत के स्पेसपोर्ट, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) शार, श्रीहरिकोटा से प्रमोचित किया गया। जीएसएलवी दो विकासात्‍मक उड़ानों के पश्‍चात् प्रचालनीय हुआ, जब इसने सफलतापूर्वक जीसैट-1 और जीसैट-2 को क्रमश: 2001 और 2003 में सफलतापूर्वक प्रमोचित किया। सितंबर, 2004 में जीएसएलवी ने अपनी प्रथम संक्रियात्‍मक उड़ान में शिक्षा सेवाओं को समर्पित उपग्रह- एडुसैट को प्रमोचित किया। लेकिन, 10 जुलाई, 2006 को संचालित दूसरी संक्रियात्‍मक उड़ान जीएसआईवी-एफ02, इन्सैट-4सी को कक्षा में स्‍थापित करने में सफल नहीं हो सकी।

जीएसएलवी-एफ़04 चरणों की एक झलक
प्राचल
जीएस1 (प्रथम चरण)
जीएस2 (द्वितीय चरण) (एल37, 5एच)
जीएस3 (तृतीय चरण) (सी12)
एस139 बूस्टर
एल40एच स्ट्रैप-ऑन
लंबाई (मी.)
20.13
19.7
11.56
8.7
व्यास (मी.)
2.8
2.1
2.8
2.8
नोदक भार (टन)
138
42
39
12.5
आवरण / टंकी सामग्री
माराजिंग स्टील
एल्यूमीनियम मिश्रधातु
एल्यूमीनियम मिश्रधातु
एल्यूमीनियम मिश्रधातु
नोदक
एचटीपीबी
यूएच25 और एन2ओ4
यूएच25 और एन2ओ4
एलएच2 और एलओएक्स
ज्वलन समय (से.)
106.9
148
137
709
अधिकतम निर्वात थ्रस्ट (केएन)

4768

763
799
73.5 (सामान्य)
नियंत्रण प्रणाली
 
इंजन गिम्बलीकरण-एकल तल
इंजन गिम्बलीकरण- अक्षनमन और पार्श्वर्तन नियंत्रण के लिए दो तल, लोटन नियंत्रण के लिए तप्त गैस अभिक्रिया नियंत्रण प्रणाली (आरसीएस)
थ्रस्ट चरण नियंत्रण के लिए 2 वर्नियर इंजन और लागत चरण नियंत्रण के लिए शीत गैस आरसीएस