सितंबर 20, 2004

जीएसएलवी - एफ़01

 

जीएसएलवी-एफ़01 इसरो के भू-तुल्यकाली उपग्रह प्रमोचक रॉकेट की तीसरी उड़ान है तथा यह पहली संक्रियात्मक उड़ान है। क्रमशः अप्रैल 2001 व मई 2003 को आयोजित जीएसएलवी के दो विकासात्मक परीक्षण उड़ानों में इसने जीसैट-1 और जीसैट-2 उपग्रहों के भू-तुल्यकाली अंतरण कक्षा (जीटीओ) में सफलतापूर्वक प्रमोचित किया।

पहली विकासात्मक परीक्षण उड़ान (जीएसएलवी-डी1) में, यान ने 1530 कि.ग्रा. भार वाले जीसैट-1 को जीटीओ तथा दूसरी विकासात्मक परीक्षण उड़ान (जीएसएलवी-डी2) में 1825 कि.ग्रा. भार वाले जीसैट-2 को जीटीओ में स्थापित किया। अपनी पहली संक्रियात्मक उड़ान (जीएसएलवी-एफ़01) में, जीएसएलवी 1950 कि.ग्रा. भार वाले एडुसैट का प्रमोचन करेगा।

49 मीटर ऊँचा जीएसएलवी एक तीन चरण वाला यान है। पहले चरण, जीएस 1 में 138 टन के ठोस नोदक सहित क्रोड मोटर और प्रत्येक में 40 टन हाइपरगोलिक द्रव नोदक (यूएच25 तथा एन2ओ4) सहित चार स्ट्रैप-ऑन मोटर समाविष्ट हैं। दूसरे चरण में उसी प्रकार का 39 टन हाइपरगोलिक द्रव नोदक शामिल है। तृतीय चरण (जीएस 3) 12.5 टन द्रव आक्सीजन और द्रव हाइड्रोजन सहित निम्नतापीय चरण है।.

एल्यूमिनियम मिश्रधातु जीएसएलवी नीतभार फ़ेयरिंग का व्यास 3.4 मी. और लंबाई 7.8 मी. है। जीएसएलवी विभिन्न पृथक्करण प्रणालियों का उपयोग करता है, जैसे प्रथम चरण के लिए लचीला रैखिक आकार प्रभार (एफएलएससी), द्वितीय चरण के लिए उत्ताप चालित समरूपी विमोचन क्रियाविधि तथा तीसरे चरण के लिए मरमैन बैंड बोल्ट कटर पृथक्करण क्रियाविधि। अंतरिक्ष यान का पृथक्करण, पृथक्करण अन्तरापृष्ठ पर आरूढ़ स्प्रिंग प्रणोदकों द्वारा होता है। जीएसएलवी का तीन-अक्षीय अभिवृत्ति स्थिरीकरण प्रत्येक चरण में उपलब्ध कराई गई स्वायत्त नियंत्रण प्रणालियों द्वारा हासिल होती है। पहले चरण के चार स्ट्रैप-ऑन के एकल तल इंजन गिम्बल नियंत्रण (ईजीसी) का उपयोग अक्षनमन, पार्श्ववर्तन तथा लोटन नियंत्रण के लिए होता है। दूसरे चरण में अक्षनमन और पार्श्ववर्तन के लिए इंजन गिम्बल नियंत्रण (ईजीसी) तथा लोटन नियंत्रण के लिए तप्त गैस अभिक्रिया नियंत्रण प्रणाली (आरसीएस) मौजूद है। तीसरे चरण के लिए एलएच2 और एलओएक्स का उपयोग करते हुए दो घूमने वाले वर्नियर इंजन, प्रणोद चरण के दौरान अक्षनमन, पार्श्ववर्तन तथा लोटन नियंत्रण और कोस्ट चरण के दौरान शीत गैस प्रणाली का उपयोग करते हैं। तृतीय चरण के ऊपर स्थित उपकरण खंड (ईबी) में जड़त्वीय निर्देशन प्रणाली (आईजीएस) अंतरिक्षयान के अंतःक्षेपण तक यान को निर्देशित करती है। ऑनबोर्ड कंप्यूटर में स्थित बंद पाश निर्देशन प्रणाली अंतः क्षेपण स्थितियों में अपेक्षित शुद्धता सुनिश्चित करती है।

जीएसएलवी का प्रमोचन केंद्र, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) शार, भारत के पूर्वी तट पर चेन्नई से 80 कि.मी. उत्तर में स्थित है।