2.2 अवसर के लक्ष्यों का चक्र (टी ओ ओ)

  • जब एक स्थिति से दूसरे में अंतरित हो रहा हो इत्‍यादि और जिसके घटित होने के समय का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता हो तथा जिन प्रस्तावों में सुपरनोवा या नोवा जैसी परिघटना के पर्यवेक्षण, नए क्षणिक स्रोत अथवा एक्स-रे नोवा के पर्यवेक्षण या किसी स्रोत के अभिलक्षणों का अध्ययन आवश्‍यक है वैसे प्रस्‍तावों को अवसरा के लक्ष्य (टी ओ ओ) के रूप में ही शामिल किया जाना चाहिए  और एक पृथक टी ओ ओ समिति द्वारा इनकी समीक्षा की जाएगी।
  • एक टी ओ ओ चक्र किसी भी भारतीय प्रस्‍तावक द्वारा प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करने हेतु सदैव खुला रहता है। टी ओ ओ प्रस्‍तावों के लिए 5% आरक्षित प्रेक्षणकाल का प्रावधान है।
  • टी ओ ओ प्रस्‍ताव के प्रयोग से आबंटित टी ओ ओ समय के दौरान किए गए आंकडा़ पर्यवेक्षणों को तुरंत सार्वजनिक किया जाएगा।
  • यदि इस समय का पूर्ण उपयोग नहीं किया गया तो उसे ए ओ प्रस्‍तावों के समय के साथ जोडा़ जा सकता है।
  • प्रत्‍याशित टी ओ ओ वे हैं जिनकी स्रोत स्थिति ज्ञात है, परंतु उनका पर्यवेक्षण समय या तो अज्ञात है या अप्रत्‍याशित है। प्रत्‍याशित टी ओ ओ के लिए भी प्रस्‍ताव ए पी पी एस के माध्‍यम से प्रस्‍तुत किया जा सकता है जिसकी समीक्षा ए टी ए सी समिति द्वारा की जाएगी। प्रस्‍ताव को मंजूरी प्रदान करने हेतु वैज्ञानिक स्‍पष्‍टीकरण काफी प्रभावशाली होनी चाहिए। साथ ही, स्‍वीकृति हेतु उसे “ए” प्रा‍थमिकता भी प्राप्‍त होनी चाहिए (प्रत्‍याशित टी ओ ओ एवं प्रस्‍तावों के प्राथमिकता क्रम से संबंधित विवरणों के लिए एस्‍ट्रोसैट विज्ञान सहायता सेल (ए एस सी) वेबसाइट पर दिए गए ए पी पी एस प्रस्‍ताव गाइड का संदर्भ ले)। त‍थापि जब घटना घटती है, टी ओ ओ चक्र के तहत प्रस्‍तावक को सूचीबद्ध करने हेतु मूल प्रस्‍तावक के प्रधान अन्‍वेषक द्वारा टी ओ ओ प्रवर्तक प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किया जाना है। आंकड़ों पर अधिकार ए ओ प्रस्‍तावों के समान ही है।