2. प्रेक्षण चक्र

एस्‍ट्रोसैट का प्रेक्षण समय अवसर की घोषणा के माध्‍यम से किसी इच्‍छुक प्रस्‍तावक को उपलब्‍ध कराया जा सकता है। पहले ए ओ में, प्रेक्षण समय का 35% ए ओ प्रस्‍तावों के लिए उपलब्‍ध है और 5% अवसर के लक्ष्‍य के लिए उपलब्‍ध है। इस चक्र का शेष 60% समय नीतभार वाले दलों और अंशांकन वाले दलों को आबंटित किया जाता है।

2.1   ए ओ चक्र

एस्‍ट्रोसैट एक पूर्व-नियोजित ढ़ंग से प्रचालित किया जाता है, अर्थात् प्रस्‍तावक उनके प्रेक्षणों के निष्‍पादन के दौरान मिशन प्रचालन परिसर में उपस्थित नहीं होते हैं। इस प्रकार, सभी प्रेक्षण अग्रिम रूप में विस्‍तारपूर्वक निर्दिष्‍ट किए जाने चाहिए।

  • अक्‍तूबर 2016 से सितंबर 2017 के दौरान ए ओ के प्रस्‍तावों को निष्‍पादित करने हेतु प्रेक्षण समय का प्रतिशत ~35% है और इसे ए ओ चक्र कहा गया है।
  • यह 35% समय भारत में रहने वाले भारतीय वैज्ञानिकों/शोधकताओं तथा भारत के संस्‍थानों/विश्‍वविद्यालयों/महाविद्यलयों में कार्य करने वाले वैज्ञानिकों/शोधकर्ताओं के लिए आरक्षित है। वे खगोलविज्ञान के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान में संलग्न इच्‍छुक शोधकर्ता, वैज्ञानिक और बृहत् रूप में खगोल विज्ञानी समुदाय के हो सकते हैं, जो आवश्‍यक वैज्ञानिक एवं तकनीकी न्‍यायोचितता सहित विशिष्‍ट अभिलक्षित प्रेक्षणों के लिए प्रधान अन्‍वेषक (पी आई) के रूप में प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करने में सक्षम हैं और यदि अनुमोदन के आधार पर लक्ष्‍य का प्रेक्षण किया जाता है तो आंकड़ों का विश्‍लेषण कर सकते हैं।
  • एस्‍ट्रोसैट प्रयोक्‍ता समूह के विस्‍तार के लिए यह सिफारिश की जाती है कि जो गारंटित समय (GT) चक्र में प्रधान अन्‍वेषक के तौर पर प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करते हैं, वे ए ओ प्रस्‍तावों में प्रधान अन्‍वेषक के लिए अन्‍य खगोल वैज्ञानिकों को प्रोत्‍साहित करें। ए ओ चक्र के तहत यदि किसी विश्‍वविद्यालय, कॉलेज या अन्‍य संस्‍थान से प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करने वाले कोई प्रस्‍तावक, आंकडा़ विश्‍लेषण या विज्ञान संबंधी मामलों में सहायता प्राप्‍त करने हेतु किसी भी नीतभार टीम से CO-I रखना चाहते हैं तो वे हैण्‍डबुक में दिए अनुसार नीतभार टीम प्रधान की सलाह से ऐसा कर सकते हैं।
  • सभी चयनित ए ओ प्रस्‍ताव पर्यवेक्षण तालिका में शामिल किए जाएंगे। हालांकि यदि प्रचालनगत आवश्‍यकता हो तो इस ए ओ चक्र में अनुमोदित कुछ पर्यवेक्षण उपरोक्‍त समय तालिका से बाहर रखे जाएंगे, जिसे एस्‍ट्रोसैट मिशन द्वारा उपलब्‍ध कराया जाएगा।
  • प्रस्‍तावकों से अनुरोध है कि वे किसी पर्यवेक्षण की आवृत्ति न करें और यदि आवृत्ति हो तो उसे निष्‍पादित पर्यवेक्षणों से स्‍पष्‍ट करें। प्रस्‍तावकों द्वारा मार्च 2016 – सितंबर, 2016 तक गारंटीकृत समय चक्र के तहत एस्‍ट्रोसैट नीतभार टीम का उपयोग करते हुए किए गए/किए जा रहे पर्यवेक्षणों के लिए सामग्रियों तथा उपकरण प्राचलों की सूची की जांच करनी होती है। इन लक्ष्‍यों को शामिल करके एक रेड बुक को आई एस एस डी सी की वेबसाइट पर उपलब्‍ध कराने की योजना है। जो प्रस्‍तावक इन लक्ष्‍यों का पर्यवेक्षण करना चाहते है, उन्‍हें इस बात का स्‍पष्‍टीकरण देना होगा कि ऐसा करना क्‍यों आवश्‍यक है और इस प्रस्‍तावित पर्यवेक्षण से क्‍या अतिरिक्‍त सूचना प्राप्‍त होगी। खंड 4 भी देंखे।
  • आवृत्तियों की जांच ए टी ए द्वारा वैज्ञानिक समीक्षा के तहत प्रस्‍तावों के संसाधन के दौरान की जाएगी।

2.2  अवसर के लक्ष्‍यों का चक्र (टी ओ ओ)

  • जब एक स्थिति से दूसरे में अंतरित हो रहा हो इत्‍यादि और जिसके घटित होने के समय का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता हो तथा जिन प्रस्तावों में सुपरनोवा या नोवा जैसी परिघटना के पर्यवेक्षण, नए क्षणिक स्रोत अथवा एक्स-रे नोवा के पर्यवेक्षण या किसी स्रोत के अभिलक्षणों का अध्ययन आवश्‍यक है वैसे प्रस्‍तावों को अवसरा के लक्ष्य (टी ओ ओ) के रूप में ही शामिल किया जाना चाहिए  और एक पृथक टी ओ ओ समिति द्वारा इनकी समीक्षा की जाएगी।
  • एक टी ओ ओ चक्र किसी भी भारतीय प्रस्‍तावक द्वारा प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करने हेतु सदैव खुला रहता है। टी ओ ओ प्रस्‍तावों के लिए 5% आरक्षित प्रेक्षणकाल का प्रावधान है।
  • टी ओ ओ प्रस्‍ताव के प्रयोग से आबंटित टी ओ ओ समय के दौरान किए गए आंकडा़ पर्यवेक्षणों को तुरंत सार्वजनिक किया जाएगा।
  • यदि इस समय का पूर्ण उपयोग नहीं किया गया तो उसे ए ओ प्रस्‍तावों के समय के साथ जोडा़ जा सकता है।
  • प्रत्‍याशित टी ओ ओ वे हैं जिनकी स्रोत स्थिति ज्ञात है, परंतु उनका पर्यवेक्षण समय या तो अज्ञात है या अप्रत्‍याशित है। प्रत्‍याशित टी ओ ओ के लिए भी प्रस्‍ताव ए पी पी एस के माध्‍यम से प्रस्‍तुत किया जा सकता है जिसकी समीक्षा ए टी ए सी समिति द्वारा की जाएगी। प्रस्‍ताव को मंजूरी प्रदान करने हेतु वैज्ञानिक स्‍पष्‍टीकरण काफी प्रभावशाली होनी चाहिए। साथ ही, स्‍वीकृति हेतु उसे “ए” प्रा‍थमिकता भी प्राप्‍त होनी चाहिए (प्रत्‍याशित टी ओ ओ एवं प्रस्‍तावों के प्राथमिकता क्रम से संबंधित विवरणों के लिए एस्‍ट्रोसैट विज्ञान सहायता सेल (ए एस सी) वेबसाइट पर दिए गए ए पी पी एस प्रस्‍ताव गाइड का संदर्भ ले)। त‍थापि जब घटना घटती है, टी ओ ओ चक्र के तहत प्रस्‍तावक को सूचीबद्ध करने हेतु मूल प्रस्‍तावक के प्रधान अन्‍वेषक द्वारा टी ओ ओ प्रवर्तक प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किया जाना है। आंकड़ों पर अधिकार ए ओ प्रस्‍तावों के समान ही है।