सचल उपग्रह सेवाएं

सन् 2002 में इन्‍सैट-3सी तथा 2003 में जी सैट-2 प्रमोचन के साथ इन्‍सैट प्रणाली में एस-बैंड सचल उपग्रह सेवा (एमएसएस) शुरु की गई। एमएमएस के तहत निम्‍न दो दो प्रकार की सेवाओं को चिन्हित किया गया :-

  1. भारतीय उद्योग जगत की सहभागिता से ध्‍वनि व आंकडों के आदान-प्रदान के लिए इन्‍सैट के साथ काम करने वाले छोटे सुवाह्य उपग्रह टर्मिनलों का विकास किया गया।  आपदाओं के दौरान जब संचार के अन्‍य माध्‍यम निष्क्रिय हो जाते हैं तब ये टर्मिनल उपयोगी सिद्ध होते हैं। आपत संचार के लिए भारत में इन्‍हें कहीं भी, किसी भी जगह से उपयोग किया जा सकता है। टर्मिनल की प्रसारण व ग्राही अवृत्तियां एस-बैंड में होती है । 
  2. उपग्रह चैनल द्वारा  सुवाह्य टर्मिनल को केन्‍द्रीय हब पर इपीएबीएक्‍स के साथ संबद्ध किया जाता है। ऐसा करने पर वह चैनल इपीएबीएक्‍स का विस्तार बन जाता है और फिर उस टर्मिनल तथा इपीएबीएक्‍स के सभी स्‍थानीय फोन व किसी भी उपग्रह टर्मिनल के बीच बात हो सकती है। इस सेवा का केन्‍द्रीय हब स्‍टेशन सैक, अहमदाबाद में स्थित है ।