शाम के समय एम.ई.एन.सी.ए. द्वारा मंगल के बहिर्मंडल का प्रेक्षण

मंगल के बहिर्मंडल का तटस्‍थ सम्मिश्र विश्‍लेषित्र एम.ई.एन.सी.ए. मंगल कक्षित्र मिशन पर रखा द्रव्‍यमान स्‍पेक्‍ट्रोमापी है जो मंगल के बहिर्मंडल के तटस्‍थ सम्मिश्र का स्‍वस्‍थाने मापन करता है एम.ई.एन.सी.ए. 1 से 300 तक की परमाणु द्रव्‍यमान इकाई (ए.एम.यू.) के रेंज में तटस्‍थ घटकों के सापेक्ष आधिक्‍य का मापन करने में सक्षम है। मंगल के वायुमंडल में उपलब्‍ध मुख्‍य गैसें इस रेंज में आती हैं। विशिष्‍ट द्रव्‍यमान रेंज में द्रव्‍यमान स्‍पेक्‍ट्रा प्राप्‍त करने के अतिरिक्‍त, इस उपकरण में चुनिंदा प्रजातियों के सेट के आधिक्‍य के काल एवं विचरण का अनुवर्तन करने की सुविधा है। एम.ई.एन.सी.ए. से किए गए प्रेक्षणों से मंगल के वायुमंडल के पलायन को समझने में सहायता मिलेगी।

मंगल की सतह पर, उसके वायुमंडल में कार्बन डाई-ऑक्‍साईड (CO2) बहुत है और वह बहुत ही विरल (~6 मिलबार) है जो पृथ्‍वी का लगभग 10% है। मंगल के वायुमंडल के ऊपरी भाग में, लगभग 100 कि.मी. पर सूर्य प्रकाश की पराबैंगनी किरणें CO2 के कणों को कार्बन मोनो आक्‍साइड (CO) कण तथा ऑक्‍सीजन (O) परमाणु में विभक्‍त कर देती हैं। सौर पराबैंगनी विकिरण के द्वारा कार्बन मोनो-ऑक्‍साइड भी C एवं O परमाणु में विभाजित किया जा सकता है। ऑक्‍सीजन के परमाणु  CO2 के कणों से तीन गुना और CO के कणों से दो गुना हल्‍के होते हैं। इसलिए ऑक्‍सीजन के परमाणुओं की मान ऊँचाई अधिक है अर्थात्, ऊँचाई पर इसका घनत्‍व CO एवं CO2 की तुलना में धीरे-धीरे घटता है। अत:, मंगल के ऊपरी वातावरण में एक क्षेत्र ऐसा होता है जहाँ ऑक्‍सीजन के परमाणु CO2 के कणों से अधिक होते हैं। वह ऊँचाई, जहाँ यह परिवर्तन (O पर CO2 की बहुलता) होता है, वह इस पर निर्भर है कि सौर पराबैंगनी किरणें मंगल के वायुमंडल को कितना अंदर तक वेध सकती हैं।

नीचे दिए गए चित्र में, 21 दिसंबर, 2014 को मंगल ग्रह की शाम के दौरान, मंगल के बहिर्मंडल में 2015 कि.मी. से 400 कि.मी. की तुंगता तक मुख्‍य गैसों जैसे परमाणु ऑक्‍सीजन (O, 16 ए.एम.यू.), नाइट्रोजन कण (N2) प्‍लस कार्बन मोनोऑक्‍साइड (CO, 28 ए.एम.यू.) तथा कार्बन डाई आक्‍साइड (CO2, 44 ए.एम.यू.) का मेनका द्वारा मापित आधिक्‍य दर्शाया गया है। ये प्रेक्षण मध्‍यम सौर गतिविधि की स्थितियों के अनुरूप हैं जब कि एम.ओ.एम. की उपभू (पेरिएप्सिस) तुंगता सबसे निम्‍न (~265 कि.मी.) थी।

एम.ई.एन.सी.ए. प्रेक्षण दर्शाते हैं कि मंगलग्रही संध्‍या के दौरान 270±10 कि.मी. की तुंगता पर कार्बनडाईआक्‍साइड के मुकाबले ऑक्‍सीन का बाहुल्‍य है। तुंगता के साथ विभिन्‍न गैसों की बहुल्‍यता में विभिन्‍नता के कारण मंगलग्रही बहिर्मंडल का तापमान करीबन 271±5 के (-7 से 30 से.) पाया गया। ये मापन तब किए गए जब मंगल अपनी दीर्घवृत्‍तीय कक्षा में (अर्थात् पेरीहीलियन पर) सूर्य के समीप था, यह इससे भी अधिक ठंडा होता है जब मंगल सूर्य से दूर होता है।

ये, मंगल पर स्‍थानीय संध्‍याकालीन क्षेत्रों के दौरान संरचना के प्रथम स्‍वस्‍थाने मापन हैं, जो कि तापीय पलायन प्रक्रियाओं से संबंधित माडलों के लिए नीकटवर्ती स्थितियों को पूरा करने में मददगार होंगे। इन माडलों का प्रयोग मूल रूप से वायुमंडलों की उत्‍पत्ति से इनकी वर्तमान स्थिति तक तथा विभिन्‍न शक्तियों के प्रति इनकी प्रतिक्रिया को समझने के लिए किया जाता है।

यह नोट करना महत्‍वपूर्ण है कि CO2-से-O बहुलता बदलाव तुंगता रात और दिन में अलग-अलग होती है, तथा यह मंगल के विभिन्‍न ऋतुओं के साथ भी परिवर्तित होती है (पृथ्‍वी की ही तरह समान घूर्णन अक्ष झुकाव के कारण, मंगल पर पृथ्‍वी के समान ऋतुएँ हैं), साथ ही, सूर्य कितना सक्रिय है, उस पर भी निर्भर है।

एम.ई.एन.सी.ए. ने मंगलग्रही तटस्‍थ बहिर्मंडल की मुख्‍य प्रजातियों की संरचना के विभिन्‍न मापन प्रदान किए हैं।

उपरोक्‍त परिणामों का प्रकाशन अमरीकी पत्रिका, जियोफिजिक्‍ल रिसर्च लेटरस् खंड-43 पी.पी. 1862-1867, (2016) से किया गया है। 

एम.ई.एन.सी.ए. द्वारा मापी गई प्रमुख गैसों की बहुलता

एम.ई.एन.सी.ए. द्वारा मापी गई प्रमुख गैसों की बहुलता

 

प्राचल मूल्‍य
द्रव्‍यमान रेंज   1 से 300 ए.एम.यू. (कार्यक्रमपरक)
द्रव्‍यमान विभेदन  1 ए.एम.यू.
गतिक रेंज    1010
न्‍यूनतम संसूचनीय आंशिक दाब  10-14 टॉर

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