वीएसएससी में सतीश धवन पवन टनल कॉम्प्लेक्स की स्थापना की गई

अंतरिक्ष तक पहुंच की लागत को कम करने और अंतरिक्ष अन्वेषण की सीमाओं को बढ़ाने के लिए, इसरो ने पुन: प्रयोज्य लॉन्च वाहन(आरएलवी) और पुनः प्रवेश मिशन, वायु-श्वसन प्रणोदन प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और अंतर्गहीय मिशनों में कदम रखा है। इन मिशनों पर हाइपरसोनिक माख संख्या व्यवस्था में डिजाइन की क्रांतिकी आती हैं और इन माख संख्याओं में कठोर एयरो-थर्मोडायनामिक लक्षण वर्णन की आवश्यकता होती है। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) में उपरोक्त जरूरतों को पूरा करने के लिए, औद्योगिक प्रकार हाइपरसोनिक विंड टनल और शॉक सुरंग की स्थापना की गई है।

2012 में माख 6 प्रणाली और शॉक सुरंग के साथ चालू होने वाली सुविधा का पहले चरण में बृहत पैमाने पर उपयोग किया गया है और इसरो के मौजूदा कार्यक्रमों के लिए परीक्षण किए जा रहे हैं।

हायपरसोनिक पवन सुरंग के दूसरे चरण में माख 8, 10 और 12 तुंड, हीटर -2 प्रणाली, हॉट शट-ऑफ वाल्व, शीतलन प्रणाली और संबद्ध उप-प्रणालियों की प्राप्ति शामिल है। इन प्रणालियों की समझ में जटिल डिजाइन और विश्लेषण, उच्च परिशुद्धता मशीनिंग, भारी इंजीनियरिंग हार्डवेयर प्राप्ति, उच्च तापमान प्रदर्शन सामग्री, उच्च तापमान और उच्च दबाव वाल्व प्राप्ति का निर्माण, अत्याधुनिक उष्मा भंडारण मीडिया के रूप में कोर ईंटों का विकास, बड़े पैमाने पर प्राप्ति 15-5 PH फोर्जिंग और उच्च तापमान हीटिंग मॉड्यूल शामिल है। इन प्रणालियों का समाकलन कुशलता से किया गया था, निष्पादन मूल्यांकन किया गया था और सुरंग प्रणाली को जांचने और सत्यापित करने के लिए योग्यता परीक्षण का आयोजन किया गया था।

माख 12 ऑपरेशन की क्षमता के साथ, हाइपरसोनिक विंड टनल हाइड्रोनिक फ्लो सिमुलेशन क्षमता व्यापक स्पेक्ट्रम के मामले में दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा है। सुरंग में 1 मीटर से 80 मिलियन प्रति मीटर तक रेनॉल्ड्स संख्या के साथ 1 मीटर की नामीय नोजल निकास व्यास के माख 6, 8, 10 और 12 में प्रवाह क्षेत्र की स्थितियों का अनुकरण करने की क्षमता है। सुरंग दबाव-निर्वात 300 बार की उच्च दबाव भंडारण प्रणाली और 10-2 एम बार क्षमता के वैक्यूम सिस्टम के साथ प्रचालित होता है। हाइपरसोनिक माख संख्या में नोजल के माध्यम से विस्तार करने से पहले रिजनरेटिव स्टोरेज हीटर सिस्टम कॉम्पैक्टेड एयर को 1550 K से पहले प्रीहेट करने के लिए प्रयोग किया जाता है । अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग डेटा के अधिग्रहण और सुरंग प्रणाली पर नियंत्रण के लिए किया जाता है। प्रोग्राम योग्य तर्क नियंत्रक (पीएलसी) आधारित प्रणाली दोहरी अतिरिक्त हॉट स्टैंडबाय अवधारणा पर कार्य करती है और 100 से अधिक इनपुट मापदंडों पर मानिटर किया जाता है और 60 से अधिक ईवेंट नियंत्रित करती है। शॉक सुरंग दहन चालक का उपयोग करता है और इसमें 4.5 किमी/सेकेंड तक मुफ्त स्ट्रीम वेग को अनुकरण करने की क्षमता है और अधिकतम रेनॉल्ड्स संख्या 3.3 मिलियन प्रति मीटर है।

उपरोक्त सुविधाओं की प्राप्ति के कारण कोर ईंटों के क्षेत्र में, उष्मा शटऑफ वाल्व और बृहत पैमाने पर 15-5 PH मार्जिंग प्रौद्योगिकियों के स्वदेशी विकास का मार्ग प्रशस्त किया गया । उष्मा शट-ऑफ वाल्व, सुरंग सर्किट में सबसे महत्वपूर्ण वाल्व उच्च दबाव और क्रमशः 110 बार और 1550 के उच्च तापमान के साथ, स्वदेशी तौर पर विकसित किया गया है। उच्च तापमान हीटर सिस्टम उष्मा भंडारण मीडिया के रूप में उच्च शुद्धता एल्यूमिना कोर ईंटों, कम धूल विशेषताओं और उच्च तापमान थर्मल शॉक प्रतिरोध की मांग करता है । ये संयुक्त रूप से इसरो और भारतीय उद्योगों द्वारा विकसित किए गए थे। अभिन्न फ्लैंज के साथ बृहत पैमाने पर 15-5 PH फोर्जिंग 1000 बार तक उच्च दबाव सहन शॉक ट्यूबों और संबंधित श्रांति चक्र का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया ।

सुरंग की प्रमुख प्रणाली प्रति दिन पांच ब्लो डाउन आवश्यकता को पूरा करने के लिए डिज़ाइन की गई है। इसमें 500 वाल्व, 2 किमी पाइपलाइन, 40 नंबर की इलेक्ट्रिक मोटर्स और 35 तरल पंप हैं। इन सुविधाओं को भारतीय उद्योगों के समर्थन से स्वदेशी तौर पर डिजाइन, विकसित और बनाया गया है।

इस एकीकृत हाइपरसोनिक पवन टनल की सुविधा को इसरो,अध्यक्ष/सचिव, डीओएस द्वारा हाल ही में मार्च 2017 में शुरू किया गया है। पूरे परिसर, जिसमें एक मीटर हाइपरसोनिक विंड टनल, एक मीटर शॉक टनल और प्लाज्मा टनल का नाम "सतीश धवन पवन टनल कॉम्प्लेक्स" रखा गया है । प्रो.सतीश धवन को श्रद्धांजलि के रूप में, जिन्होंने पवन सुरंगों और वायुगतिकी के क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

वीएसएससी में 1 मीटर हाइपरसोनिक विंड टनल

वीएसएससी में 1 मीटर हाइपरसोनिक विंड टनल

 

वीएसएससी में सतीश धवन पवन टनल कॉम्प्लेक्स, समेकित हाइपरसोनिक पवन सुरंगों की स्थापना

वीएसएससी में सतीश धवन पवन टनल कॉम्प्लेक्स, समेकित हाइपरसोनिक पवन सुरंगों की स्थापना