मोम विज्ञान सम्मेलन

5 नवंबर, 2013 को प्रमोचित मंगल कक्षित्र मिशन (मोम), इसरो के प्रथम अंतर्ग्रहीय मिशन को 24 सितंबर, 2014 को मंगल ग्रह की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया था। मोम ने 24 सितंबर, 2017 को तीन वर्ष पूरे किये, हालांकि मोम मिशन के जीवन का डिज़ाइन छह महीने का था। उपग्रह का स्वास्थ्य अच्छा है और उम्मीद के मुताबिक काम करना जारी रखा है। मार्स कक्षित्र अंतरिक्ष यान से प्राप्त आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण प्रगति पर है।

24 सितंबर, 2017 को मंगल ग्रह की कक्षा में मोम के तीन साल के पूरा होने पर, अंतरिक्ष विज्ञान कार्यक्रम कार्यालय, इसरो मुख्यालय ने 25 सितंबर, 2017 को 'मोम विज्ञान सम्मेलन' आयोजित किया।

निम्नलिखित प्रतिष्ठित वैज्ञानिक इस अवसर पर उपस्थित थे:

  1. डॉ. राधाकृष्णन, माननीय सलाहकार, इसरो और इसरो के पूर्व अध्यक्ष और सचिव अं.वि. इस अवसर के लिए सम्मानीय अतिथि थे।
  2. आईजैक के निदेशक डॉ. एम.एन्नादुराई ने बैठक का उद्घाटन किया और
  3. डॉ. पी.जी. दिवाकर, वैज्ञानिक सचिव, इसरो की प्रारंभिक टिप्पणी की

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में उनके बहुमूल्य योगदान और विशेष रूप से मोम के लिए प्रो. यू.आर.राव को कृतज्ञता के साथ याद किया गया।

डॉ. पी.जी. दिवाकर, वैज्ञानिक सचिव ने अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में बताया कि मोम ने इसरो के बारे में सोच को बदल दिया है और देश के भीतर और बाहर बहुत प्रतिष्ठा दिलाया है। बत्तीस प्रस्तावों को मोम अवसर (मोम-एओ) घोषणा के तहत चुना गया था और वित्तपोषण सहायता से अठ्ठाइस से अधिक प्रस्तावों को लिया गया था। उन्होंने कहा कि, मोम के पहले साल के आंकड़ा 24 सितंबर, 2016 को जारी किए गए थे और लगभग 7 लाख हिट जिनमें से लगभग 1500 उपयोगकर्ता पहले ही पंजीकृत हो चुके हैं और 400 जीबी डेटा डाउनलोड कर चुके हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मोम से अधिक वैज्ञानिक परिणाम की उम्मीद है।

इसरो उपग्रह केंद्र, आईजैक के निदेशक डॉ एम एन्नादुराई ने विज्ञान मीट का उद्घाटन किया । उद्घाटन के दौरान, उन्होंने उल्लेख किया कि मोम को रिकार्ड समय में पूरा किया गया था । मोम ने युवा पीढ़ी को उत्साहित किया है और वे इसे महामिशन के रूप में याद करेंगे। उन्होंने विज्ञान पर अधिक ध्यान देने के लिए  भविष्य के मंगल मिशन की आवश्यकता पर जोर दिया।

माननीय सलाहकार डॉ. के राधाकृष्णन और इसरो के पूर्व अध्यक्ष ने आईएसएसडीसी वेबसाइट के माध्यम से मोम (24 सितंबर, 2015 से 23 सितंबर, 2016) के दूसरे वर्ष के आंकड़े सार्वजनिक के लिए जारी किए।

डॉ. राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय ग्रह विज्ञान समुदाय से मोम-एओ के लिए भारी प्रतिक्रिया मिली है और इसके परिणामस्वरूप देश के भीतर 32 शोध टीमों का सृजन हुआ। उन्होंने मोम मिशन ऑपरेशन टीम, अंतरिक्ष यान टीम और वैज्ञानिक उपकरणों की टीम के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने यह भी बताया कि मोम ने देश में हर किसी में उत्सुकता जागृत की है और हमें मिशन के विज्ञान उत्पादन को सार्वजनिक करने के लिए अधिक ध्यान देने की जरूरत है ।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इसरो के ग्रहीय मिशन ग्लोबल एक्सप्लोरेशन रोडमैप हैं। अब टीमों के मंथन और विचार आने वाले का समय के लिए हो जो 10-15 वर्षों में के लिए हो और जो उसके बाद 10 वर्षों के लिए महत्वपूर्ण रहे। ये चंद्रमा, मंगल पर आवास, नमूना संग्रह, कार्गो में पुन: उपयोग करने योग्य पुन: प्रवेश वाहनों और अन्य ग्रहों के संसाधनों के उपयोग के क्षेत्रों को कवर कर सकते हैं।

डॉ राधाकृष्णन ने भविष्य की ग्रहों की खोज के लिए और अंतरिक्ष खोज के लिए योजना तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इसके अलावा सत्र में पांच पेलोड टीमें और पच्चीस मोम-एओ प्रोजेक्ट टीमों से विज्ञान प्रस्तुति शामिल थी। लगभग 100 प्रतिभागियों ने विज्ञान सम्मेलन में भाग लिया।

मोम के तीन साल पूरा होने के अवसर पर, दूसरे वर्ष के आंकड़े (24 सितंबर, 2015 से 23 सितंबर, 2016) में 492 डेटा उत्पाद शामिल थे, जो जनता को इसरो-आईएसएसडीसी वेबसाइट  https://mrbrowse.issdc.gov.in/MOMLTA के माध्यम से उपलब्ध कराए गए थे।