मुख्यप नियंत्रण सुविधा (एम.सी.एफ.): भारत की भूतुल्ययकाली परिसंपत्ति का प्रबंधन

कर्नाटक के हासन तथा मध्‍यप्रदेश में भोपाल स्थित मुख्‍य नियंत्रण सुविधा (एम.सी.एफ.) इसरो के भूस्थिर/भूतुल्‍यकाली उपग्रहों जैसे इन्‍सैट, जीसैट, कल्‍पना तथा आई.आर.एन.एस.एस. श्रृंखला के उपग्रहों का मानीटरन एवं नियंत्रण करती है। एम.सी.एफ. इन उपग्रहों की समूची कालावधि में उपग्रहों के कक्षा संवर्धन, कक्षीय नीतभारों की जांच एवं सभी कक्षीय प्रचालनों के लिए उत्तरदायी है। एम.सी.एफ. की गतिविधियों में निम्‍न शामिल हैं:- चौबीसों घंटे अनुवर्तन, दूरमिति तथा आदेश (टी.टी.सी.) प्रचालन, तथा विशेष कार्य जैसे ग्रहण प्रबंधन, केंद्र रख-रखाव युक्तिचालन तथा आपातकाल में पुनर्प्राप्ति के क्रियाकलाप। एम.सी.एफ. उपग्रह नीतभारों की प्रभावी उपयोगिता के लिए प्रयोक्‍ता एजेंसियों के साथ संपर्क रखती है ताकि विशेष प्रचालनों के दौरान सेवा में बाधा को कम किया जा सके।

फिलहाल एम.सी.एफ. उन्‍नीस कक्षीय उपग्रहों के प्रबंधन का कार्य देख रहा है जैसे,  इन्‍सैट-3सी, इन्‍सैट-3ए, इन्‍सैट-4ए, इन्‍सैट-4बी, इन्‍सैट-4सी.आर., इन्‍सैट-3डी, कल्‍पना-1, जीसैट-7, जीसैट-8, जीसैट-10, जीसैट-12, जीसैट-14, आई.आर.एन.एस.एस.-1ए, आई.आर.एन.एस.एस.-1बी, आई.आर.एन.एस.एस.-1सी, आई.आर.एन.एस.एस.-1डी,   जीसैट-16, जीसैट-6 तथा हाल में प्रमोचित जीसैट-15।

एम.सी.एफ. की लधु कथा

एम.सी.एफ., इन्‍सैट प्रणाली के मुख्‍य केंद्र, को अंतरिक्ष विभाग के इन्‍सैट-1 के अंतरिक्ष खंड परियोजना कार्यालय के अधीन हासन में स्‍थापित किया गया था। राष्‍ट्रीय महत्‍व की इस सुविधा के लिए कर्नाटक के हासन को, निम्‍न विद्युतचुंबकीय विकिरण रव, भूतुल्‍यकालीन आर्च (वक्र) की व्‍यापक दृशीयता, इत्‍यादि, जैसे विविध पहलुओं के अध्‍ययन करने के पश्‍चात् चुना गया था। इन्‍सैट प्रणाली की उपयोगिता में भारी वृद्धि के कारण इसरो अत्‍यधिक उपग्रहों का निर्माण व प्रचालन कर सका। परिणामस्‍वरूप, इस राष्‍ट्रीय माँग को पूरा करने के लिए एम.सी.एफ. का संवर्धन किया गया और यह 1991 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन एक स्‍वतंत्र यूनिट बन गया।

 

बढ़ती प्रचालनात्‍मक आवश्‍यकताओं की सहायता के लिए ऐसी ही नियंत्रण सुविधा मध्‍यप्रदेश में भोपाल में स्‍थापित की गई जो वर्ष 2005 में कार्यरत हुई। एम.सी.एफ.-भोपाल भी चौबीसों घंटे कार्य करती है जिसमें प्रमुख तकनीकी सुविधाएँ जैसे, उपग्रह नियंत्रण केंद्र (एस.सी.सी.), उपग्रह नियंत्रण भू-केंद्र (एस.सी.ई.एस.) तथा पावर काम्‍प्‍लेक्‍स है। एम.सी.एफ. भोपाल तीन उपग्रहों के नियमित प्रचालन एवं रेजिंग आवश्‍यकताओं की देखरेख करती है।

एम.सी.एफ. उपग्रह स्‍वास्‍थ्‍य मानीटरन, नियंत्रण, मिशन विश्‍लेषण, प्रचालनों का     समय-निर्धारण करने के लिए और साथ-ही, इसरो के सभी भूतुल्‍यकाली उपग्रह कार्यक्रमों हेतु भू सहायता प्रदान करने के लिए प्रमुख केंद्र है। यह एक समेकित सुविधा है, जिसमें जिसमें आठ उपग्रह नियंत्रण भू केंद्र, एक उपग्रह नियंत्रण केंद्र, एक मिशन नियंत्रण केंद्र, कंप्‍यूटरों का नेटवर्क, संचार प्रणाली तथा उपयोगिता सहायक प्रणालियाँ मौजूद हैं।

भारतीय राष्‍ट्रीय उपग्रह (इन्‍सैट) प्रणाली

भारत के लिए घरेलु भूस्थिर उपग्रहों की योजना डॉ. विक्रम साराभाई द्वारा साठ के दशक के अंत में प्रस्तुत की गई थी। 1975 में संकल्पित, भारतीय राष्‍ट्रीय उपग्रह (इन्‍सैट) प्रणाली 1982 में इन्‍सैट-1ए उपग्रह के प्रमोचन के साथ प्रचालनात्‍मक बनी। 1983 में स्‍थापित इन्‍सैट प्रणाली, आज, एशिया प्रशांत क्षेत्र में सबसे बड़ी घरेलु संचार उपग्रह प्रणालियों में से एक है। इन्‍सैट बहु-उद्देशीय प्रचालनात्‍मक उपग्रह प्रणाली है जो राष्‍ट्र-व्‍यापी टी.वी. प्रसारण, घरेलु लंबी दूरी का दूर संचार, मौसमविज्ञा‍नीय प्रेक्षण तथा आँकडा़ प्रसारण और रेडियो नेटवर्किंग प्रदान करती है। शिक्षा एवं विकास, सुदूर क्षेत्र तथा ग्रामीण क्षेत्र का संचार, मौसमविज्ञानीय एवं आपदा चेतावनी के लिए टी.वी. उपयोग ने इन्‍सैट सेवा के गत     32 वर्षों में उत्‍कृष्‍ट सफलता हासिल की है।

एम.सी.एफ. की भूमिका

एम.सी.एफ. इन्‍सैट, जीसैट एवं उपग्रहों की आई.आर.एन.एस.एस. श्रृंखला को दूरमिति, अनुवर्तन एवं आदेश प्रचालन प्रदान करती है और उपग्रह मिशन के सभी चरणों के प्रचालनों में सहायता करती है।

एम.सी.एफ. प्रमोचक राकेट से उपग्रह के अलग होते ही इससे भेजे जाने वाले प्रथम संकेत प्राप्‍त करती है। प्रत्‍येक उपग्रह पर क्रांतिक गतिविधियाँ की जाती हैं जिनमें कक्षा संवर्धन हेतु मुख्‍य द्रव राकेट इंजन का ज्‍वालन, प्रमोचन के दौरान बंद सौर पैनलों एवं ऐंटेनाओं का खुलना तथा नीतभारों का विस्‍तृत परीक्षण शामिल है। अब तक, एम.सी.एफ. ने प्रमोचनों के तुरंत बाद से संकेत प्राप्‍त करते हुए 26 सफल प्रमोचनों में सहायता की है। सामान्‍यतया, उपग्रह को प्रमोचन के कुछ सप्‍ताहों के अंदर ही उसके निर्धारित कक्षीय स्‍थान पर स्‍थापित कर दिया जाता है। तब से, समूची अभिकल्पित कावावधि तक अंतरिक्षयान का मानीटरन व नियंत्रण किया जाता है।

उपग्रह की विभिन्‍न उप प्रणालियों की स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी जानकारी को संग्रहित कर उपग्रह द्वारा भू-स्‍टेशन पर प्रसारित किया जाता है, जिसे दूरमिति कहा जाता है। यह स्‍वास्‍थ्‍य मापदंड उपग्रह की स्थितियों जैसे उर्जा सृजन, नोदक उपयोग, विभिन्‍न स्‍थानों पर तापमान, ईंधन टैंक का दाब, सूर्य तथा पृथ्‍वी आदि से संबंधित कोणीय सूचना के बारे में बताते हैं। प्रत्‍येक उपग्रह में लगभग 800 ऐसे स्‍वास्‍थ्‍य मापदंड होते हैं। एम.सी.एफ. के विशाल ऐंटेना (14 मी., 11मी., 7.5 मी. व्‍यास आदि) उपग्रह पर ध्‍यान केंद्रित रखते हैं तथा दूरमिति संकेत प्राप्‍त करते हैं।

कंप्‍यूटर के नेटवर्क दूरमिति संकेतों का प्रसंस्‍करण करते हैं तथा वास्‍तविक समय में टैक्‍स्ट और ग्राफिक्‍स के रूप में आँकडों को प्रस्‍तुत करते हैं। उपग्रहों के अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य को बनाए रखने के लिए, इन सभी प्रकार्यों का लगातार मानीटरन अनिवार्य है। एम.सी.एफ. में चौबीसों घंटे समर्पित कंप्‍यूटर तथा अत्‍यंत कुशल तथा प्रशिक्षित अंतरिक्षयान प्रचालन कर्मीदन कार्य करते हैं। विशेषज्ञों का दल उपग्रह स्‍वास्‍थ्‍य आँकडे की समीक्षा करते हैं तथा डिजा़इनरों को बहुमूल्‍य फीडबेक प्रदान करते हैं।

प्रमोचन के बाद, उपग्रह के नियंत्रण के लिए नियंत्रण केंद्र से उच्‍च आवृत्ति रेडियो तरंग द्वारा निदेश भेजे जाते हैं, जिसे दूरादेश कहा जाता है। दूरादेश के माध्‍यम से कई कार्य जैसे प्रणाली को ऑन/ऑफ करना, अनुदेश सेट के साथ कंप्‍यूटर पर उपग्रह को प्रोग्राम करना, पृथ्‍वी के चित्रों को लेने हेतु कैमरा को ऑन रखना, आदि किया जाता है।

विषुव के करीब (21 मार्च और 21 सितंबर), पृथ्‍वी की छाया से भूतुल्‍यकाली उपग्रह स्‍थानीय समय पर विषुव पर करीब आधी रात को 45 दिनों तक गुजरता है। सबसे बडा़ ग्रहण 72 मिनट का है तथा इस अवधि के दौरान ऑन बोर्ड बैटरी विद्युत उर्जा प्रदान करती है। बैटरी निष्‍पादन का एम.सी.एफ. से बारीकी से और निर्बाध नि‍रीक्षण किया जाता है तथा बैटरियों के सही स्थिति का भी पता लगाया जाता है।

सूर्य, चंद्र के आकर्षण के या सौर विकिरण दाब के कारण, उपग्रह की कक्षा में विघ्‍न पैदा होता है। इन विचलनों का पता रेंजिंग तथा अनुवर्तन आँकडा़ के प्रयोग द्वारा लगाया जा सकता है तथा इन्‍हें आवधिक रूप से ठीक किया जाता है। इस प्रक्रिया को स्‍टेशन कीपिंग युक्तिचालन कहा जाता है। कक्षा विचलन को +/-0.1 डिग्री से कम तक सीमित किया गया है।

जीसैट-15 का प्रमोचन एवं प्रारंभिक कक्षा चरण (एल.ई.ओ.पी.) प्रचालन

जीसैट-15 को कौरू फ्रेंच गियाना से 11 नवंबर, 2015 को 03:45 बजे (भारतीय मानक समय) एरियान 5 Vए.-227 द्वारा सफलतापूर्वक प्रमोचित किया गया। जीसैट-15 इसरो द्वारा निर्मित भारत का छब्‍बीसवाँ भूस्थिर संचार उपग्रह है। यह उपग्रह, उच्‍च पावर वाले   के.यू.-बैण्‍ड के संचार अनुप्रयोगों तथा जी.पी.एस. आधारित भू संवर्धन नौवहन (गगन) को सहायता प्रदान करने के लिए अभिप्रेत है।

जीसैट-15 उपग्रह के प्रमोचक राकेट से अलग होते ही एम.सी.एफ., हासन ने उसका आदेश व नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। उपग्रह की प्रारंभिक जाँच से उसके सामान्‍य होने का पता चला। तदुपरांत एम.सी.एफ. ने लगभग 8566 सेकेंड की कुल अवधि तक उपग्रह पर रखे द्रव अपभू मोटर (एल.ए.एम.) को बारंबार ज्‍वलित करते हुए प्रारंभिक कक्षा संवर्धन युक्तिचालन निष्‍पादित किए। अंतत:, जीसैट-15 को इन्‍सैट-3ए व इन्‍सैट-4बी के साथ 93.5 डिग्री पूर्व देशांतर पर वृत्ताकार भूस्थिर कक्षा में स्थित किया जाएगा। जीसैट-15 की कक्षीय जाँच नवंबर 2015 के तीसरे व चौथे सप्‍ताह के दौरान करना निर्धारित है जिसके पश्‍चात् उपग्रह सामान्‍य उपयोग के लिए तैयार हो जाएगा।

जीसैट-15 को उच्‍च ऊर्जा वाले के भ-बैण्‍ड प्रोषानुकरों को प्रदान करने हेतु संरूपित किया गया है। गगन नीतभार एल1 एवं एल5 बैण्‍ड में प्रचालन करता है और भारत में कहीं भी स्थित प्रयोक्‍ताओं को नौवहन सेवा प्रदान करता है। जीसैट-8 व जीसैट-10 के बाद,  जीसैट-15 ऐसा तीसरा उपग्रह है जो गगन नीतभार को ले गया है। जीसैट-15 उपग्रह की ओर सही रूप से भू ऐंटेनाओं को इंगित करने में सहायक के के.यू.-बैण्‍ड बीकन का भी वहन करता है।

एम.सी.एफ. हासन के मुख्‍य भवन का विशाल दृश्‍य

एम.सी.एफ. हासन के मुख्‍य भवन का विशाल दृश्‍य 

उपग्रह नियंत्रण भू केंद्र का प्ररूप दृश्‍य

उपग्रह नियंत्रण भू केंद्र का प्ररूप दृश्‍य

 

उपग्रह नियंत्रण केंद्र के अंदर का दृश्‍य

उपग्रह नियंत्रण केंद्र के अंदर का दृश्‍य