मरुस्थंलीकरण एवं भू-अपक्षयन एटलस का विमोचन

हमारे देश में कृषि की पैदावार के लिए मरुस्‍थलीय एवं भू-अपक्षयन मुख्‍य बाधाएं हैं। मरुस्‍थलीकरण एवं भू-अपक्षयन से जूझना, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्‍ली द्वारा विनिर्दिष्‍ट मुख्‍य क्षेत्र है। 19 संबंधित भागीदार संस्‍थाओं के साथ अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (सैक), इसरो, अहमदाबाद ने भौगोलिक सूचना प्रणाली (जी.आई.एस.) पर्यावरण में भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह (आई.आर.एस.) के आंकड़े का उपयोग कर समूचे देश के लिए मरुस्‍थलीकरण की सूची तैयार कर मॉनीटरन किया है।

इसरो संबंधित मानचित्र एवं विशिष्‍ट लक्षणों को एटलस के रूप में संकलित किया गया, जिसे पर्यावरण, वन एवं जल वायु परिवर्तन मंत्रालय तथा जोधपुर, राजस्‍थान स्थित शुष्‍क क्षेत्र वन अनुसंधान संस्‍था (ए.एफ.आर.आई.) द्वारा संयुक्‍त रूप से 17 जून, 2016 को “विश्‍व मरुस्‍थलीकरण विरोध दिवस” के अवसर पर विमोचित किया गया।

इस एटलस में भूमि उपयोग अपक्षयन की प्रक्रिया तथा गंभीरता के स्‍तर को दर्शाती राज्‍यवार मरुस्‍थलीकरण एवं भू-अपक्षयन की स्थिति के मानचित्र दर्शाये गए हैं। इसे जी.आई.एस. पर्यावरण में 2011-13 एवं 2003-05 की समयावधि में आई.आर.एस. उन्‍नत व्‍यापक क्षेत्र संवेदन (एविफ्स) के आंकड़े का उपयोग करते हुए तैयार किया गया है। दोनों समयावधियों तथा परिवर्तनों के लिए राज्‍य-वार तथा समूचे देश के लिए मरुस्‍थलीकरण/भू-अपक्षयन के अधीन क्षेत्र दर्शाये गए हैं। मरुस्‍थलीकरण तथा भू-अपक्षयन के प्रभाव को कम करने हेतु क्षेत्रों को प्राथमिकता देने में ये परिणाम उपयोगी हैं।

यह ध्‍यान रहे कि भारत मरुस्‍थलीकरण से जूझने हेतु संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ का हस्‍ताक्षरकर्ता है। देश मरुस्‍थलीकरण एवं भू-अपक्षयन से जूझने के लिए कटिबद्ध है और वर्ष 2030 तक    भू-अपक्षयन की तटस्‍थ स्थिति प्राप्‍त करने के लिए अभिप्रेत है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय यू.एन.सी.सी.डी. के कार्यान्‍वयन हेतु नोडल मंत्रालय है। भारत की मरुस्‍थलीकरण एवं भू-अपक्षयन स्थिति यू.एन.सी.सी.डी. को दी गई भारत की रिपोर्ट महत्‍वपूर्ण योगदान है। इसके अलावा, संबंधित नीति निर्माता, क्षेत्रीय योजना बनाने वाले तथा अनुसंधानकर्ता भी इस एटलस का तुरंत संदर्भ के रूप में उपयोग कर सकते हैं।

एटलस का विमोचन

एटलस का विमोचन

 

 एटलस डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें  एटलस दोनों समयावधियों के लिए सृजित भू-आकासशीय आंकड़ा आधार संबंधित उपग्रह चित्रों के साथ सैक वेब पोर्टल “पृथ्‍वी आंकड़ा तथा अभिसंग्रह प्रणाली का दृश्‍य (वेदास)” पर उपलब्‍ध है"।

 

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एटलस दोनों समयावधियों के लिए सृजित भू-आकासशीय आंकड़ा आधार संबंधित उपग्रह चित्रों के साथ सैक वेब पोर्टल पृथ्‍वी आंकड़ा तथा अभिसंग्रह प्रणाली का दृश्‍य (वेदास) पर उपलब्‍ध है"।