भारत का पहला संचार उपग्रह-एप्‍पल

एरियान पैसंजर नीतभार परीक्षण, एप्‍पल एक परीक्षणात्‍मक संचार उपग्रह था जिसे 19 जून, 1981 को ठीक 35 वर्ष पहले कौरु फ्रेंच गयाना से एरियान-1 द्वारा सफलतापूर्वक प्रमोचित किया गया था। यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की एक महत्‍वपूर्ण उपलब्धि है। एप्‍पल को “सैंडविच” पैसेंजर के रूप में डिजाइन कर निर्मित किया गया था मीटियोसैट ऊपर और सी.ए.टी. (कैप्‍सूल एरियान टेक्‍नॉलोजिक) माड्यूल नीचे था। इसे इसरो के अपने अपभू मोटर, जिसे एस.एल.वी.-3 के चतुर्थ चरणी मोटर से निरूपित किया गया, द्वारा भू-तुल्‍यकाली कक्षा (जी.एस.ओ.) में प्रमोचित किया गया था। एप्‍पल अंतरिक्षयान को औद्योगिक शेड़ में सीमित अवसंरचना के साथ मात्र दो वर्षों में डिजाइन कर निर्मित किया गया था। इसने इसरो को त्रि-अक्षीय स्थिरीकृत भूस्थिर संचार उपग्रहों के डिजाइन एवं विकास और साथ-ही-साथ, कक्षा संवर्धन युक्तिचालन, साथ के अनुबंधों का कक्षा में प्रस्‍तरण, स्‍टेशन रख-रखाव इत्‍यादि के लिए बहुमूल्‍य अनुभव प्रदान किया।

एप्‍पल का टी.वी. कार्यक्रमों के प्रसारण एवं रेडियो नेटवर्किंग सहित कई संचार परीक्षणों में उपयोग किया गया। इसका उपयोग समग्र आवृत्ति, कोड प्रभाग बहु उपागम प्रणाली, रेडियो नेटवर्किंग कंप्‍यूटर इंटरकनेक्‍ट  याद्देच्छिक उपागम तथा पॉकेट स्विचिंग परीक्षणों को करने में व्‍यापक रूप से किया गया। साथ ही, आज की अत्‍याधुनिक प्रौद्योगिकी जैसे संवेग प्रवृत्ति की त्रि-अक्षीय स्थिरीकरण तकनीक, मोटर संचालित प्रस्‍तरित सौर व्‍यूह, अभिवृत्ति नियंत्रण हेतु भू संवेदन, सामिश्र परवर्तक सहित सी-बैंड प्रेषानुकर डिजाइन, कक्षा संवर्धन, स्‍टेशन अर्जन, स्‍टेशन का रख-रखाव तथा कई मिशन प्रबंधन एवं उडान गतिक तकनीकों का प्रारंभ इसी से हुआ।

एप्‍पल ने प्रचालनात्‍मक संचार उपग्रहों के स्‍वेदशी विकास की नींव रखी जो आज इन्‍सैट एवं जीसैट श्रृंखला के रूप में विकसित है। इन उपग्रहों ने देश की प्रौद्योगिक एवं आर्थिक उन्‍नति में क्रांति-सी ला दी। दूर शिक्षा, दूर-चिकित्‍सा, ग्रामीण संसाधन केंद्र (वी.आर.सी.) आपदा प्रबंधन प्रणाली (डी.एम.एस.) इत्‍यादि जैसे नए अनुप्रयोगों को आम जनता तक पहुँचाना साध्‍य बनाया है।

मुख्‍यांश:

  • एप्‍पल 13 अगस्‍त, 1981 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा राष्‍ट्र को समर्पित किया गया। प्रधानमंत्री जी ने सांकेतिक रूप में एप्‍पल का मॉडल संचार मंत्री को सौंपते हुए कहा था कि एप्‍पल ने ‘भारत के उपग्रह संचार युग की शुरूआत’ की है।

  • 15 अगस्‍त को लाल किले की प्राचीर से राष्‍ट्र को प्रधानमंत्री के संबोधन का एप्‍पल द्वारा सीधा  प्रसारण किया गया।

  • एप्‍पल उपग्रह के प्रमोचन का एक वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्‍य में 19 जून 1982 को भारत के डाक व टेलीग्राफ विभाग द्वारा डाक टिकट जारी किया गया था।

  • एप्‍पल ने उन्‍नत संचार प्रौद्योगिकी के परीक्षण करना संभव बनाया है और उपग्रहों के डिजाइन;  संविरचन, प्रमोचन तथा प्रमोचन के पश्‍चात् जटिल मिशन युक्तिचालनों को करने और भू स्थिर कक्षा में उपग्रह के प्रमोचन और अनुरक्षण के लिए विशेषज्ञता स्‍थापित की है।

व्‍यापक परीक्षण करने हेतु एप्‍पल का लगभग दो वर्षों तक उपयोग किया गया और 19 सितंबर, 1985 में निष्क्रिय बनाया गया। यद्यपि एप्‍पल एक ही सी-बैण्‍ड प्रेषानुकर को ले गया तथापि उसने प्रौद्योगिकी विकास और संचार उपग्रह के प्रचालनात्‍मक अनुभव में बहुत लाभ पहुँचाया और इस प्रकार इन्‍सैट प्रणाली की नीवं डाली।

मछुआरे के गाँव से लाल गृह तक” नामक पुस्‍तक से डॉ. आर.एम. वासगम द्वारा एप्‍पल पर लिखा लेख

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एप्‍पल अंतरिक्षयान    डाक विभाग द्वारा जारी डाक टिकट

                               एप्‍पल अंतरिक्षयान                                                              डाक विभाग द्वारा जारी डाक टिकट

 

एप्‍पल के विद्युत-चुंबकीय संगतता परीक्षा हेतु बैल-गाडी ने उसे ले जाने हेतु धातु-मुक्‍त वाहन का कार्य किया। मूलभूत आवश्‍यकताओं के अभाव में भी इसरो अपने लक्ष्‍य प्राप्ति में कभी पीछे नहीं रहा

एप्‍पल के विद्युत-चुंबकीय संगतता परीक्षा हेतु बैल-गाडी ने उसे ले जाने हेतु धातु-मुक्‍त वाहन का कार्य किया। मूलभूत आवश्‍यकताओं के अभाव में भी इसरो अपने लक्ष्‍य प्राप्ति में कभी पीछे नहीं रहा

 

एरियान के कार्मिक (चौकोर सौर पैनलों के साथ) एप्‍पल उपग्रह के सामने सौजन्‍य: एरियान स्‍पेस

एरियान के कार्मिक (चौकोर सौर पैनलों के साथ) एप्‍पल उपग्रह के सामने सौजन्‍य: एरियान स्‍पेस