भविष्य के मंगल कक्षित्र मिशन के लिए अवसर की घोषणा (एओ) (मोम-2)

मंगल ग्रह पर भूआकृतिक सुविधाएं जल्दी गर्म और गीली जलवायु, और शायद आदिम जीवन के उद्भव के लिए अनुकूल रही है। मंगल ग्रह अद्वितीय माना जाता है जिसके गठन और इसके विकास के दौरान पृथ्वी पर मौजूद प्रक्रियाओं की तरह का अनुभव किया है । हाल की खोजों से पता चला है कि मंगल ग्रह के पास विविध सतहों के रिकार्ड हैं जोकि 3जीए से पहले भूगर्भीय प्रक्रियाएं, और हाल ही के ज्वालामुखी, पिछले कुछ वर्षों के दौरान 100 मिलियन घटनाओं के अपक्षय का परिणाम के रूप में बने । यह पूरे भूवैज्ञानिक रिकॉर्ड अभी तक चंद्रमा या पृथ्वी पर पाए जाने हैं, और इसलिए नए मंगल मिशन ग्रहों की विकासवादी प्रक्रियाओं, के बारे में सवालों को संबोधित करने का अवसर प्रदान करते हैं कि कैसे और क्या जीवन सौर प्रणाली में कहीं है, और भूवैज्ञानिक और संभावित जैविक के बीच इतिहास है।

मंगल ग्रह के पिछले कक्षित्र और रोवर मिशनों ने उजागर किया कि सतह पर हाइड्रेटेड खनिजों की उपस्थिति और उप सतह क्षेत्रों में बर्फ रूपी पानी की उपस्थिति के लिए प्रत्यक्ष सबूत प्रदान किया है। मीथेन के अस्तित्व को कुछ सीमित भू आधारित और अंतरिक्ष आधारित अवलोकनों से ज्ञात किया गया है, लेकिन अभी तक स्पष्ट रूप से इस बात की पुष्टि होनी है।

मंगल ग्रह के अस्थायी विकास की समझने के लिए वायुमंडलीय पानी और कार्बन डाइऑक्साइड की हानियों के लिए नए माप जरूरी है। भविष्य के मंगल ग्रह मिशन लैंडर और रोवर्स द्वारा जांच कर रही मूल स्थान सतह/उपसतह में पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं,  मंगल कक्षित्र सतह और उप सतह का अध्ययन जारी रखने के लिए और पृथ्वी के लिए संचार लिंक जारी रखते हैं । विज्ञान उद्देश्यों के साथ कक्षित्र मिशन मूल्यवान वैश्विक मंगल ग्रह विज्ञान की जानकारी प्रदान कर सकते हैं।

मंगल कक्षित्र मिशन (मोम) ने ग्रहों के अन्वेषण के लिए भारत की तकनीकी क्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है। मोम मंगल की सतह सुविधाओं, आकृति विज्ञान, खनिज और मंगल ग्रह के वायुमंडल का अध्ययन करने के लिए उसमें पाँच वैज्ञानिक पेलोड है। मोम आंकड़ों का विश्लेषण प्रगति पर है।

अब भविष्य के प्रमोचन के अवसर के लिए मंगल ग्रह के चारों ओर परिक्रमा करने के लिए अगले मिशन की योजना बनाई है। वैज्ञानिक समस्याओं और विषयों को संबोधित करने के लिए, मंगल ग्रह के चारों ओर कक्षित्र मिशन (मोम-2) ऑनबोर्ड पर प्रयोगों के लिए भारत के अंदर अभिरुचि रखने वाले वैज्ञानिकों से प्रस्ताव देने का अनुरोध किया गया है।

यह "अवसर की घोषणा(एओ)" भारत के वर्तमान में ग्रहों के अन्वेषण/अंतरिक्ष के लिए विज्ञान उपकरणों का विकास के लिए अध्ययन में शामिल करने के लिए सभी संस्थानों को संबोधित किया है । यह कक्षित्र मिशन वैज्ञानिक समुदाय को खुले विज्ञान समस्याओं का समाधान करने के लिए सुविधा प्रदान करेगा। प्रस्ताव के प्रधान अन्वेषक को (i) वैज्ञानिक समस्याओं का समाधान कर सकते हैं उनके लिए उपयोग किए जा रहे उपकरणों की जानकारी देगा और (ii) अंतरिक्ष योग्य उपकरण विकसित करने के लिए उपकरण टीम को एक साथ लाने और टीम का नेतृत्व करने के लिए, सक्षम होना चाहिए।

प्रस्तावित उपग्रह के पेलोड की क्षमता 100 किलो और 100वॉ होने की संभावना है। हालांकि अंतिम मूल्यों को अंतिम विन्यास के आधार पर सही किए जा रहे हैं। कक्षा के अपोरियन लगभग 5000 किमी होने की संभावना है।

प्रस्ताव (डॉक्युमेंट और पीडीएफ संस्करणों में अग्रिम प्रति और स्पीड पोस्ट द्वारा मूल प्रति भेजना चाहिए) उचित माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगाः

कार्यक्रम निदेशक,

अंतरिक्ष विज्ञान कार्यक्रम कार्यालय,

इसरो मुख्यालय, अंतरिक्ष भवन,

बीईएल रोड,बेंगलूर- 560231

ईमेल: sspo@isro.gov.in  

निम्नलिखित विवरण (प्रारूप देखें) के साथ उचित माध्यम से प्रस्तावों को प्राप्त करने के लिए अंतिम तिथि 20 सितंबर 2016 है।

प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए प्रारूप

    मिशन से अन्य विशेष आवश्यकता

    1. प्रस्ताव का कार्यकारी सारांश (दो पृष्ठ)
    2. वैज्ञानिक उद्देश्य
    3. विस्तृत वैज्ञानिक स्पष्टिकरण सहित वांछित परिणाम और पिछले और समकालीन मिशन की तुलना में उसका महत्व
    4. मास, बिजली, प्रयोग के लिए मात्रा की आवश्यकता
    5. मिशन से अन्य विशेष आवश्यकता
    6. विस्तृत उद्धृत चार्ट और प्रयोगशाला मॉडल/सत्यापन मॉडल पूरा करने के लिए समय अनुसूची, जो कि उड़ान के मॉडल के समरूप डिजाइन और लगभग एक ही आकार का होना चाहिए ।
    7. इसके अलावा, योग्यता मॉडल की विकास, परीक्षण और अंशाकन की जांच के लिए अपेक्षित समयावधि (मास, खंड और उड़ान मॉडल के समरूप डिजाइन में समान होना चाहिए और सभी पर्यावरणीय परीक्षण से गुजरना चाहिए) और उड़ान मॉडल टी0; यह मानते हुए की टी0 परियोजना के प्रस्ताव के लिए अनुमोदन की तारीख है।
    8. प्रयोग के लिए अंशांकन प्रक्रियाएं और डाटा प्रोसेसिंग, विश्लेषण, सॉफ्टवेयर पाइप लाइन के लिए योजना
    9. पेलोड के विकास और जांच के लिए आपके संस्थान/प्रयोगशाला में उपलब्ध सुविधा
    10. प्रस्तावित सम्मिलित वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग टीम और संबंधित क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता और उपलब्धियां।
    11. वर्षवार आवश्यक बजट

    मंगल ग्रह के अन्वेषण के लिए प्रयोगों का सबसे इष्टतम सूट, छांटे गए प्रस्तावों के प्रस्तावकों को अंतिम रूप देने से पहले अंतरिक्ष विज्ञान सलाहकार समिति (ADCOS) के सम्मुख प्रस्तुति देने का अनुरोध किया जाएगा। ADCOS द्वारा दिए गए किसी भी सुझाव को अंतिम चयनित प्रस्ताव में शामिल करना होगा और अंतिम प्रतिलिपि अपने संबंधित संस्थानों के प्रधान के माध्यम से प्रस्तुत करें।