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अंतरिक्ष विभाग
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन

लोक सूचना : सावधान : नौकरी पाने के इच्छुक उम्मीदवार

यू.आर.राव उपग्रह केंद्र (यू.आर.एस.सी), अं‍तरिक्ष विभाग, इसरो, बेंगलूरु में प्रतिनियुक्ति के आधार पर वेतन मैट्रिक्‍स (7वां केंद्रीय वेतन आयोग) के स्‍तर 14 में नियंत्रक के पद की भर्ती (आवेदन की अंतिम तिथि है: 15/11/2021)
चंद्रयान-2 विज्ञान आंकड़ा उपयोगीता के लिए अवसर की घोषणा। प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 31 अक्तूबर 2021 है।
वर्तमान ई-प्रापण साइट का नई वेबसाइट में रूपांतरण करना प्रस्तावित है। सभी पंजीकृत/नये विक्रेताओं से नई वेबसाइट https://eproc.isro.in का अवलोकन करने तथा इसरो केंद्रों के साथ भाग लेने के लिए अपने प्रत्यय-पत्र का वैधीकरण करने का अनुरोध किया जाता है।

प्रमोचित्र

 विगत

 प्रचालनरत

 भावी

 

प्रस्‍तावना

launchers
 

प्रक्षेपक अथवा प्रमोचक राकेटों का उपयोग अंतरिक्षयान को अंतरिक्ष तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। भारत के पास दो प्रचालनरत प्रक्षेपक हैं :  पहला ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचक राकेट (पी.एस.एल.वी.) तथा दूसरा भू-तुल्‍यकाली उपग्रह प्रमोचक राकेट (जी.एस.एल.वी.) । स्‍वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी चरण से युक्‍त जी.एस.एल.वी. ने 2 टन भार वाली श्रेणी के संचार उपग्रहों को प्रमोचित करना सक्षम बनाया है ।  जी.एस.एल.वी. का अगला रूपांतर स्‍वदेशी उच्‍च प्रणोद वाले क्रायोजेनिक इंजन से युक्‍त  जी.एस.एल.वी. मार्क-III  है, जिसमें 4 टन भार वाली श्रेणी के संचार उपग्रहों को प्रमोचित करने की क्षमता है।

उपग्रहों को उनकी निर्धारित कक्षा में सटीक रूप से स्‍थापित करने के लिए परिशुद्धता, निपुणता, शक्ति तथा त्रुटिहीन योजना के संयोजन की परमावश्‍यकता होती है। इसरो के प्रमोचक राकेट कार्यक्रम कई केंद्रों में संपादित किय जाते हैं, जहां 5000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं ।  तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र प्रमोचक राकेटों के डिजाइन एवं विकास कार्य के लिए उत्‍तरदायी है। द्रव नोदन प्रणाली केंद्र तथा इसरो नोदन परिसर जो कि क्रमश: वलियमला तथा महेंद्रगिरी में स्थित हैं, इन प्रमोचक राकेटों के लिए नोदन तथा क्रायोजेनिक चरणों का विकास करते हैं।  सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, शार, भारत का अंतरिक्ष-पत्‍तन है तथा यह प्रमोचक राकेटों के समेकन के लिए उत्तरदायी है। दो प्रचालनरत लांच पैडों से युक्‍त  इस केंद्र से जी.एस.एल.वी. तथा पी.एस.एल.वी. अपनी उड़ान भरते हैं।

पीएसएलवी

ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन यान (पीएसएलवी) का विकास निम्‍न भू-कक्षा उपग्रहों को ध्रुवीय तथा सूर्य तुल्‍यकाली कक्षाओं में स्‍थापित करने के लिए विकसित किया गया है। इसने भू-तुल्‍यकाली, चंद्र तथा अंतरग्रहीय अंतरिक्ष यानों को लगातार सफलतापूर्वक प्रमोचित कर अपना सामर्थ्‍य सिद्ध किया है ।

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जीएसएलवी

भू तुल्‍यकाली उपग्रह प्रमोचन वाहन का विकास अपेक्षाकृत भारी इन्‍सैट वर्ग के भू तुल्‍यकाली उपग्रहों को कक्षा में प्रमोचित करने के लिए विकसित किया गया था। जीएसएलवी के अंतिम व तृतीय चरण में स्‍वदेश विकसित क्रायोजेनिक ऊपरी चरण का उपयोग किया जाता है ।

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परिज्ञापी (साउंडिंग) रॉकेट

इसरो द्वारा वायुमंडलीय तथा मौसमविज्ञानीय अध्‍ययनों के लिए रोहिणी श्रृंखला के छोटे रॉकेटों से उप-कक्षीय तथा वायुमंडलीय उड़ानें प्रमोचित की जाती हैं। एटीवी नामक इसरो के सब से भारी परिज्ञापी रॉकेट को सूक्ष्‍मगुरुत्‍व प्रयोगों व नई तकनीकों के लक्षण के उच्च स्तरीय प्रयोगों के लिए प्रयोग किया जा सकता है ।

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इसरो के धरोहर प्रमोचन यानों के बारे मे अधिक जानकारी के लिए एसएलवी तथा एएसएलवी पृष्ठों पर जाएं।