एस्ट्रोसैट के लिए मृदुल एक्स-किरण दूरबीन सहित प्रथम प्रकाश

केंद्र में एक शीतलित आवेश युक्‍मित युक्ति सहित दुगुने परिवर्तन वाले मृदुल एक्‍स-किरण संस्‍पर्शन आपतन दूरबीन (प्रकाशिकी और कैमरा सहित नीचे प्रदर्शित) को एस्‍ट्रोसैट में रख कर 28 सितंबर, 2015 को प्रमोचित किया गया।

 

                                                      

मृदुल एक्‍स-किरण दूरबीन (एस एक्‍स टी) का विधिवत आरेख दृश्‍य                                               एस एक्‍स टी का वास्‍तविक दृश्‍य

 

संयोजित एक्‍स-किरण प्रकाशिकी का अग्रांत दृश्‍य

केंद्रीय तल कैमरा संयोजन

निम्‍न विवरण के अनुसार एस एक्‍स टी को पूर्वनिर्धारित तरीके से जीवन प्रदान किया गया और यह बिल्‍कुल ठीक तरह से काम कर रहा है।

चूंकि प्रमोचन से 24 दिन पहले निर्मित दबाव को हटाया गया था, कैमरे से दाब का निकासन पहला कार्य था। यह सी सी डी के अंदर किसी प्रकार के संघनन से बचने हेतु बहुत महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि इसे पहले ही शीतलित अंगुलिका तक काफी ठंडा किया गया था, सूर्य से दूर वाले उपग्रह के एक पार्श्‍व पर विकिरक प्‍लेट के साथ ऊष्‍मन पाइप के माध्‍यम से जोडा़ जाता है। इसीलिए संसाधन वाली इलेक्‍ट्रानिकी को 30 सितंबर को चालू किया गया और एक उच्‍च आउटपुट पैराफिन (एच ओ पी) मोटर द्वारा प्रवर्तित एक वाल्‍व को खोल कर प्रथम उपलब्‍ध अवसर पर कैमरे से दाब का निकासन किया गया। 26 अक्‍तूबर तक प्रति दिन एक बार यह निकासन जारी रखा गया। कक्षा के विभिन्‍न हिस्‍सों में -420 सें. और -600 सें. की रेंज में शीतल अंगुलिका के तापमान में ~12 डिग्री का परिवर्तन पाया गया। सी सी डी का भी तापमान उतना ही था। इन तापमानों का मानीटरन किया गया और 9 अक्‍तूबर को निकासन की प्रक्रिया पूरी करके ताप-वैद्युत शीतलक (टी ई सी) और तापमान नियंत्रक परिपथ को चालू किया गया। इसके बाद -820 से के लगभग इस नियत बिंदु के आसपास केवल 20 सें. के परिवर्तन सहित तापमान को स्थिर किया गया। यह नियत बिंदु -800 सें. के निर्धारित मान से थोडी़ अधिक ठंडी है किंतु मिशन के दौरान जारी रहने वाली शीतल अंगुलिका के तापमान में भारी परिवर्तन के बावजूद सी सी डी पर अधिक स्थिर तापमान प्रदान करती है। दरअसल, थोडा़ और शीतल सी सी डी संपूर्ण मिशन के दौरान बहुत अच्‍छा निष्‍पादन सुनिश्‍चित करता है। आगामी दिनों में सी सी डी के प्रचालन की विविध विधाओं में आंकड़े लिए गए तथा आंतरिक अंशांकन स्रोतों से स्‍पेक्‍ट्रा प्राप्‍त किए गए और ये भूमि पर किए गए ताप-निर्वात परीक्षणों के दौरान प्राप्‍त मानों के साथ तालमेल रखते थे। इस प्रकार, केंद्रीय तल कैमरा आशानुरूप संतोषजनक रूप से कार्य करने वाला पाया गया और खगोलकी से संबंधित कार्य के लिए नए द्वार खोलने की प्रतीक्षा में तैयार सिद्ध हुआ।

 

सी सी डी के सम्‍मुख एक पतली (0.2 माइक्रॉन के एलुमिनियम विलेपन सहित 0.2 माइक्रॉन) प्रकाशिकी अवरोधी रेती की अखंडता की एल ई डी ऑन के साथ जांच की गई और यह सलामत पाई गई। यह परीक्षण 11 अक्‍तूबर को किया गया और निम्‍न (बाएं) प्रदर्शित परिणाम प्रमोचन पूर्व प्रेक्षण के समान हैं। 5 अंशांकन स्रोतों (कैमरे के दरवाजे के अंदर चार कोनों में तथा एक केंद्र में) क के एक एक्‍स-किरण प्रतिबिंब को भी नीचे (दायीं ओर) दर्शाया गया और यह बताता है कि एक्‍स-किरण का निष्‍पादन उत्‍कृष्‍ट है।

          

12 अक्‍तूबर, 2015 को लिए गए आंकड़ों के आधार पर पांच अंशांकन स्रोतों से प्राप्‍त ऊर्जा स्‍पेक्‍ट्रम को नीचे दर्शाया गया है :

     

प्रमोचन-पूर्व ताप-निर्वात परिणामों के आधार पर संभावित विभेदन पर सभी प्रमुख रेखाओं को स्‍पष्‍ट देखा जा सकता है। वर्तमान अनुक्रिया मॉडल तथा कुछ चिह्नित रेखाओं के साथ एक प्रारंभिक उपयुक्‍तता दिखाई गई है और प्रधान रेखाओं के साथ इस उपयुक्‍तता को उत्‍कृष्‍ट पाया गया है। कृपया नोट करें कि आंकड़े लॉग-लॉग पैमाने पर आलेखित किए जाते हैं जो कि निम्‍न ऊर्जा पर छोटे अंतरों को बढा़ता है तथा इसमें और अधिक सुधार किया जाएगा। एक्‍स-रे प्रकाशिकी के शीर्ष पर दूरबीन के द्वार को 15 अक्‍तूबर को खोला गया।

प्रकाशिकी को पकड़ कर रखने वाली दूरबीन की नली जैसी संरचना को इस प्रकार सभी गैसों का निकासन करने का अवसर प्रदान किया जो प्रमोचन से पूर्व दूरबीन की संरचना में अंदर निर्मित हुए होंगे (कैमरे का द्वार 26 अक्‍तूबर को खोला जाना था)। पूर्व की भांति (ऊपर चित्र देखें) तापमानों (प्रकाशिकी शीतल अंगुलिका, सी सी डी) को संतुलित बनाए रखा गया और सी सी डी को अभिनति मोड में रखा गया तथा आंकड़े एकत्रित किए गए। सभी सी सी डी की विशिष्‍टताएं : लाब्धि, रव स्‍तर इत्‍यादि पांच रेडियों सक्रिय (Fe55) स्रोतों का उपयोग करके अपरिवर्तित पाए गए तथा उनके आकार भी उत्‍कृष्‍ट थे।

कैमरे के द्वार का खोला जाना सबसे महत्‍वपूर्ण प्रचालन था। यह कैमरे के अंतिम निकासन के बाद निर्धारित किया गया ताकि यह सुनिश्‍चित किया जा सके कि कैमरे को खोलते समय अत्‍यंत पतले प्रकाशिकी अवरोधन फिल्‍टर में विभेदी दाब नही महसूस किया जाता है। कैमरे का द्वार 06:30 यू टी  पर 26 अक्‍तूबर को खोला गया। इस बीच PKS2155-304 बिंदु पर दूरबीन का सुनियोजित प्रचालन किया गया। यह बिंदु एक चमकीला ब्‍लाजार (एक अति‍दीप्‍त जेट सहित एक विशेष प्रकार का ताराकल्‍प है जहां लगभग दूरबीन की दिशा में अंकित लगभग प्रकाश की गति वाले त्‍वरित कणों का प्रवाह है) है जो कि लगभग 1.5 बिलियम प्रकाश वर्ष की दूरी पर है। हम इसी क्षण की प्रतीक्षा कर रहे थे। एक कक्षा के बाद जब हम PKS2155-304 के लिए पी सी मोड में चले गए तो हमें अपेक्षानुसार लगभग सी सी डी के केंद्र में स्रोत दिखाई दिया। एक प्रारंभिक विश्‍लेषण से प्राप्‍त परिणामों को नीचे चित्र में दिखाया गया है और हम सी सी डी पर PKS2155-304 प्राप्‍त एक्‍स–किरणों को देख कर उत्‍साहित हैं। इससे यह बात सिद्ध हुई कि एक्‍स-रे प्रकाशिकी ठीक तरह से कार्य कर रही है और मिशन से जुडे़ लोग स्रोत की ओर समुचित और अत्‍यंत स्थिर अभिलक्ष्‍यन करने में समर्थ रहे हैं। ~3 आर्कमिनट से सटीक केंद्रीय स्थिति से स्रोत का मामूली विचलन संभवत: आंतरिक संरेखन में एक अत्‍यंत छोटी त्रुटि के कारण हुआ, न कि अभिलक्ष्‍यन त्रुटि के कारण स्रोत शक्‍ति ने (0-12 टाइप की घटनाओं के लिए) निम्‍न अवस्‍था में स्थित स्रोत के अनुरूप <~0.1cps की पृष्‍ठभूमि सहित ~5cps व्‍युत्‍पन्‍न किए। प्रारंभिक विश्‍लेषण से यह भी पता चलता है कि psf  लगभग 2.5 आर्क मिनट (FWHM) है, जो कि आशा के अनुरूप ही है। प्रकाश वक्र और एक्‍स-रे स्‍पेक्‍ट्रा का अध्‍ययन किया जा रहा है। एक्‍स-रे प्रकाशिकी की विशेषता का और अधिक पता लगाने हेतु सी सी डी के विभिन्‍न ऑफसेट स्थितियों में 3 नवंबर तक स्रोत का लगातार प्रेक्षण किया जा रहा है। क्रॉस अंशांकन के लिए परिवर्तन सहित एक निकट-युगपतकालिक प्रेक्षण की भी योजना बनाई गई है। फिर एस एक्‍स टी प्रेक्षण प्रकाशिकी अवरोधन फिल्‍टर की दक्षता का मूल्‍यांकन करने के लिए एक्‍स-रे कृष्‍ण तारकों पर ध्‍यान केंद्रित करेगा। आगामी महीनों में एस एक्‍स टी की विशेषता का पूर्ण रूप से पता लगाने हेतु मार्च 2016 तक विभिन्‍न प्रकार के विविध अन्‍य स्रोतों के प्रेक्षण की योजना बनाई गई है।

द्वार खोलने के बाद दूसरा कार्य 2 मिनटों के लिए कैमरे के अंदर एल ई डी को जला कर पतले (0.2 माइक्रॉन) के प्रकाशिकी अवरोधन फिल्‍टर की अखंडता का तुरत जांच करना था। हालांकि यह प्रचालन जब किया गया चमकीली पृथ्‍वी एस एक्‍स टी  के दृश्‍य रेंज में थी जो कि एस एक्‍स टी कैमरे को चौंधिया रहा था और यद्यपि कुछ समय तो लगा किंतु शीघ्र दृश्‍य आंकड़ों में स्‍वस्‍थ फिल्‍टर की एक झलक पाने में हम कामयाब रहे। एस एक्‍स टी की चमकीली पृथ्‍वी के दृश्‍य के दौरान प्रकाश प्रत्‍येक पिक्‍सेल में घटनाएं भरता है और चूंकि सी सी डी के लिए बफर साइज सी सी डी में पिक्‍सलों की कुल संख्‍या का 10% है, भूमि पर प्रेषित ढा़ंचा अपूर्ण प्राप्‍त होता है। इसीलिए खगोलविज्ञानी प्रेक्षण करते समय एस एक्‍स टी प्रेक्षणों को चमकीली पृथ्‍वी के दृश्‍यन से बचना चाहिए। पृथ्‍वी द्वारा आच्‍छादित किए जानेवाले स्रोत की अवधि सहित इस अवधि का अभिप्राय है कि आकाशीय निर्देशांकों में ध्रुवीय क्षेत्रों की ओर अभिलक्ष्‍यन को छोड़ कर एस एक्‍स टी के साथ प्रेक्षण की दक्षता लगभग ~35% होगी। यह अपेक्षानुसार है।

निष्‍कर्षत:, एस एक्‍स टी संवेदनशीलता, अकाशीय और स्‍पेक्‍ट्रमी विभेदनों के मामले में विनिर्देशनों के अनुसार काम कर रहा है और इसने ब्रह्मांड में खगोलीय पिंडों के प्रेक्षण प्रारंभ कर दिए हैं।

[लिसेस्‍टर विश्‍वविद्यालय, यू के, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम, इसरो उपग्रह केंद्र, बेंगलुरु, अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, अहमदाबाद के सहयोग से टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्‍थान, मुंबई के नेतृत्‍व में एक संघ द्वारा एस एक्‍स टी का निर्माण किया गया। पुणे, मुंबई और बेंगलुरु के अनेक उद्योगों ने नीतभार के निर्माण में भागीदारी की]