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लोक सूचना : सावधान : नौकरी पाने के इच्छुक उम्मीदवार

वर्तमान ई-प्रापण साइट का नई वेबसाइट में रूपांतरण करना प्रस्तावित है। सभी पंजीकृत/नये विक्रेताओं से नई वेबसाइट https://eproc.isro.gov.in का अवलोकन करने तथा इसरो केंद्रों के साथ भाग लेने के लिए अपने प्रत्यय-पत्र का वैधीकरण करने का अनुरोध किया जाता है।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष परिवहन नीति – 2020 का मसौदा

कक्षा में मंगल कक्षित्र मिशन के एक वर्ष पूरा होने पर; मंगल एटलस का विमोचन

मंगल कक्षित्र अंतरिक्षयान ने लाल ग्रह के आसपास अपने जीवन का एक वर्ष पूरा किया है। मंगल ग्रह के आसपास मिशन जीवन का एक वर्ष सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद, अब मोम के सभी पांच पेलोड्स द्वारा बृहत डेटा सेट प्राप्त किया गया है। इस अवसर पर अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, (इसरो), अहमदाबाद ने मार्स एटलस प्रकाशित किया है, जिसमें मंगल रंगीन कैमरा (एमसीसी) द्वारा प्राप्त किए प्रतिबिंबो का संकलन किया है और अन्य पेलोड परिणामों से प्राप्त परिणाम भी वैज्ञानिक एटलास में शामिल हैं।

श्री ए एस किरण कुमार, अध्यक्ष, इसरो (मध्य में), डॉ. वाई वी एन कृष्णमूर्ति, वैज्ञानिक सचिव इसरो (बाएं) के साथ मंगल एटलस जारी किया; डॉ. अण्णादुराई एम, निदेशक इसरो उपग्रह केंद्र, श्री तपन मिश्रा, निदेशक अंतरिक्ष उपयोग केंद्र,  श्री देवप्रसाद कार्णिक, जनसंपर्क इकाई के निदेशक, इसरो।

एमसीसी के प्रतिबिंबो ने मंगल पर अलग-अलग स्थानिक विभेदनों के बारे में अद्वितीय जानकारी प्रदान की है। इसने मार्स ग्लोबल डेटा में बादल को दिखाया है, वायुमंडल में धूल और सतह के अल्बेडो विविधताएं प्राप्त की हैं, इसे लगभग 72000 किमी में एपोपप्सिस से प्राप्त किया गया था। दूसरी ओर पेरियाप्सिस से प्राप्त उच्च विभेदन प्रतिबिंब मंगल की सतह पर विभिन्न आकारिकी विशेषताओं का विवरण दिखाते हैं। इनमें से कुछ चित्र इस एटलस में दिखाए गए हैं। प्रतिबिंबों को मंगल ग्रह की सतह और वायुमंडलीय प्रक्रियाओं के आधार पर वर्गीकृत किया गया है।

मंगल पृथ्वी की सबसे नज़दीकी आकाशीय वस्तुओं में से एक है और अनादि समय से मनुष्य को स्वयं के प्रति आकर्षित किया है। 1960 के दशक के शुरूआती दौर से मंगल ग्रह तक पहुंचने के लिए मानव रहित कक्षित्र, लैंडर्स और रोवर्स की बड़ी संख्या में प्रमोचन किया गया है। इन मिशनों ने मंगल ग्रह के विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं पर बड़ी मात्रा में डेटा प्रदान किया था। इन आंकड़ों के विश्लेषण के द्वारा प्राप्त ज्ञान, जीवन की उपस्थिति की बढ़ती संभावना को सूचित करता है, अब ग्रह पर सूखा और धूल है। भारत मंगल ग्रह के लिए पहले ग्रहीय मिशन, मार्स कक्षित्र मिशन या मोम के रूप में प्रख्यात को भेजकर अंतरिक्ष यात्रा करने वाले देशों के क्लब में शामिल हो गया है। मोम अंतरिक्ष यान का डिजाइन, निर्माण दो वर्षों से कम समय की रिकॉर्ड अवधि में पूरा किया गया था। मोम के पांच पेलोड वैज्ञानिक उपकरण सतह भूविज्ञान, आकृति विज्ञान, वायुमंडलीय प्रक्रियाओं, सतह का तापमान और वायुमंडलीय प्रक्रिया पर आंकड़े इकट्ठा करेंगे ।