स्थणलाकृति मानचित्रण कैमरा (टी.एम.सी.) एवं अतिस्पेडक्ट्रगमी प्रतिबिंबित्र (एच.वाई.एस.आई.) नीतभारों से चंद्रयान-1 आंकड़ा का प्रयोग करने हेतु अवसर की घोषणा (ए.ओ.)

चंद्रयान-1 टी.एम.सी. एवं एच.वाई.एस.आई. आंकड़ा उपयोग (सी.एच.1-ए.ओ.)

अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (सैक), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), अंतरिक्ष विभाग (अं.वि.), भारत सरकार स्‍थलाकृति मानचित्रण कैमरा (टी.एम.सी.) एवं अतिस्‍पेक्‍ट्रमी प्रतिबिंबित्र (एच.वाई.एस.आई.) उपकरणों से चंद्रयान-1 विज्ञान आंकड़ा के उपयोग द्वारा वैज्ञानिक अनुसंधान करने हेतु ‘’अवसर की घोषणा’’ घोषित करता है।

चंद्रयान-1 22 अक्‍तूबर, 2008 को प्रमोचित प्रथम भारतीय चंद्रमिशन है जिसे चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों की प्रकाशभूविज्ञान, रसायनिक एवं खनिज विज्ञान संबंधी मानचित्रण, अवयवीय बहुलता, विकिरण पर्यावरण एवं अन्‍वेषण के संबंध में चंद्रमा की सतह का अध्‍ययन करने हेतु डिजाइन किया गया है। उपग्रह पर 11 नीतभार लगाए गए हैं जिन्‍हें विशिष्‍ट वैज्ञानिक उद्देश्‍यों की पूर्ति हेतु चुना गया था।

चंद्रयान-1 पर स्‍वदेशी नीतभार चंद्रमा की सतह पर पूर्वनिर्धारित स्‍थान पर संघट्ट हेतु टी.एम.सी. (5 मी. विभेदन एवं 20 कि.मी. प्रमार्ज के साथ), एच.वाई.एस.आई. (15 नैनो मीटर के स्‍पेक्‍ट्रमी विभेदन एवं ~20 कि.मी. के प्रमार्ज के साथ 80 मी. का स्‍थानिक विभेदन), चंद्र लेजर रेंजिंग उपकरण (एल.एल.आर.आई.) एवं उच्‍च ऊर्जा एक्‍स-किरण स्‍पेक्‍ट्रोमीटर (एच.ई.एक्‍स.) एवं चंद्रमा संघट्ट प्रोब (एम.आई.पी.) आदि थे।

चंद्रयान-1 पर उपकरणों द्वारा मुहैया कराए गए आंकड़ों को चंद्रमा की उत्‍पत्ति के प्रारंभिक इतिहास को समझने हेतु सुदूर रूप से संवेदित आंकड़ों की चंद्र विज्ञान एवं अनुप्रयोगों से संबंधित प्रश्‍नों का हल ढ़ूंढ़ने के लिए विशेष रूप से प्रयोग किया था। गत सात वर्षों के दौरान, चंद्र भूविज्ञान के नए पहलुओं के महत्‍वपूर्ण योगदान चंद्रयान-1 उपकरणों द्वारा मुहैया कराए गए आंकड़ों का प्रयोग करते हुए हल करता रहा है। भारतीय अनुसंधानकर्ताओं द्वारा शुरू किए गए कई चंद्र विज्ञान अध्‍ययन, विशेषकर आकृति-विज्ञान सतह का काल निर्धारण एवं चंद्र सतह का संगठन, चुंबकत्‍व  की संभावित मौजूदगी के अध्‍ययनों के साथ-साथ चंद्रमा पर मैग्‍मा तथा बाह्य (एक्‍सोजेनिक) जल की संभावित उपस्थिति के अध्‍ययनों ने चंद्रमा की उत्‍पत्ति प्रक्रियाओं के बारे में संवर्धित विचारशील दृष्टिकोण मुहैया कराया है।

सैक से प्रतिबिंबन नीतभारों से आंकड़े अर्थात टी.एम.सी. एवं एच.वाई.एस.आई. मुख्‍यत:, चंद्रमा पर खनिज विज्ञानीय एवं क्रिस्‍टल उत्‍पत्ति प्रक्रियाओं को समझने के प्रति संगठनीय एवं प्रकाश भू विज्ञान हेतु विभिन्‍न अनुसंधान विषयों पर विचार करने के लिए बनाए गए हैं। टी.एम.सी. ने सार्ववर्णी मोड में चंद्र सतह का मानचित्रण किया और चंद्र सहत की स्‍थलाकृति मुहैया कराई जो कि आकृति-विज्ञान एवं आकृति-मितीय अध्‍ययनों हेतु लाभदायक है। एच.वाई.एस.आई. ने बृहत खनिजविज्ञानीय/अश्‍म-विज्ञानीय सूचना के अन्‍वेषण हेतु 0.42-0.96 माइक्रो मी. स्‍पेक्‍ट्रमी रेंज (64 स्‍पेक्‍ट्रमी बैण्‍ड) में चंद्र सतह का मानचित्रण किया।

चंद्रयान-1 मिशन से टी.एम.सी. एवं एच.वाई.एस.आई. आंकड़ासेट भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान आंकड़ा केंद्र (आई.एस.एस.डी.सी.) की वेबसाइट (http://www.issdc.gov.in ) पर उपलब्‍ध है।

यह ए.ओ. संगठनीय एवं भू आकृतिविज्ञानीय मानचित्रण, सतह काल निर्धारण आदि जैसी बड़ी श्रेणियों में टी.एम.सी. से एच.वाई.एस.आई. नीतभारों से आंकड़े के उपयोग की दिशा में अनुसंधान प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करने हेतु वैज्ञानिक समुदाय हेतु खुला हुआ है (ज्‍यादा जानकारी हेतु अनुभाग 5.0 देखें)। टी.एम.सी. एवं एच.वाई.एस.आई. के आंकड़ा रिक्‍त क्षेत्रों में अन्‍य अंतरराष्‍ट्रीय मिशनों जैसे कगुया, चंद्र आवीक्षीय कक्षित्र (अल.आर.ओ.) के साथ चंद्रयान-1 नीतभार आंकड़ों के समेकित अध्‍ययन भी किए जा सकते हैं।

यह ध्‍यान रखा जाए कि इस ए.ओ. के माध्‍यम से चुनिंदा परियोजना प्रस्‍ताव से, जो कि भारत भर से है, अनुसंधान छात्रों, संगणक सुविधा, आकस्मिकताओं के वेतन एवं परियोजना की बैठक एवं कार्यशालाओं में भाग लेने के प्रति सीमित वित्‍तीय सहायता मुहैया कराएगा। परियोजना अवधि तीन वर्षों की अवधि हेतु होगा। इसलिए, परियोजना छात्र या तो पहले वर्ष में (अधिमान्‍यत:) या द्वितीय वर्ष के दौरान नियुक्‍त किए जाने चाहिए। यह वांछित है कि पी.आई. में सुदूर संवेदन आंकड़ा विश्‍लेषण (संगणक सुविधा) संबंधित सॉफ्टवेयर होते हैं। सैक, आवश्‍यकता पड़ने पर संगणक (सॉफ्टवेयर) सुवधिाओं पर सहायता प्रदान कर सकता है।

 

प्रस्‍ताव कौन प्रस्‍तुत कर सकता है?

प्रस्‍ताव, मान्‍यता प्राप्‍त संस्‍थानों, विश्‍वविद्यालयों, ताराघरों एवं भारत के सरकारी संगठनों से संबंधित वैज्ञानिकों एवं आकादमियों के व्‍यक्तियों या समूह द्वारा प्रस्‍तुत किए जा सकते हैं। अधिवर्षिता प्राप्ति के पूर्व कम-से-कम चार वर्षों की शेष सेवा वाले व्‍यक्ति ही पी.आई./सह-पी.आई. के रूप में परियोजना का नेतृत्‍व करने हेतु अर्ह हैं। प्रस्‍ताव, इस ए.ओ. कार्यक्रम के तहत परियोजनाएं पूरी करने हेतु आवश्‍यक सुविधाएं प्रदान करने हेतु उपयुक्‍त आश्‍वासन के साथ संस्‍थान के प्रमुख के माध्‍यम से अग्रेषित किया जाना चाहिए।