चंद्रयान - 1

चंद्रमा के लिए भारतीय वैज्ञानिक मिशन के तहत 1999 में भारतीय विज्ञान अकादमी की बैठक में इस पर विचार शुरू किया गया इसके अनुक्रम में 2000 में भारत के एस्ट्रोनॉटिकल सोसायटी में विचार विमर्श किया गया । इस फोरम के विद्वान सदस्यों द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा राष्ट्रीय चंद्र मिशन टास्क फोर्स गठित किया गया था। अग्रणी भारतीय वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकीविदों के टास्क फोर्स ने चंद्रमा के लिए भारतीय मिशन की व्यवहार्यता पर चर्चाएं की एवं आकलन प्रदान किया और साथ ही इस तरह के मिशन के संभावित विन्यास पर ध्यान केंद्रित किया ।

विस्तृत विचार विमर्श के बाद, यह सर्वसम्मति से सिफारिश की गई थी कि भारत को विशेष रूप से चंद्रमा मिशन के साथ नए सिरे से अंतरराष्ट्रीय हित के विचार में, कई रोमांचक नई सहस्राब्दी के लिए योजना बनाकर चंद्रमा के लिए मिशन का कार्य करना चाहिए। इसके अलावा, इससे देश में बुनियादी विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान करने के लिए और इस तरह के मिशन से इसरो को नई चुनौतियों से भू-स्थिर कक्षा से परे जाने के लिए बल मिलेगा । इसके अलावा, इस तरह की परियोजना से मौलिक अनुसंधान के क्षेत्र में युवा प्रतिभाओं को लाने में मदद मिलेगी। शिक्षा क्षेत्र को भी ऐसी परियोजना से बौद्धिक रूप से भागीदारी के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

इसके बाद, भारत सरकार ने नवंबर 2003 में पहली बार भारतीय मून मिशन के लिए इसरो के प्रस्ताव, चंद्रयान -1 को मंजूरी दे दी।

चंद्रयान -1 मिशन ने चंद्रमा के दृश्य क्षेत्र का सुदूर संवेदन से उच्च विभेदन, निकट अवरक्त (NIR), निम्न ऊर्जा एक्स-रे और उच्च ऊर्जा एक्स-रे क्षेत्रों में प्रदर्शन किया। चंद्रमा के दोनों ओर पास और दूर का एक त्री आयामी एटलस (उच्च स्थानिक और ऊंचाई विभेदन के साथ) तैयार करना अन्य उद्देश्यों में से एक था। इसका उद्देश्य  खनिज और रासायनिक तत्वों के वितरण के लिए पूरे चंद्रमा की सतह के रासायनिक और खनिज का मानचित्रण जैसे मैग्नीशियम, एल्यूमीनियम, सिलिकॉन, कैल्शियम, लोहा और टाइटेनियम और उच्च परमाणु संख्या तत्वों के साथ रेडॉन, यूरेनियम और थोरियम का उच्च स्थानिक विभेदन आयोजन करना है ।

विभिन्न मिशन योजना और प्रबंधन के उद्देश्यों को प्राप्त किया गया। मिशन के लक्ष्य के रूप में विज्ञान पेलोड, चंद्र यान और प्रमोचन यान, उपयुक्त भू समर्थन प्रणाली के साथ डीप स्पेस नेटवर्क (DSN) स्टेशन का निर्माण किया गया, जो भविष्य के अन्वेषणों के लिए जैसे मंगल कक्षित्र मिशन के लिए मददगार थे । वैज्ञानिकों द्वारा वैज्ञानिक उपयोग के लिए मिशन के लक्ष्य जैसे अंतरिक्ष यान का समाकलन और परीक्षण, प्रमोचन और लगभग 100 किमी की चंद्र ध्रुवीय कक्षा को प्राप्त करना और कक्षीय प्रचालन प्रयोग, संचार/दूरादेश, दूरादेश डाटा का अभिग्रहण, त्वरित दृश्य डेटा और अभिलेखीय को प्राप्त किए गए ।

प्रमोचन यान

चंद्रयान का प्रमोचन अक्तूबर 22, 2008 को पीएसएलवी सी-11 के ऑनबोर्ड से किया गया , जो इसरो के पीएसएलवी का एक्सएल रूपांतर है , दुनिया में एक विशवसनीय प्रमोचक है । पीएसएलवी का बाद में 2013 में मंगल कक्षित्र यान के प्रमोचन के लिए उपयोग किया गया ।

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अंतरिक्ष यान

चंद्रयान अंतरिक्षयान  1.5मी. का आयाताकार  है  और आईआरएस उपग्रह श्रंखला में प्रयोग किए I-1-K बस के आधार पर बनाया गया है । इसने चंद्र इमपैक्ट प्रोब को वहन किया, जो नवंबर 14, 2009 को चंद्र पर उतरा था ।

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Ground Segment

चंद्रयान प्रमोचन से पहले, भारतीय गहन अंतरिक्ष नेटवर्क (IDSN) का विकास किया गया था । जोकि मिशन की आवश्यकता है । बयलालू में स्थित आईएसडीएन में 32 मी एवं 18मी. के एंटेना लगाए गए हैं ।

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Findings

चंद्रयान के 11 पेलोड द्वारा प्रदत्त डेटा वैज्ञानिक समुदाय को चंद्र और उसके वायुमंडल के अध्ययन के लिए और चंद्र के बारे में हमारी जानकारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ।

चंद्रयान- 1 : परिणाम