पी.एस.एल.वी. ऊपरी चरण इंजन (पी.एस.4) को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में दुबारा प्रारंभ किया गया

इसरो के ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचक राकेट (पी.एस.एल.वी.-सी34) ने हाल ही में 22 जून, 2016 को केवल एक ही मिशन में 20 उपग्रहों के प्रमोचन के साथ लगातार अपनी 35वीं सफल उड़ान को पूरा किया। इस मिशन की एक और महत्‍वपूर्ण उपलब्धि थी इसके ऊपरी चरण द्रव इंजनों (पी.एस.4) का सफलतापूर्वक दुबारा प्रारंभ। इसने बहु कक्षाओं में उपग्रहों के अंत:क्षेपण में सहायता के लिए भावी पी.एस.एल.वी. मिशनों हेतु ऊपरी चरण प्रणालियों का प्रदर्शन तथा वैधीकरण किया।

पी.एस.एल.वी., इसरो का विश्‍वसनीय प्रमोचक राकेट है और यह प्रयोक्‍ता की आवश्‍यकता अनुसार उपग्रहों को विभिन्‍न प्रकार की कक्षाओं जैसे सूर्य भूतुल्‍यकाली ध्रुवीय कक्षा (एस.एस.पी.ओ.), निम्‍न भू कक्षा (एल.ई.ओ.) तथा भूस्थिर अंत‍रण कक्षा (जी.टी.ओ.) में प्रमोचित करने हेतु सक्षम है। अत्‍यधिक मूल्‍यवान रूप से तैयार किए गए पी.एस.एल.वी. में ऊपरी चरण (पी.एस.4) संरूपण में लचीलापन है जिससे विभिन्‍न श्रेणीके उपग्रहों के लागत प्रभावी प्रमोचन में सहायता मिलती है। अब तक, पी.एस.एल.वी. द्वारा विभिन्‍न कक्षाओं में 113 उपग्रह स्‍थापित किए जा चुके हैं, जिसमें 74 विदेशी उपग्रहों के अलावा भारत के सुदूर संवेदन तथा संचार उपग्रह, प्रथम चंद्र मिशन चंद्रयान-1, मंगल कक्षित्र मिशन (एम.ओ.एम.) अंतरिक्षयान, भारतीय प्रादेशिक नौवहन उपग्रह समूह (नाविक) शामिल है।

आज, उपग्रह प्रौद्योगिकियों तथा बड़े स्‍तर के लघु रूपांतरण में उन्‍नति के कारण पहले के बड़े उपग्रहों की कार्यशीलता वाले लघु उपग्रहों के निर्माण में सहायता मिली है। लघु उपग्रह प्रमोचक सेवा के ग्राहकों के लिए अधिक लागत के कारण समर्पित प्रमोचक राकेटों को नियोजित करना एक मितव्‍यता का विकल्‍प नहीं है। अत: यह आवश्‍यक है कि प्रमोचन लागत को कम करने तथा समय को बचाने हेतु एकल प्रमोचक राकेट द्वारा बहु उपग्रहों का एक साथ प्रमोचन किया जाए। यह प्रचलन राकेट नीतभार क्षमता के प्रभावशाली उपयोग के लिए विभिन्‍न कक्षाओं में अनेक उपग्रहों को ले जाने हेतु चुनौतीपूर्ण होगा इसरो का पी.एस.एल.वी. अल्‍पतम राकेट बदलावों सहित इस प्रकार की मांगों को पूरा करने हेतु एक अद्वितीय प्रमोचक राकेट है।

विभिन्‍न कक्षाएं प्राप्‍त करने के उद्देश्‍य से पृथक नोदन माड्यूल या ऊपरी चरण पुन:प्रारंभ संवर्धित करने वाले दो वि‍भिन्‍न विकल्‍प मौजूद हैं। पी.एस.एल.वी. ने दो पुन:प्रारंभों के बीच बड़े तटानुगमन के साथ द्वितीय विकल्‍प दुबारा पुन:प्रारंभ पी.एस.4 इंजन का चयन किया है। यद्यपि, इसरो के पास द्रव अपभू मोटर (एल.ए.एम.) इंजन का विभिन्‍न पुन:प्रारंभ संवर्धित करते हुए दीर्घावधि उपग्रह मशिनों में पर्याप्‍त अनुभव था, दीर्घावधि प्रमोचनयान मिशन का हाल के पी.एस.एल.वी.-सी34 मिशन के दौरान प्रयास किया गया था।

पी.एस.4 चरण में युग्‍म द्रव इंजनों द्वारा शक्ति प्रदान की गई है जिसमें पुन:प्रारंभ के दौरान समग्र नियंत्रणीयता हेतु सीमा के तहत क्रांतिक पैरामीटरों की देखभाल की आवश्‍यकता होती है। इन प्रतिबंधों एवं कक्षा में दो बड़े आकार वाले बिंदुओं पर दो पुन:प्रारंभों के बीच लगभग 7600 सेकेंड की दीर्घ मिशन अवधि को ध्‍यान में रखते हुए समग्र मिशन योजना एवं प्रबंधन, नियंत्रण आवश्‍यकताओं का संवर्धन, विभिन्‍न कक्षाओं में यान का युक्तिसंचालन एवं नियंत्रण, नोदन प्रणालियों का पुन:सुधार एवं सूक्ष्‍म-गुरूत्‍व परिस्थितियों के तहत नोदक प्रबंधन।  

 पी.एस.एल.वी. का द्रव ऊपरी चरण पी.एस.एल.वी. ऊपरी चरण इंजन

                   पी.एस.एल.वी. का द्रव ऊपरी चरण                                            पी.एस.एल.वी. ऊपरी चरण इंजन

 

आगामी मिशनों के लिए आत्‍मविश्‍वास के स्‍तर को बढ़ाने के उद्देश्‍य हेतु, पी.एस.एल.वी.-सी29 मिशन में; मिशन के मुख्‍य उद्देश्‍य की प्राप्ति के उपरांत, उपलब्‍ध नोदन का उपयोग करते हुए पहली बार पी.एस.4 इंजन का परीक्षणात्‍मक पुन:प्रारंभ किया गया। पी.एस.एल.वी.-सी.29 की सफलता के आधार पर, पी.एस.4 इंजन के एक पूर्ण अनुपूरक पुन:प्रारंभ जो कि आगामी मिशन में प्रकार्यात्‍मक आवश्‍यकता के समान है, की हाल के पी.एस.एल.वी.-सी34 मिशन में उपलब्धि की गई। तापीय एवं पावर प्रबंधन के वैधीकरण करते हुए उत्‍तरी व दक्षिणी ध्रुव के बहुत निकट दो बार इंजन पुन:प्रारंभ किए गए।

पी.एस.4 के पुन:प्रारंभ के साथ निम्‍नलिखित प्राचलों का वैधीकरण किया गया

  • कक्षा परिवर्तन युक्तिचालनों हेतु मिशन आयोजना एवं समग्र मार्गदर्शी एल्‍गोरिथ्‍म
  • पुनरुपयोग हेतु ऊपरी चरण इंजन एवं चरण प्रणाली का पुनरानुकूलन
  • तरल परिपथ, नियंत्रक घटक, प्रवर्तक तथा ऑनबोर्ड वैमानिकी प्रणाली सहित समग्र तापीय प्रबंधन
  • ऑनबोर्ड इलेक्‍ट्रॉनिकी हेतु अतिरिक्‍त ऊर्जा की आवश्‍यकता
  • बेहतर कक्षीय प्राचलों के लिए सिरामिक सर्वो त्‍वरणमापी

दोनों बार पुन:प्रारंभ करने पर पी.एस.4 कक्ष का दाब अनुमान के अनुसार था और पहली बार किए गए पुन:प्रारंभ के साथ मेल खाता था। ऊपरी चरण को दो भिन्‍न-भिन्‍न कक्षाओं में युक्तिचालित करने हेतु आवश्‍यक समग्र नियंत्रण, नौवहन एवं मार्गदर्शन का प्रदर्शन किया गया। इस प्रकार, पी.एस.एल.वी.-सी34 सभी आवश्‍यकताओं को सफलतापूर्वक पूरा कर सका जो कि पी.एस.4 इंजन के दो प्रकार्यात्‍मक पुन:प्रारंभों के मुख्‍य मिशन के कार्यान्‍वयन हेतु संपूर्ण आत्‍मविश्‍वास देता है।