नई दिल्ली में आयोजित एशिया प्रशांत सुदूर संवेदन संगोष्ठी

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने भू-विज्ञान मंत्रालय (एम.ओ.ई.एस.) तथा एस.पी.आई.ई. (अंतर्राष्‍ट्रीय प्रकाशिकी और फोटोनिक्‍स संगोष्‍ठी संस्‍था) के साथ नई दिल्‍ली में 4-7 अप्रैल, 2016 को एशिया प्रशांत सुदूर संवेदन पर 10वीं संगोष्‍ठी (ए.पी.आर.एस.-2016) का आयोजन किया। भारतीय सुदूर संवेदन सोसाईटी (आई.एस.आर.एस.), जो कि 4000 से भी अधिक वैज्ञानिकों/अनुसंधानकर्ताओं वाली व्‍यवसायिक संस्‍था है, ने इस संगोष्‍ठी की मेज़बानी की। श्री चार्ल्‍स एफ. बोल्‍डेन, राष्‍ट्रीय वैमानिकी तथा अंतरिक्ष प्रशासन (एन.ए.एस.ए.) के प्रशासक, श्री जीन येविस ली गॉल, फ्रांस राष्‍ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी (सी.एन.ई.एस.) के अध्‍यक्ष, श्री शी़जुओ यामामोटो, उपाध्‍यक्ष, जापान वांतरिक्ष अन्‍वेषण एजेंसी (जे.ए.एक्‍स.ए.); श्री यान हुआ वू, चीन राष्‍ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन(सी.एन.एस.ए.) के उप-प्रशासक; डॉ. एलेन राटीयर, मौसम विज्ञानी उपग्रहों के प्रयोग हेतु यूरोपीय संगठन (ई.यू.एम.ई.टी.एस.ए.टी.) के महा निदेशक; श्री फ्रांसिस्‍को ज़ेवियर मैनडीटा, मैक्सिकन अंतरिक्ष एजेंसी (ए.ई.एम.) तथा श्री किरण कुमार, अध्‍यक्ष, इसरो जैसे कई अंतरिक्ष एजेंसी के प्रधानों ने विशेष सत्र के दौरान अंतरिक्ष प्रेक्षणों में आगामी कार्यक्रमों तथा अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग पर अपने विचार प्रकट किए। इस प्रतिष्ठित संगोष्‍ठी में 300 राष्‍ट्रीय प्रतिभागियों और 15 राष्‍ट्रों से 130 अंतर्राष्‍ट्रीय प्रतिभागियों ने भाग लिया।

ए.पी.आर.एस. संगोष्‍ठी में आपदा की गंभीरता को कम करने हेतु सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोगों तथा वैश्‍विक जलवायु बदलाव के बेहतर मानीटरन पर ध्‍यान केंद्रित किया गया। इस संगोष्‍ठी का मुख्‍य उद्देश्‍य मौसम तथा जलवायु हेतु अंतरिक्ष आधारित प्रेक्षणों की ओर नई पहलों तथा सहयोगी अंतर्राष्‍ट्रीय प्रयासों को सुदृढ़ करना है। संगोष्‍ठी के दौरान आयोजित चर्चाओं का लक्ष्‍य मानवता की बेहतरी हेतु अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के लाभों के साधनों की खोज के लिए अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच बेहतर समन्‍वयन में सहायता प्रदान करना था।  

संगोष्‍ठी से पहले, भारतीय सुदूर संवेदन संस्‍थान, भू-विज्ञान मंत्रालय, एन.ए.एस.ए. गॉडडार्ड अंतरिक्ष उड़ान केंद्र तथा एन.ए.एस.ए. लैंगले अनुसंधान केंद्र द्वारा 2-3 अप्रैल, 2016 के दौरान ‘सुदूर संवेदन एवं भू-सूचना में प्रचलन तथा चुनौतियां’, ‘उपग्रह मौसम विज्ञान तथा आँकड़ा समावेश’, ‘सुदूर संवेदन प्रकाशिकी संवेदक अंशांकन तथा चित्रीकरण’ तथा ‘भविष्‍य के जलवायु प्रेक्षण प्रणाली का डिजाइन’ जैसे विषयों पर पूर्व-संगोष्‍ठी दो-दिवसीय अनुशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

संगोष्‍ठी के प्रथम दिन ‘अंतरिक्ष प्रेक्षणों में बढ़ते कदम - अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग हेतु दूरदृष्टि’ जैसे विषय पर विशेष सत्र रखा गया, जिसमें कई अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रधानों ने विशिष्‍ट वक्‍ताओं के रूप में अपना वक्‍तव्‍य दिया तथा तत्‍पश्‍चात ‘अंतरिक्ष, पृथ्‍वी और मानवता’ विषय पर पैनल चर्चा भी हुई। ‘अंतरिक्ष आधारित भू-प्रेक्षणो एवं अनुप्रयोगों पर दिशानिर्देश’  विषय पर एक अन्‍य सत्र अपराह्न में रखा गया, जिसमें भारत तथा विदेश के विशिष्‍ट वक्‍ताओं ने अपना वक्‍तव्‍य दिया। उन्‍होंने अंतरिक्ष प्रोद्योगिकियों की मदद से जलवायु बदलाव के प्रभावों के अध्‍ययन की संभावनाओं पर चर्चा की।

संगोष्‍ठी के सात समानांतर सम्‍मेलनो में 80 तकनीकी सत्र तथा ’10 पोस्‍टर सत्र शामिल थे। संगोष्‍ठी में वायुमंडलीय बादलों तथा भू सतह की सीमा और क्रायोस्‍फीयर समुद्र तथा अंतर्देशीय जल के लिए सुदूर संवेदन, पर्यावरणीय मानीटरन हेतु लीडार, अतिस्‍पैक्‍ट्रमी और अल्‍ट्रास्‍पैक्‍ट्रमी प्रौद्योगिकी, तकनीकों तथा अनुप्रयोगों भूप्रेक्षण मिशनों तथा संवेदकों, वायुमंडल समुद्र तथा अन्‍योन्‍यक्रिया आदि का माडलिंग जैसे क्षेत्रों में 800 से भी अधिक प्रस्‍तुतियां दी गईं। प्रतिभागियों ने सुदूर संवेदन, नवीनतम विकास तथा अनुप्रयोगों, अत्‍याधुनिक प्रौद्योगिकियों, अनुसंधान विचार तथा अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग से संबंधित विभिन्‍न पहलुओं पर अपने वैज्ञानिक कार्यों का प्रदर्शन किया।

अंतरिक्ष एजेंसियों तथा आंतरिक उद्योगों की गतिविधियों के विस्‍तार को प्रदर्शित करने वाली इस अंतर्राष्‍ट्रीय प्रर्दशनी का उद्घाटन डॉ. जितेंद्र सिंह, राज्‍य मंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय, द्वारा किया गया। उद्घाटन के पश्‍चात माननीय मंत्रीजी ने सभी अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रधानों के साथ चर्चा की।

इसके संबद्ध कार्यक्रम के रूप में, इसरो तथा सी.एन.ई.एस. ने 3 अप्रैल, 2016 (रविवार) को एक कार्यक्रम आयोजित किया, जिसके दौरान सभी अंतरिक्ष एजेंसी के प्रधानों ने ‘’अंतरिक्ष तथा जलवायु: किस प्रकार अंतरिक्ष  एजेंसियां सी.ओ.पी.-21 करार के कार्यान्‍वयन तथा अनुपालन पर अपना योगदान देंगी’’ विषय पर अपने विचार प्रकट किए।  एजेंसी प्रधान तथा ए.ई.एम., सी.एन.ई.एस., सी.एन.एस.ए., सी.टी.आर.एस. (सुदूर संवेदन के लिए मोरोक्‍को का शाही केंद्र), ई.यू.एम.ई.टी.एस.ए.टी., ई.एस.ए. (यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी), इसरो, जे.ए.एक्‍स.ए. और नासा से आए प्रतिनिधियों से इस कार्यक्रम में भाग लिया।  उन्‍होंने जलवायु बदलाव अध्‍ययनों तथा सी.ओ.पी.-21 परिणामों के मानीटरन हेतु अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी उपकरणों तथा अनुप्रयोगों को प्रयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। एजेंसी प्रधानों ने पेरिस में सी.ओ.पी.-21 में अंतरिक्ष क्षेत्र द्वारा दर्शाई गई अपनी प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए घोषणापत्र के सिद्धांतों पर अनुमोदन प्रदान किया।

 

इस घोषणा पत्र में स्‍वस्‍थाने मापनों तथा बढ़ाए गए कंप्‍यूटिंग संसाधनों को मिलाते हुए अंतरिक्ष आधारित प्रचलनात्‍मक उपकरणों को विकसित करने के बारे में उल्‍लेख है।  इस ओर, अंतरिक्ष एजेंसियों के लिए अंतरिक्ष में उड़ाए जाने वाली नई प्रौद्योगिकियों को विकसित करने अथवा अपने अनुसंधान समुदाय को नए माडलों सहित सक्रिय रूप से योगदान देने की आवश्‍यकता है। इस पर सफलता अंतर्राष्‍ट्रीय रूप से स्‍वीकार्य आंकड़ा पर आधारित, विश्‍व के सभी राष्‍ट्रों के उत्‍सर्जनों के आंकलन हेतु अंतर्राष्‍ट्रीय, स्‍वतंत्र प्रणाली को ग्रहण करने हेतु अपने उपकरणों के पुन: अंशांकन तथा अपने मापनों के पुन: वैधीकरण में सहयोग पर निर्भर है, ताकि आगे के त्रुटियों के लिए समान स्‍तर क्षेत्र तथा एक स्‍वतंत्र आधार को निर्मित किया जा सके। इस घोषणा पत्र के माध्‍यम से, विश्‍व की अंतरिक्ष एजेंसियां इन मामलों में आगे बढ़ने के लिए वैश्विक कार्यढ़ांचे की स्‍थापना करने हेतु प्रतिबद्ध हो रहे हैं। यह घोषणापत्र अप्रैल, 2016 में भू-प्रेक्षण प्रणाली समिति (सी.ई.ओ.एस.) द्वारा पृष्‍ठांकित होने के बाद, वर्तमान और भविष्‍य की पीढि़यों के अंतरिक्षयानों की सहायता के लिए व्‍यापक वैश्विक जलवायु आँकड़ा प्रणाली को स्‍थापित करने हेतु मार्ग प्रशस्‍त करेगा।