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अंतरिक्ष विभाग
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन

लोक सूचना : सावधान : नौकरी पाने के इच्छुक उम्मीदवार

यू.आर.राव उपग्रह केंद्र (यू.आर.एस.सी), अं‍तरिक्ष विभाग, इसरो, बेंगलूरु में प्रतिनियुक्ति के आधार पर वेतन मैट्रिक्‍स (7वां केंद्रीय वेतन आयोग) के स्‍तर 14 में नियंत्रक के पद की भर्ती (आवेदन की अंतिम तिथि है: 15/11/2021)
चंद्रयान-2 विज्ञान आंकड़ा उपयोगीता के लिए अवसर की घोषणा। प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 31 अक्तूबर 2021 है।
वर्तमान ई-प्रापण साइट का नई वेबसाइट में रूपांतरण करना प्रस्तावित है। सभी पंजीकृत/नये विक्रेताओं से नई वेबसाइट https://eproc.isro.in का अवलोकन करने तथा इसरो केंद्रों के साथ भाग लेने के लिए अपने प्रत्यय-पत्र का वैधीकरण करने का अनुरोध किया जाता है।

दूर शिक्षण

एडुसैट भारत का पहला विषयक उपग्रह था जिसे केवल शिक्षण सेवाओं के लिए समर्पित किया गया। इसे विविध प्रकार की अन्‍योक्रिय शैक्षणिक प्रणालियों यथा, इकतरफा टीवी प्रसारण वीडियो सम्‍मेलन, कंप्‍यूटर सम्‍मेलन, वैब आधारित शिक्षण आदि में व्‍यापक रूप से प्रयुक्‍त किया गया था। एडुसैट के कई उद्देश्‍य थे और इसे पाठ्यचर्या आधारित शिक्षण में, शिक्षकों को प्रभावी प्रशिक्षण देने में, अच्‍छे जानकार लोगों का साथ व नई प्रौद्योगिकियां उपलब्‍ध कराने के लिए प्रयोग किया गया था और अंतत: इस प्रकार भारत के कोने-कोने में शिक्षा का प्रसार करना था। एडुसैट द्वारा न केवल स्‍कूलों, कॉलेजों, उच्‍च शिक्षण संस्थानों के मध्‍य संबंध स्‍थापित करने बल्कि अनौपचारिक शिक्षण व विकास संबंधी संवाद में भी मदद मिली।

एडुसैट कार्यक्रम तीन चरणों यथा, प्रयोगिक, अर्ध कार्यकारी तथा कार्यकारी चरण में चलाया गया था। प्रयोगिक चरण सन् 2004 के दौरान 300 टर्मिनलों की मदद से कर्नाटक, महाराष्‍ट्र व मध्‍य प्रदेश में चलाया गया था। प्रयोगिक चरण में प्राप्‍त अनुभवों को अर्ध कार्यकारी व कार्यकारी चरणों में लागू किया गया। अर्ध कार्यकारी चरण के दौरान लगभग सभी राज्‍यों व प्रमुख राष्‍ट्रीय एजेन्सियों को एडूसैट कार्यक्रम में शामिल किया गया। कार्यकारी चरण के तहत संबंधित राज्‍य सरकारों/प्रयोक्‍ता एजेंसियों से प्राप्‍त निधियों द्वारा नेटवर्कों का विस्‍तार किया गया। 

एडुसैट कार्यक्रम के अंतर्गत क्रियान्वित नेटवर्कों में दो प्रकार के टर्मिनल नामत:, उपग्रह अन्‍योन्‍यक्रिया टर्मिनल अथवा सैटेलाइट इंटरैक्‍टिव टर्मिनल (एसआईटी) तथा मात्र ग्राही टर्मिनल अर्था‍त रिसीव ओनली टीर्मिनल (आरओटी) शामिल थे। दिसंबर 2012 में कुल 83 नेटवर्क क्रियान्वित हो चुके थे जिनके द्वारा देश में 26 राज्‍यों तथा 3 केन्‍द्र शासित प्रदेशों के लगभग 56,165 विद्यालयों व कॉलेजों को (4943 एसआईटी तथा 5122 को आरओटी द्वारा) संपर्क सुविधा उपलब्‍ध कराई जा चुकी थी। उत्‍तर प्रदेश में दूर शिक्षण नेटवर्क स्‍थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। एडुसैट कार्यक्रम से देश में प्रति वर्ष लगभग 15 मिलयिन विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।

इसरो द्वारा स्‍थापित दूर शिक्षण नेटवर्कों  में प्रयोक्‍ताओं की विशेष आवश्‍यकताओं के वास्‍ते तैयार नेटवर्क भी शामिल है। जैसे कि:-

  • गुजरात का ब्‍लाइंड पीपल्‍स एसोसियेशन (वीपीए) - दृष्टिहीनों के लिए
  • भारतीय पुर्नवास परिषद अर्थात रिहेब्लिटेशन कौंसिल ऑफ इंडिया (आरसीआई)
  • कर्नाटक स्थित केन्‍द्रीय मंदबुद्धिता संस्‍थान अर्थात सेन्‍ट्रल इन्‍सटिट्यूट ऑफ मेंटली रिटार्टेड (सीआईएमआर)
  • केरल स्थित सी-डेक फॉर मेंटली चेलेंज्ड

एडुसैट (जी सैट-3) ने सितंबर 2010 तक इसरो की दूर शिक्षण, दूर चिकित्‍सा तथा ग्राम संसाधन केन्‍द्र (वीआरसी) परियोजनाओं में सहायता के लिए अपनी सेवाएं प्रदान की। इसके कार्यकाल की समाप्ति पर दूर शिक्षण नेटवर्कों का काम इसरो के अन्‍य उपग्रहों को अंतरित कर दिया गया। कू-बैंड पर काम कर रहे अधिकतर दूर शिक्षण नेटवर्कों को जीसैट-3 से इन्‍सैट-4सीआर तथा विस्‍तृत सी-बैंड नेटवर्कों को इन्‍सैट-3ए, इन्‍सैट-3सी तथा जीसैट-12 पर अन्‍तरित कर दिया गया। कुछ बचे हुए नेटवर्कों को अन्‍तरित करने का काम जारी है।

उत्‍तर पूर्वी क्षेत्र में विभिन्‍न राज्‍य नेटवर्क के समस्‍त सुदूर स्थानों, हबों व शिक्षण छोरों को अबाधित तकनीकी सहायता उपलब्‍ध करने के लिए गुवाहाटी, असम में तकनीकी सहायता व प्रशिक्षण केन्‍द्र की स्‍थापना की गई है। देश के उत्‍तरी क्षेत्र नामत:, उत्‍तराखंड तथा जम्‍मू व काश्‍मीर में इसी प्रकार के तकनीकी सहायता व प्रशिक्षण केन्‍द्र बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। एडुसेट नेटवर्क पर कू-बेंड व विस्‍तृत सी-बैंड में प्रसारित कार्यक्रमों की गुणवत्‍ता के आकलन तथा उपयोग पर प्रतिक्रियाओं को जानने के लिए डेकू, अहमदाबाद में स्‍थापित नेटवर्क मानीटरन सुविधा का उपयोग किया जा रहा है।

उत्‍तर पूर्वी राज्‍यों में लगाए दूर शिक्षण नेटवर्कों को विशेष प्रोत्‍साहन सहायता के रूप में इसरो द्वारा वार्षिक अनुरक्षण तथा हब संचालन में मदद दी जा रही है।

इन नेटवर्कों के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से शिलांग स्थित उत्‍तर पूर्वी अंतरिक्ष उपयोग केन्‍द्र (एनई-सैक) में उत्‍तर पूर्वी एडुसेट नेटवर्कों के प्रयोक्‍ताओं की संपर्क गोष्‍ठी का आयोजन किया गया।

राष्‍ट्रीय व राज्‍य स्‍तर की विभिन्‍न प्रयोक्‍ता एजेंसियों को निरंतर संचालन व अनुरक्षण संबंधी तकनीकी परामर्श/मार्गदर्शन उपलब्‍ध कराया जा रहा है। राजस्‍थान एडुसैट नेटवर्क को जीएसएम तकनीक पर आधारित नेटवर्क स्‍थापित करने में मदद दी जा रही है।