टर्ल्स से क्रमानुसार 100वें परिज्ञापी रॉकेट आरएच -200 का सफलतापूर्वक प्रमोचन

देश में अंतरिक्ष की गतिविधियों ने 1960 के दशक के शुरूआती दिनों में भू-चुंबकीय भूमध्य रेखा के ऊपर ऊपरी वायुमंडल और आयनमंडल की वैज्ञानिक खोज के साथ शुरू किया था जो तिरुवनंतपुरम के पास थुम्बा से गुजरता है, जिनमें छोटे रॉकेट का उपयोग किया जाता है। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी), तिरुवनंतपुरम वैज्ञानिक अध्ययनों के लिए परिज्ञापी रॉकेट प्रक्षेपण के लिए अग्रणी रहा है। थुंबा का इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन (टर्ल्स) से परिज्ञापी रॉकेटो को बड़ी संख्या में विकसित और लॉन्च किया जाता है। इसरो ने रोहिणी श्रृंखला नामक रॉकेट की श्रृंखला विकसित की है, जिनमें महत्वपूर्ण आरएच-200, आरएच-300 और आरएच-560 हैं, नाम के सामने संख्या मिमी में रॉकेट का व्यास है।

टर्ल्स से क्रमानुसार 100वें परिज्ञापी रॉकेट आरएच -200 का सफलतापूर्वक प्रमोचन

अभी तक आरएच-200 रॉकेट के 1545 प्रमोचन किए गए हैं। बुधवार, 15 जुलाई, 2015 भारत के परिज्ञापी रॉकेट कार्यक्रम के इतिहास में प्रतिष्ठित और यादगार दिन बन गया, क्योंकि टर्ल्स से आरएच-200 रॉकेट का 100वां क्रमवार सफल प्रक्षेपण किया गया था। इसमें गुणवत्ता और विश्वसनीयता के उच्च स्तर का प्रदर्शन किया है, जिसमें इस छोटे रॉकेट को बनाया गया है।

रॉकेट 200 मिमी व्यास और लंबाई 3590 मिमी, वजन 108 किलोग्राम है और इसमें 12 किलोग्राम चेफ पेलोड होता है। पेलोड को 70 किमी की ऊंचाई पर उत्प्रेक्षित किया जाता है और 70 किमी से 20 किमी तक पवन और पवन वेग से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त की जाएगी। गुब्बारा और सतह एमईटी सेंसर जमीन की सतह तक डेटा प्रदान करेगा।

आरएच-200 के उड़ान के दौरान, गहन पर्यावरण शीर्ष का सामना करता है और नई प्रौद्योगिकियों का आकलन करने के लिए आदर्श मंच है, उससे विपरित पर्यावरण में भेजकर उड़ान योग्यता का परीक्षण किया जाता है । कई प्रौद्योगिकीयां जैसे पायरोतकनीकी प्रारंभन के लिए सुपर कैपेसिटर का उपयोग, माइक्रो केंद्रीकृत कोडक, घन अवस्था स्विचों के साथ अनुक्रमित्र के बदले बहुमूल्य इलेक्ट्रोमैकेनिकल रिले, प्रोग्रामीय डीसी-डीसी कनवर्टर, कोणीय दर संवेदक आधारित एमईएमएस (माइक्रो इलेक्ट्रो मैकेनिकल सिस्टम), आदि का आरएच-200 रॉकेटो में उड़ान योग्यता तथा उत्तरजीविता के लिए परीक्षण किया गया है। परिज्ञापी रॉकेट का विकास और लॉन्च इसरो-पीएसएलवी, जीएसएलवी और जीएसएलवी एमके-।।। जैसे प्रमुख प्रक्षेपण वाहनों के लिए प्रस्तावना रहा।

आरएच-200 रॉकेट का इस्तेमाल करते हुए कई महत्वपूर्ण अभियान किए जा रहे हैं । सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम मॉनएक्स (मानसून प्रयोग) था जिसके तहत हजारों रॉकेट लॉन्च किए गए थे। अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला द्वारा इक्वेटोरियल वेव स्टडीज (ईडब्ल्यूएस) में एसडीएससी शार से आरएच-200 रॉकेट के 51 लॉन्च किए गए थे। एक अन्य प्रमुख कार्यक्रम एसपीएल द्वारा MIDAS (गतिकी मध्य वायुमंडल) था, जिसमें टर्ल्स रेंज से इस रॉकेट के 180 लॉन्च किए गए थे।

थुंबा में रॉकेट जनित प्रयोगों और चेफ पेलोड का उपयोग करके कुछ अध्ययनों के उद्देश्य निम्न हैं:

  • मध्य वायुमंडलीय मौसमी पवन दोलन और भारतीय गर्मियों में मानसून के साथ इसका संबंध
  • लंबी अवधि, मध्यम अवधि और लघु अवधि के भूमध्य रेखा तरंग मोड की विशेषताएं और प्रचार
  • पृष्ठभूमि पर लंबी अवधि के तरंगों के प्रभाव का औसत प्रवाह, गुरुत्वाकर्षण तरंग-ज्वार-ग्रहों की तरंग अन्योन्यक्रिया और उनके प्रभाव
  • थुम्बा के मध्य वायुमंडलीय जलवायु विज्ञान
  • समतापमंडलीय-क्षोभमंडलीय बदलाव प्रक्रिया में मानसून परिसंचरण का प्रभाव
  • मॉनसून की शुरुआत, बल और वापसी पर मध्य वायुमंडलीय परिसंचरणों का प्रभाव
  • वायुमंडलीय दोलनों के अक्षांश-रेखांश परिवर्तनशीलता (बाह्य एजेंसियों के साथ अन्योन्यक्रिया के माध्यम से) के वैश्विक विश्लेषण
  • गहरे उष्णकटिबंधीय संवहन के संबंध में और क्षोभमंडलीय कम दबाव प्रणाली के चरणों के दौरान मध्य वायुमंडलीय विभिन्नता
  • ध्रुवीय अचानक क्षोभमंडलीय वार्मिंग के दौरान मध्य वायुमंडलीय विभिन्नता
  • दक्षिणी दोलन/एल नीनो और भूमध्य रेखा के मध्य वातावरण के बीच संभावित दूर-संबंध
  • क्षोभमंडलीय/समतापमंडलीय जेट धाराओं द्वारा गुरुत्वाकर्षण तरंगों का जनन
  • रॉकेट सक्रिय बिजली कार्यक्रम
  • विभिन्न वायुमंडलीय दोलनों की अंतर-वार्षिक परिवर्तनशीलता
  • रॉकेट लॉन्च की प्रगतिशील स्थानांतरण द्वारा ज्वार पर दैनंदिन और अर्ध-दैनंदिन ज्वार व्युत्पत्ति, अर्ध-द्विवार्षिक दोलन (QBO) और समतापमंडलीय अर्धवार्षिक दोलन (एसएओ) का प्रभाव
  • मध्य वायुमंडलीय आंकड़ों की जांच के लिए पेलोड डिजाइन और विकास
  • एयरोस्पेस मौसम संबंधी मांगों के लिए पवन घटक वितरण की सांख्यिकीय संरचना- पुनःप्रवेश/ विखंडन विश्लेषण
  • मध्य वायुमंडलीय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
  • मध्यवर्ती वायुमंडलीय गतिशीलता में उष्णकटिबंधीय-समताप मंडल के मामूली घटकों जैसे ओजोन और जल वाष्प की मौसमी परिवर्तनशीलता पर गतिकी प्रभाव

वीएसएससी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हजारों आगंतुकों ने आरएच-200 के इस ऐतिहासिक प्रमोचन को देखा । निदेशक, वीएसएससी ने वैज्ञानिक अध्ययनों के लिए रॉकेट उड़ान की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।