जीएसएलवी-एमके-III की पहली विकासात्मक उड़ान

पहले सफल विकासात्मक उड़ान जीएसएलवी एमके - III डी 1 का जीसैट -19, उन्नत उपग्रह को वहन करने के साथ-साथ भारत ने 4 टन श्रेणी के उपग्रह को भूतुल्यकाली स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में प्रमोचन करने में आत्मनिर्भरता हासिल की है।

पीएसएलवी और जीएसएलवी जैसे परिचालन प्रमोचन वाहनों के वर्तमान बेड़े के साथ, भारत जीटीओ के लिए 2.2 टन तक संचार उपग्रहों को प्रमोचन करने की आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है। जीएसएलवी एमके-।।। के उड़ान के साथ, पेलोड क्षमता दोगुनी हो गई है जो संचार उपग्रहों को प्रमोचन करने की राष्ट्रीय आवश्यकता को पूरा करेगा।

जीएसएलवी-एमके-III की पहली विकासात्मक उड़ानजीएसएलवी एमके- III तीन चरण वाला वाहन है जिसे जीटीओ में भारी संचार उपग्रह ले जाने की आवश्यकता को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। 43.498 मीटर की कुल ऊंचाई और 4 मीटर की कोर व्यास के साथ वाहन का द्रव्यमान 640 टन है। वाहन पर दो ठोस स्ट्रैप-ऑन मोटर्स - एस200, एक कोर द्रव बूस्टर चरण -एल110, और एक क्रायोजेनिक ऊपरी चरण -सी25 है। भारी पेलोड को समायोजित करने के लिए, 5 मीटर व्यास का ओगिव पेलोड फेअरिंग  है।

एस200 स्ट्रैपऑन मोटर 3.2 मीटर व्यास का ठोस मोटर है। यह 3 मोटर सेगमेंट से बना है और इसमें फ्लेक्स नोजल कंट्रोल सिस्टम है। उड़ान में मोटर्स पर दो एस200 स्ट्रैप के बीच अंतर प्रणोद के गतिरोध को कम करने के लिए, मोटर सेंगमेंट ढलाई के दौरान दो मोटर्स को जोड़ी के रूप में संसाधित किया जाता है। एल110 द्रव चरण, दो क्लस्टर वाले विकास इंजनों से काम करता है जो पीएसएलवी और जीएसएलवी में उपयोग किए जा रहे हैं। इसमें 110 टन प्रणोदक भरा जाता है और प्रत्येक जुड़वां इंजन 80 टन प्रणोद जनित करता है। जीएसएलवी एमके-।।। वाहन के ऊपरी चरण क्रायोजेनिक में 28 टन प्रणोदक भरा जाता है और जिसे सी25 के रूप में जाना जाता है। सी25 चरण गैस जनरेटर (जीजी) चक्र पर काम कर रहे 20 टन प्रणोद(नाममात्र) इंजन के साथ संचालित है। सी25 चरण उच्च निष्पादन क्रायो चरण है जिसमें 20के पर संग्रहित द्रव हाइड्रोजन और 77के पर संग्रहीत द्रव ऑक्सीजन प्रणोदक का संयोजन होता है । सी25 इंजन और चरण को 200 परीक्षणों की श्रृंखला के माध्यम से विकसित और मान्य किया गया था, जिसमें चरणबद्ध माध्यम से घटक स्तर की परीक्षा योग्यता परीक्षण की प्रक्रिया शामिल थी, 800से. की अवधि के लिए इंजन स्तर का परीक्षण और चरण स्तर परीक्षण उड़ान समय के बराबर 640से. के लिए किया गया था । जीएसएलवी के क्रायोजेनिक ऊपरी स्टेज (सीयूएस) के विपरीत, जो रूसी इंजन डिजाइन पर आधारित था, सी25 संरचना, डिजाइन, विकास और योग्यता रणनीतियों को पूरी तरह से स्वदेशी विकसित किया गया है। समाकलित सी25 इंजन और चरण का पूरा परीक्षण कार्यक्रम फास्ट ट्रैक मोड में किया गया था और सीमित संख्या में हार्डवेयर और परीक्षणों के इष्टतम अनुक्रमण का उपयोग करके दो साल की अल्पावधि में पूरा किया गया। जून 5, 2017 में जीएसएलवी एमके-।।। की पहली उड़ान के दौरान वाहन ने ऑनबोर्ड जीसैट -19 जैसे 3,136 किलो वजनी उपग्रह को, 170किमी व 36,000 किलोमीटर की लक्षित जीटीओ में पहुंचा दिया।

दोनों एस200 मोटर्स के साथ-साथ प्रज्वलन के द्वारा प्रमोचन पैड से वाहन का उत्थापन हुआ। एल-110 के कोर चरण प्रज्वलन के एस200 प्रणोद चरण के दौरान 112.66से. पर ही वाहन के प्रणोद को बढ़ाने के लिए उत्थापन किया गया था और उत्थापन से 140.84 सेकेंड में दो ठोस स्टैप-ऑन के अलग होने के बाद भी वाहन कार्यरत रहा। लगभग 206से. प्रज्वलन के बाद, एल110 चरण पृथक हो गया और सी25 क्रायोजेनिक चरण का प्रज्वलन शुरू हो गया। सी25 चरण का प्रज्वलन लगभग 625से. की अवधि के लिए संचालित होता है और  आवश्यक कक्षीय स्थिति प्राप्त होने पर, क्रायोजेनिक चरण इंजन को बंद कर दिया गया। तब जीसैट-19 उपग्रह को जीटीओ में अंतक्षेपित किया गया था। उड़ान के दौरान दो युग्मित एस200 मोटर्स का प्रदर्शन भी अपेक्षानुसार था और मोटर्स के बीच का अंतर एकसमान था। एल110 ने वास्तव में पूर्वानुमान के अनुसार कार्य किया और जुड़वां क्लस्टर विकास इंजन के प्रदर्शन भी समान थे। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि भले ही जीएसएलवी एमके-।।। डी1 एस200 और एल110 के साथ द्वितीय फ्लाइट है, नए विकसित सी25 चरण की यह पहली उड़ान थी। इस प्रथम उड़ान में सी25 चरण का प्रदर्शन अनुमानानुसार था, जो कि इसरो की क्षमता को अग्रिम रूप से उड़ान प्रदर्शन के अनुमान को स्थापित करता है।

जीएसएलवी एमके-।।। (एलवीएम 3-एक्स) की प्रयोगात्मक उड़ान एस200 और एल110 चरणों के साथ 18 दिसंबर, 2014 को किया गया था, जिसमें उड़ान के वायुमंडलीय नियम और जीएसएलवी एमके-।।। में अनूठी विशेषताओं को प्रदर्शित किया गया था, जिसमें अन्य प्रमोचन वाहनों की तुलना में दो एस200 ठोस स्ट्रैपऑन के बीच अंतर प्रणोद भी शामिल है ।

एलवीएम 3-X मिशन के फ्लाईट डेटा विश्लेषण के आधार पर, उपयुक्त सुधार जीएसएलवी एमके-।।। वाहन विन्यास में शामिल किए गए हैं, मुख्यतः वायुगतिकीय आकार, जिसमें ओगीव आकार का पेलोड फेयरिंग, एस 200 के लिए स्लैंटेड नासिका कोण, एरो आकार का कौउलिंग व आवरण और सी25 चरण के लिए इंटर-टैंक बंद संरचना । इससे बेहतर वायुगतिकीय मार्जिन के साथ वाहन की मजबूती में सुधार करने में मदद मिली है और समग्र ध्वनिक स्तरों में कमी आई है। उड़ान के दौरान गतिशील दबाव को कम करने के लिए एस200 मोटर हेड एंड सेगमेंट विन्यास में संशोधन किया गया था। ये सभी परिवर्तन भू परीक्षण के साथ-साथ विस्तृत लक्षण वर्णन के योग्य थे और उन्हें जीएसएलवी एमके-।।। डी1 वाहन में शामिल किया गया था।

पहले विकास उड़ान की सफलता के बाद, इसरो अब दूसरी विकास उड़ान - जीएसएलवी एमके-।।। डी2 के साथ संवर्धित पेलोड क्षमता के लिए तैयार हो रहा है ताकि जीएसएलवी एमके-।।। के पहले परिचालन उड़ान में जीटीओ में लगभग 4000 किलो पेलोड को साथ ले जाएगा। उपरोक्त क्षमताओं को प्राप्त करने के लिए रणनीतियों/तकनीकों की पहचान की गई है और इसरो उड़ान में कार्यान्वयन से पहले इन प्रौद्योगिकियों को पूरा करने के लिए काम कर रहा है।

5 जून, 2017 को जीएसएलवी एमके III की पहली सफलतापूर्वक उड़ान दुर्लभ उपलब्धि है।