एस्ट्रोासैट प्रथम प्रकाश: कर्क नीहारिका की ओर देखता सी.जेड.टी. प्रतिबिंबित्र

एस्ट्रोंसैट, भारत के प्रथम बहु-तरंगदैर्घ्यै अंतरिक्ष वेधशाला को 28 सितंबर, 2015 को 650 कि.मी. की कक्षा में इसरो के विश्व सनीय प्रमोचक राकेट पी.एस.एल.वी. द्वारा सफलतापूर्वक प्रमोचित किया गया। उसके बाद प्रत्ये,क नीतभार को प्रचालित करने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। सबसे पहले आवेश कण मानीटर (सी.पी.एम.) प्रचालित किया गया जिसके बाद कैड्मियम जिंक टेलुराइड प्रतिबिंबित्र (सी.जेड.टी.आई.) किया गया जो एस्ट्रोईसैट पर रखा कठोर-एक्सत-किरण संसूचक है। सी.जेड.टी.आई. 5 अक्तूीबर, 2015 को पूर्ण प्रचालनीय किया गया, उसके बाद अक्तूटबर 6 को चीनी खगोलशस्त्रियों द्वारा वर्ष 1054 में खोजे गए अधिनवतारा (सुपरनोवा) के अवशेष, कर्क नीहारिका की ओर एस्ट्रोुसैट को अभिमुख किया गया। कर्क नीहारिका जिसमें कर्क स्पंोदक भी निहित है, आकाश में सबसे कठोर एक्सु-किरण संसूचकों के अंशांकन के लिए उपयोग में लाया जाता है। सी.जेड.टी.आई. संसूचक

सी.जेड.टी.आई. संसूचक

सी.जेड.टी.आई. में प्रत्‍येक 16 पिक्‍सल के संसूचकों के चार चतुर्थांश शामिल हैं जो 976 सें.मी.2 के कुल ज्‍यामि‍तीय क्षेत्र को व्‍याप्‍त करते हैं। यह 10 keV ऊर्जा से अधिक के एक्‍स-किरणों के प्रति संवेदनशील है। उसके द्वारा संसूचित प्रत्‍येक फोटोन के लिए सी.जेड.टी.आई. अवस्थिति (पिक्‍सल संख्‍या, प्रत्‍येक पिक्‍सल -2.5 मि.मी. x 2.5 मि.मी.) संसूचन का समय (20 माइक्रो सेकेंड) तथा आपतित फोटोन की शक्ति का विवरण देते हुए एक रिपोर्ट भेजता है। 

सी.जेड.टी. संसूचक माड्यूल; संपूर्ण रूप से समाहारित नीतभार; समाहारित संसूचक चतुर्थांश

चित्र 1: सी.जेड.टी. संसूचक माड्यूल; संपूर्ण रूप से समाहारित नीतभार; समाहारित संसूचक चतुर्थांश

 

सी.जेड.टी.आई. के शीर्ष कोडित्र द्वारक मास्‍क से आवृत्‍त है जो एक टैंटालम प्‍लेट है जिसमें सावधानीपूर्वक छिद्र किए गए हैं – जो रोशनी पड़ने पर संसूचक पर छाया डालते हैं। रिकार्ड की छाया के चित्राम की व्‍याख्‍या से प्रतिबिंबन किया जाता है। यह मास्‍क आपति‍त एक्‍स-किरण का लगभग आधा हिस्‍सा ब्‍लॉक कर देता है, जिससे सी.जेड.टी.आई. का प्रभावी क्षेत्र लगभग 490 सें.मी.2 होता है।

 

इसकी प्रत्‍याशित पृष्‍ठभूमि दर प्रति चतुर्थांश प्रति सेकेंड लगभग 250 है; परंतु, इसकी प्रेक्षित गिनती इससे चार गुना अधिक बढ़ जाती है। यह पाया गया है कि ऐसा ब्रह्मांडीय किरणों की अन्‍योन्‍यक्रिया के दौरान रिकार्ड की गई कई घटनाओं के कारण होता है। प्रत्‍येक 100 माइक्रो-सेकेंड में लिए गए चित्रों का एक चलचित्र (http://astrosat.iucaa.in/czti/images/CZTI_Crab_5s.mpg) बनाया गया जो अंतरिक्ष में उच्‍च ऊर्जा वाली अन्‍योन्‍यक्रियाओं के आकर्षक केलीडोस्‍कोपिक चित्र दर्शाता है: 100 माइक्रो-सेकेंड की द्रुत दर से देखा जाए तो 98% अवधि में कोई घटना नहीं होती (चल चित्र बनाते समय खाली चित्र निकाल दिए गए हैं), कुछ एकल घटनाएं हैं जो यथार्थ एक्‍स-किरण दर्शाती हैं, कुछ कॉम्‍टन विकीर्णन के कारण समीप के पिक्‍सल में द्वय घटनाएं दर्शाते हैं और कई बहु कण आवेशित घटनाएं हैं। ऐसा पहली बार है कि कण अनुवर्तक के रूप में कार्य करते कठोर एक्‍स-किरण उपकरण को अंतरिक्ष में भेजा गया है। इसके एक अनुवर्तन को चित्र 2 में दर्शाया गया है और यह संभाव्‍यत: आवेश कण अन्‍योन्‍यक्रिया को दर्शाता है। 

100 माइक्रो-सेकेंड विंडो में सी.जेड.टी.-प्रतिबिंबित्र के चतुर्थांश द्वारा संसूचित ‘घटनाओं ’ के स्‍थान का स्‍नैपशॅट (चित्र)। प्रत्‍येक बिंदु संसूचक के 2.5मि.मी. x 2.5मि.मी. पिक्‍सल में अवक्षेपित आवेशों को दर्शाते हैं। ऊर्ध्‍व रेखाएँ 4सें.मी. x 4सें.मी. आकार के संसूचक माड्यूलों (16  x 16 पिक्‍सल) को अलग करती हैं। अधिक संभव है कि यह पथ आवेश कण अन्‍योन्‍यक्रिया का परिणाम है।

चित्र 2: 100 माइक्रो-सेकेंड विंडो में सी.जेड.टी.-प्रतिबिंबित्र के चतुर्थांश द्वारा संसूचित ‘घटनाओं ’ के स्‍थान का स्‍नैपशॅट (चित्र)। प्रत्‍येक बिंदु संसूचक के 2.5मि.मी. x 2.5मि.मी. पिक्‍सल में अवक्षेपित आवेशों को दर्शाते हैं। ऊर्ध्‍व रेखाएँ 4सें.मी. x 4सें.मी. आकार के संसूचक माड्यूलों (16  x 16 पिक्‍सल) को अलग करती हैं। अधिक संभव है कि यह पथ आवेश कण अन्‍योन्‍यक्रिया का परिणाम है। 

इस आधार पर कि यथार्थ एक्‍स-किरण घटना अलग एकल घटना होगी, द्रुत विश्‍लेषण सॉफ्टवेयर को प्रचालनात्‍मक बनाया गया ताकि आँकड़ों की काट-छाँट कर कर्क-नीहारिका से आने वाली वास्‍तविक एक्‍स-किरणों का पता लगाया जा सके।

कर्क नीहारिका का प्रप्रथम दृश्‍य

भू सहायक सॉफ्टवेयर की कई स्‍तरों पर समीक्षा की गई और उपग्रह की प्रथम कक्षा के तुरंत बाद कर्क प्रेक्षण के दौरान आँकड़ों को गहण करने के लिए यह तैयार था। दुर्भाग्‍यवश, इन सॉफ्टवेयरों की साधारण भू आँकड़ों का उपयोग कर जाँच की गई और ये अत्‍यधिक मात्रा में ऑनबोर्ड आँकड़ों के हस्‍तन के लिए सज्जित नहीं थे। अत:, उपग्रह की अवस्थिति, इत्‍यादि जैसी गहराई में जाए बिना पहली बार में केवल प्रथम कक्षा में कर्क आँकड़ों का ही प्रेक्षण करना था।

प्रथम कक्षा प्रतिबिंब ने द्रुत प्रेक्षण में दर्शाया कि कर्क नीहारिका का पता नहीं चल पाया।

जबकि, कर्क सर्वाधिक कठोर एक्‍स-किरण स्रोत है, जो बहुत छोटे कठोर एक्‍स-किरण संसूचक द्वारा भी दृष्‍टव्‍य होता है।

संभवत:, आँकड़े की काट-छांट गलत हुई। समय के फलन के रूप में कुल एक्‍स-किरण की गणना देखी गई: ये एस्‍ट्रोसैट की कक्षा में स्थिर होनी चाहिए और जब कभी कर्क पृथ्‍वी के पृष्‍ठ भाग में जाती है, जब तथाकथित पृथ्‍वी उपगूहन होता है, ये कम होनी चाहिए। गिनती स्थिर थी, परंतु, सम्‍पूर्ण कक्षा में गिनती दर में कोई घटत या बढ़त नहीं देखी गई।

इसके बाद, स्‍व-परीक्षण का तनाव रहा। इस विचित्र व्‍यवहार को स्‍पष्‍ट करने के प्रश्‍न-पर सवाल खड़े हुए।

प्रमोचन के बाद क्‍या एक्‍स-किरण संसूचक के लक्षणों में परिवर्तन हुआ? परंतु आँकड़ा संभाव्‍यता के विपरीत थे। बहु अनुवर्तनों ने दर्शाया कि ये यथार्थ घटनाएं हैं और स्‍पैक्‍ट्रम के सावधानीपूर्वक किए गए प्रेक्षण से पता चला कि संरक्षित टैंटालम द्वारा उत्‍सर्जित एक्‍स-किरण रेखाओं के लक्षण सही रूप से प्रत्‍याशित ऊर्जा को आवृत्‍त करते हैं।

क्‍या उपग्रह का अभिविन्‍यास करते समय मिशन प्रचालन दल से कोई चूक हुई? जब कि, सी.जेड.टी. –प्रतिबिंबित्र के दृश्‍यन का क्षेत्र व्‍यापक है और यह तर्क बहुत घटिया होगा कि इतनी बड़ी गलती हुई।

विज्ञान है, कोई चमत्‍कार नहीं इसके कारण इस व्‍यवहार का कोई स्‍पष्‍टीकरण करना होगा और इसकी तह तक पहुँचने का एकमात्र रास्‍ता था अपने पास उपलब्‍ध आँकड़े का व्‍यवस्थित ढ़ंग से विश्‍लेषण करें।

कर्क नीहारिका का प्रग्रहण

09 अक्‍तूबर, 2015 को कर्क नीहारिका की खोज की गई थी जिसे मिशन प्रचालन केंद्र, पीण्‍या, बेंगलूरु और नीतभार प्रचालन केंद्र, आई.यू.सी.ए.ए., पुणे द्वारा समांतर रूप से देखा गया।

प्रथम परिक्रमा के दौरान, इस कर्क नीहारिका का पता लगाने में कठिनाई हो रही थी क्‍योंकि उपग्रह दक्षिण अटलांटिक विसंगत (एस.ए.ए.) क्षेत्र से गुजरा जब कर्क दृश्‍य क्षेत्र में था। एस.ए.ए. बचाव क्षेत्र उपकरणों की रक्षा हेतु जान-बूझकर पूरी तरह खोल कर रखा गया था और संसूचक एस्‍ट्रोसैट प्रचालन के प्रारंभिक दिनों के दौरान इस अंत‍राल में बंद कर दिए गए थे। जब सभी आँकड़े क्रमबद्ध रूप से विश्‍लेषित कर लिए गए थे और आँकड़े दृश्‍य क्षेत्र संसूचक में कर्क की उपलब्‍धता के आधार पर चुने गए थे, पृथ्‍वी की छाया से कर्क को प्रकट होते हुए देखा जा सकता था (चित्र 3)। विसंबलन द्वारा सृजित प्रतिबिंब, इस अंतराल के दौरान संचयित कोड मास्‍क की छाया में केंद्र के समीप चमकीली वस्‍तु के रूप में कर्क को स्‍पष्‍ट रूप से दिखाई पड़ता है (चित्र 4)।

सी.जेड.टी.आई. के एक चतुर्थांश के प्रत्‍येक संसूचक माड्यूल से एक्‍स-किरण काउंट समय के फलन के रूप में आलेखित किए गए हैं। काउंट (प्रति संसूचक लगभग 9 काउंट या प्रति चतुर्थांश लगभग 150 काउंट), पृथ्‍वी जब कर्क को अवरोधित कर रही थी तब से, लगभग तक दुगुना जब पृथ्‍वी की छाया से कर्क उभरा। अनफिल्‍टर रा काउंट की दर लगभग 13000 प्रति सेकेंड प्रति चतुर्थांश थी।

चित्र 3: सी.जेड.टी.आई. के एक चतुर्थांश के प्रत्‍येक संसूचक माड्यूल से एक्‍स-किरण काउंट समय के फलन के रूप में आलेखित किए गए हैं। काउंट (प्रति संसूचक लगभग 9 काउंट या प्रति चतुर्थांश लगभग 150 काउंट), पृथ्‍वी जब कर्क को अवरोधित कर रही थी तब से, लगभग तक दुगुना जब पृथ्‍वी की छाया से कर्क उभरा। अनफिल्‍टर रा काउंट की दर लगभग 13000 प्रति सेकेंड प्रति चतुर्थांश थी। 

 

 25 keV पर कठोर एक्‍स-किरणों में कर्क नीहारिका का प्रतिबिंब। केंद्र के समीप दीप्‍त बिंदु कर्क दर्शाता है। प्रभावी प्रतिबिंबन विभेदन लगभग 10 आर्कमिन है। बाहर की ओर हल्‍के धब्‍बे प्रतिबिंबन प्रक्रिया के ‘साइड लोब’ हैं और जब सभी चतुर्थांशों के आँकड़ों का एक साथ विश्‍लेषण पूरा हो जाएगा, अत्‍यधिक घटा दिए जाएंगे, जो प्रतिबिंब विभेदन में 8 आर्कमिन से भी बेहतर का सुधार करेंगे।

6 अक्‍तूबर, 2015 (16:38 – 17:20 यू.टी.) को सी.जेड.टी.आई. आँकड़े से निर्मित

चित्र 4: 25 keV पर कठोर एक्‍स-किरणों में कर्क नीहारिका का प्रतिबिंब। केंद्र के समीप दीप्‍त बिंदु कर्क दर्शाता है। प्रभावी प्रतिबिंबन विभेदन लगभग 10 आर्कमिन है। बाहर की ओर हल्‍के धब्‍बे प्रतिबिंबन प्रक्रिया के ‘साइड लोब’ हैं और जब सभी चतुर्थांशों के आँकड़ों का एक साथ विश्‍लेषण पूरा हो जाएगा, अत्‍यधिक घटा दिए जाएंगे, जो प्रतिबिंब विभेदन में 8 आर्कमिन से भी बेहतर का सुधार करेंगे। 

आगे के कार्य

सी.जेड.टी.आई. के प्रचालन के प्रथम सप्‍ताह में कर्क नीहारिका पर लगातार निगाह रखी गई थी और उपकरण की प्रतिबिंबन क्षमता को सुदृढ़ बनाने हेतु विभिन्‍न कोणों से भी देखा गया था। कर्क निहारिका कई बृहत ऑफ-अक्ष कोणों में उपकरण के साथ टकराया था जिससे कि कठोर एक्‍स-किरण व्‍यापी कोण के रूप में सी.जेड.टी.आई. विशिष्‍टीकरण की मात्रा निर्धारित की जा सके।

ब्‍लैक होल स्रोत सिग्‍नल एक्‍स-1 भी दो दिन तक देखा गया था। प्रारंभिक प्रचालन में, सी.जेड.टी.आई. के निम्‍न ऊर्जा थ्रेसहोल्‍ड को 20 keV पर रखा गया था (नियत समय में 10 keV की डिजाइन लक्ष्‍य को सावधानीपूर्वक नीचे लाया जाए) और समकालिक निम्‍न ऊर्जा आँकड़ा मुहैया कराने हेतु, नासा के स्विफ्ट उपग्रह में निम्‍नलिखित प्रेक्षण किए :-

      कर्क:        6 अक्‍तूबर 21:51:00 से 22:12:00 यू.टी.

      सिग एक्‍स-1 :      7 अक्‍तूबर 14:55:00 से 15:15:00 यू.टी.

इसका आकर्षक विज्ञान उद्देश्‍य सिग्‍नस एक्‍स-1 जैसे ब्‍लैक होल स्रोतों में सहवर्धी डिस्‍क ज्‍यामिति को समझना है। नासा का एन.यू. स्‍टार उपग्रह गत तीन वर्षों से प्रचालित हो रहा है और इसमें 10 – 80 keV क्षेत्र में सर्वोत्‍तम स्‍पेक्‍ट्रोस्‍कोपिक संवेदनशीलता है। समय आधारित स्‍पेक्‍ट्रल विशिष्‍टीकरण के प्रेक्षण हेतु एन.यू.स्‍टार (7 अक्‍तूबर 15:40:08 से 8 अक्‍तूबर 02:25:00 यू.टी.) के साथ समकालिक प्रेक्षण किया गया है, इससे 10 – 80 keV क्षेत्र में उपकरण क्रमबद्धता को समझने में सहायता मिलेगी; सी.जेड.टी.आई. 70 keV - 300 keV क्षेत्र में सर्वोत्‍तम स्‍पेक्‍ट्रोस्‍कोपिक आँकड़ा प्रदान करेगा (कॉम्‍प्टन प्रकीर्ण दोगुना परिणामों का प्रयोग करते हुए) और एन.यू. स्‍टार के साथ साझे विश्‍लेषण से इस स्रोत में अभूतपूर्व बृहत बैण्‍ड स्‍पेक्‍ट्रोस्‍कोपिक आँकड़े प्राप्‍त होंगे।

सी.जेड.टी.आई. में 100-300 keV क्षेत्र में ध्रुवीकरण संवेदनशीलता है और आज की तिथि तक कर्क की सबसे कठोर एक्‍स-किरण ध्रुवीकरण मापन ई.एस.ए. के इंटीग्रल उपग्रह द्वारा मुहैया किया गया है। इंटीग्रल सी.जेड.आई.टी. के साथ समकालिक रूप से कर्क का अवलोकन कर रहा है, संभवत: इसकी घूर्णन अवधि के कार्य के रूप में कर्क को परिष्‍कृत ध्रुवीकरण प्राप्‍त होगा।

आगे क्‍या?

अगले कुछ सप्‍ताहों में, एस्‍ट्रोसैट के अन्‍य एक्‍स-किरण उपकरण प्रचालनरत कर दिए जाएंगे और लगभग एक महीने में, सभी एक्‍स-किरण उपकरण (सी.जेड.टी.आई., एल.ए.एक्‍स.पी.सी. और एस.एक्‍स.टी.) रोचक तारों पर नजर रखने हेतु तैयार हो जाएंगे। एस्‍ट्रोसैट नवंबर माह के दौरान जी.आर.एस. 1915+105, सिग्‍नस एक्‍स-1, सिग्‍नस एक्‍स-3 जैसे कुछ ब्‍लैक होल स्रोत / तथ्‍यों का अवलोकन करेगा। माउंट आबू स्थि‍त अवरक्‍त दूरबीन, जी.एम.आर.टी., खोडद (पुणे के नजदीक), रेडियो प्रेक्षण का प्रयोग करते हुए तथा सी.जेड.टी.आई. के विज्ञान विश्‍लेषण हेतु हान्‍ले, लद्दाख स्थित हिमालय चंद्र दूरबीन का प्रयोग करते हए समकालिक प्रेक्षण करने की योजना बनाई गई है।

कई घटनाओं को उजागर करने हेतु यह तो मात्र शुरूआत है .........

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सी.जेड.टी. प्रतिबिंबित्र पूरे भारत के संस्‍थानों के संघ द्वारा निर्मित किया गया है: टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्‍थान, मुंबई ने उपकरण डिजाइन एवं विकास में सहयोग दिया; विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम ने इलेक्‍ट्रॉनिक डिजाइन, समुच्‍चय एवं जाँच मुहैया कराई, इसरो उपग्रह केंद्र (आईजैक), बेंगलूर ने यांत्रिक डिजाइन, गुणवत्‍ता परामर्श एवं परियोजना प्रबंधन मुहैया कराया, खगोलविज्ञान एवं ताराभौतिकी अंतर विश्‍वविद्यालय केंद्र (आई.यू.सी.ए.ए.), पुणे कोडीकृत मास्‍क डिजाइन, उपकरण अंशांकन एवं सी.जेड.टी.आई. हेतु नीतभार प्रचालन व्‍यवस्‍था की; अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, अहमदाबाद ने विश्‍लेषण सॉफ्टवेयर मुहैया कराया; भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला(पी.आर.एल.), अहमदाबाद ध्रुवीकरण संसूचन कलन विधि एवं भू अंशांकन मुहैया कराया; कई उद्योगों ने संविरचन में सहयोग किया तथा विश्‍वविद्यालय क्षेत्र ने नीतभार की जाँच एवं मूल्‍यांकन में भाग लेकर अपना योगदान दिया।

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