एस्ट्रोसैट का आवेश कण मानीटर (सी.पी.एम.) प्रचालनात्मक हुआ

भारत का पहला बहु तरंगदैर्घ्‍य अंतरिक्ष वेधाशाला एस्‍ट्रोसैट 28 सितंबर, 2015 को 650 कि.मी. की कक्षा में इसरो के विश्‍वसनीय प्रमोचक राकेट पी.एस.एल.वी. द्वारा सफलतापूर्वक प्रमोचित किया गया। एस्‍ट्रोसैट उपग्रह में कक्षीय पथ पर उच्‍च ऊर्जा वाले कणों के संसूचन हेतु आवेशित कण मानीटर (सी.पी.एम.) रखा है जो आवश्‍यक कार्रवाई हेतु अन्‍य नीतभारों को चेतावनी प्रदान करता है। सी.पी.एम. को उपग्रह की स्थिति में आवेशित कणों की संख्‍या का मापन करने के लिए डिजाइन किया गया है। वह 1 MeV (मेगा-इलेक्‍टॉन वोल्‍ट) से उपर के प्रोटॉनों के प्रति संवेदनशील है। 29 सितंबर, 2015 को एस्‍ट्रोसैट के प्रमोचन के पश्‍चात सी.पी.एम. को ‘चालू किया गया’ और उसका निष्‍पादन सामान्‍य है।

निम्‍न भू कक्षा (एल.ई.ओ.) में उपग्रह दक्षिण अटलांटिक विसंगति (एस.ए.ए.) वाले क्षेत्र के विकिर्णन बेल्‍ट से होकर गुजरता है जिसमें प्रोटॉन एवं इलेक्‍ट्रॉन के अधिक अपवाह होते हैं। ऊर्जावान कणों की अधिक घनता के कारण इसके प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं जैसे आँकड़े का यकायक रूक जाना, उपकरणों का पुराना होना और कुछ संसूचकों को स्‍थायी क्षति पहुँचना। इसलिए इस क्षेत्र का विशेष कक्षा के लिए मानीटरन किया जाना चाहिए और एस.ए.ए. क्षेत्र से उपग्रह के गुजरने के दौरान वैज्ञानिक उपकरणों का संरक्षण करने के लिए सावधानी बरती जानी चाहिए।. 

एस्‍ट्रोसैट की कक्षा (650 कि.मी.) में सामान्‍यतया कणों की दर निम्‍न होती है परन्‍तु जैसे ही उपग्रह एस.ए.ए. में प्रवेश करता है कण दर बहुत अधिक हो सकती है और वह एस्‍ट्रोसैट पर रखे संवेदनशील एक्‍स.-किरण संसूचक को क्षति पहुँचा सकती है। सी.पी.एम. 1 MeV से उपर के प्रोटॉनों की कुल संख्‍या को मापते हुए एस.ए.ए. का पता लगा सकता है। सी.पी.एम. एस.ए.ए. से बाहर सामान्‍यत: प्रति सेकेंड लगभग संसूचन की संभावना रखता है। परन्‍तु एस.ए.ए. से गुजरते समय यह संख्‍या प्रतिसेकेंड 100 संसूचन तक बढ़ सकती है। जब उपग्रह एस.ए.ए. में प्रवेश करता है तब सी.पी.एम. अन्‍य उपकरणों को संकेत भेजता है जो उनके प्रचालन वोल्‍टेज को कम कर सकते हैं अथवा उन्‍हें कुछ समय के लिए बंद भी कर सकते हैं।

सी.पी.एम. ने चालू होते ही आँकड़ा प्रदान करना जारी रखा। प्रेक्षित कण दर चित्र 1 में दर्शाई गई हैं। अधिकांशत: ये 0.8 प्रति सेकेंड होती हैं और जब ये उपग्रह खतरनाक एस.ए.ए. क्षेत्र में प्रवेश करता है तो बढ़ जाती है। यही आँकड़ा साथ में दिए गए चित्र 2 में चित्र के रूप में दर्शाया गया है। एस्‍ट्रोसैट की कक्षा की आनति छ: डिग्री है (विशेष रूप से एस.ए.ए. क्षेत्र में समय को कम करने के लिए इसे चुना गया है) और चित्र में आँकड़ा 12 कक्षाओं के लिए दर्शाया गया है। स्‍यान एवं मेगेन्‍टा में दर्शाई गई निम्‍न कण दरें उच्‍च पृष्‍ठभूमि वाले एस.ए.ए. क्षेत्र की स्थिति को दर्शाती हैं जब कण दर बढती है तो सी.पी.एम. स्‍वत: अन्‍य उपकरणों को चेतावनी देता है। उदाहरण के लिए 2 अक्‍तूबर को ‘चालू किया गया’ सी.ज़ेड.टी.-प्रतिबिंबित्र, कठोर एक्‍स किरण नीतभार इस सूचना को अपना प्रचालन बंद करने के लिए उपयोग करता है और एस.ए.ए. क्षेत्र से एस्‍ट्रोसैट के गुजरते समय स्‍वयं का संरक्षण करता है।

जब कण दर बढ़ जाएगी, तो सीपीएम स्वचालित रूप से अन्य उपकरणों को चेतावनी देगा। उदाहरण के लिए, सीएजीटी-इमेजर, हार्ड एक्स-रे पेलोड, 2 अक्टूबर को 'स्विच ऑन', एसएए क्षेत्र से एस्ट्रोसैट के पारगमन के दौरान ऑपरेशन को रोकने के लिए और खुद को बचाने के लिए इस सूचना का उपयोग करता है।

सी.पी.एम.उपकरण टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्‍थान (टी.आई.एफ.आर.), मुंबई द्वारा विकसित किया गया है।