एशियाई क्षोभ सीमा ऐरोसोल परत (अटल) के मामले को सुलझाने की ओर इसरो-नासा प्रयास

वायुमंडलीय एरोसोल तथा मेघ मौसम एवं जलवायु में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हाल ही में दक्षिण एशिया क्षेत्र में मानसून के दौरान सी.ए.एल.आई.पी.एस.ओ. (मेघ-ऐरोसोल लीडार और अवरक्‍त पथ-अन्‍वेषक उपग्रह प्रेक्षण) की मदद से एक उच्‍च तुंगता (~16 कि.मी.) ऐरोसोल परत की खोज ने वायुमंडलीय वैज्ञानिकों को चकित कर रखा है। इन गहन ऐरोसोल परतों की संरचना और उनके निर्माण पद्धति के बारे में बहुत कम जानकारी है। इस रहस्‍यमयी परत को समझने के लिए, इसरो-नासा सहयोगी कार्यक्रम – एशियाई क्षोभ सीमा ऐरोसोल परत का बैलून वाहित मापन अभियान (बी.ए.टी.ए.एल.) के तहत बैलून वाहित परीक्षणों के साथ-साथ भू आधारित प्रेक्षणों का आयोजन किया जा रहा है। क्षोभ सीमा क्षोभमंडल तथा समतापमंडल के बीच अंतरापृष्‍ठ है। इस परत की भौतिक, रसायनिक तथा विकिरणी विशेषताओं के अध्‍ययन के लिए, भारत की ओर से टाटा आधारभूत अनुसंधान संस्‍थान (टी.आई.एफ.आर.) बैलून सुविधा, हैदराबाद तथा बनारस हिंदु विश्‍वविद्यालय, वाराणसी के सहयोग से राष्‍ट्रीय वायुमंडलीय अनुसंधान प्रयोगशाला (एन.ए.आर.एल.) विशिष्‍ट बैलून वाहित प्रेक्षणों के संचालन में मुख्‍य भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा, एन.ए.आर.एल. अपने सशक्‍त एम.एस.टी. रेडार तथा लीडार और तिरुपति के निकट गादंकी स्थित अन्‍य परीक्षणों के साथ इस परत के अध्‍ययन हेतु विशेष प्रयास कर रहा है। वर्ष 2014 से कई प्रेक्षणात्‍मक आंकड़े पहले से ही एकत्रित किए जा चुके हैं।

मौसम तथा जलवायु पर अटल के वैज्ञानिक मुद्दों तथा प्रभावों का पता लगाने के लिए भविष्‍य की कार्रवाई पर चर्चा करने तथा योजना बनाने के लिए 1-2 फरवरी, 2018 के दौरान एन.ए.आर.एल., गादंकी में दो-दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें एन.ए.आर.एल., नासा (यू.एस.ए.), सी.एन.आर.एस. (फ्रांस), तथा अन्‍य राष्‍ट्रीय संस्‍थानों और विश्‍वविद्यालयों से करीब 35 वैज्ञानिकों ने भाग लिया। बी.ए.टी.ए.एल. अभियानों के दौरान एकत्रित यथावत प्रेक्षणों का प्रयोग करते हुए की गई चर्चा के आधार पर, यह स्‍पष्‍ट हो गया कि अटल अपेक्षाकृत 532 ने.मी. पर निम्‍न प्रकीर्णन अनुपात (<1.2) सहित अधिकांश: छोटे (r<2.5), द्रव (~ 80%-95%) एरोसोल से बना हुआ है। क्षोभ सीमा के निकट संग्रहित कणों का रसायनिक विश्लेषण यह दर्शाता है कि करीब 100 ng/m3 के सांद्रण सहित नाईट्रेट ऐरोसोल का अधिपत्‍य है, जो चौंकाने वाला है। दिलचस्‍प बात यह है कि कोई भी सल्‍फेट ऐरोसोल पाया नहीं गया, जिसके बारे में यह सोचा गया था कि यह संरचना का प्रमुख भाग होगा। इससे अटल के बारे में आगे के अध्‍ययन को नई दिशा मिलेगी।

यह परिणाम ऊपरी क्षोभमंडल एंव निम्‍न समतापमंडल (यू.टी.एल.एस.) क्षेत्र में ऐरोसोल प्रवृत्तियों पर गत कुछ दशकों से एशिया में सल्‍फर उतर्सजनों के बढ़ते प्रभाव की संभावना से विपरीत है। एन.ए.आर.एल. से मौसम विज्ञान से युग्मित क्षेत्रीय रासायनिक परिवहन मॉडल डब्‍ल्‍यू.आर.एफ.-रसायन (मौसम अनुसंधान एवं पूर्वानुमान) एशियाई ग्रीष्‍म मानसून प्रति चक्रवात क्षेत्र के तहत नाइट्रेट की उपस्थिति भी दर्शाता है। उष्‍णकटिबंधी पूर्वी हवाओं के जरिए भारत के उत्‍तरी भाग से बृहत-रेंज परिवहन को संवहन के विपरीत प्रेक्षित अटल के लिए मुख्‍य स्रोत के रूप में देखा गया है। यू.टी.एल.एस. क्षेत्र में प्रति-चक्रवात की मौजूदगी एरोसोल एवं ट्रेस गैसों का परिरोध सृजित करता है। इस प्रकार, गतिकी अटल के निर्माण एवं अनुरक्षण में प्रमुख भूमिका निभाता है। एरोसोल के निर्माण के लिए गैस की संभावना की भी जांच की जा रही है।

वर्तमान में, यह अटल के निर्माण में संवहन की सापेक्ष भूमिकाओं के विपरीत दीर्घ-रेंज परिवहन तथा प्राकृतिक के विपरीत मानवजनित स्रोतों पर स्‍पष्‍ट नहीं है। इस दिशा में यू.टी.एल.एस. एरोसोल संघट्ट की खोज करने हेतु  नए संवेदकों की जाँच  करने के लिए टी.आई.एफ.आर. बैलून सुविधा, हैदराबाद में 5-13 फरवरी, 2018 के दौरान शीत अभियान का संचालन किया गया था। 

 

एन.ए.आर.एल., भारत में बी.ए.टी.ए.एल. कार्यशाला के प्रतिभागीगण

एन.ए.आर.एल., भारत में बी.ए.टी.ए.एल. कार्यशाला के प्रतिभागीगण

 

10 विभिन्न नीतभारों का वहन करते हुए 5-13 फरवरी, 2018 के दौरान टी.आई.एफ.आर. बैलून सुविधा में आयोजित बी.ए.टी.ए.एल. शीत अभियान

10 विभिन्न नीतभारों का वहन करते हुए 5-13 फरवरी, 2018 के दौरान टी.आई.एफ.आर. बैलून सुविधा में आयोजित बी.ए.टी.ए.एल. शीत अभियान