एम.ओ.एम. “व्हांइटआउट” दौर से सफलतापूर्वक बाहर

मंगल कक्षित्र मिशन (एम.ओ.एम.) अंतरिक्षयान ने 18 मई से 30 मई, 2016 के दौरान “व्‍हाइटआउट” ज्‍यामिती का अनुभव किया। निरंतर गतिमान ग्रह सूर्य के सीध में आ सकता है और “व्‍हाइटआउट” या “ब्‍लैकआउट” करते हुए संचार में बाधा उत्‍पन्‍न कर सकता है। इस विशेष ज्‍यामिती में पृथ्‍वी, सूर्य तथा मंगल के बीच आ गई और संपूर्ण “व्‍हाइटआउट” उत्‍पन्‍न कर दिया।

एम.ओ.एम. “व्हांइटआउट” दौर से सफलतापूर्वक बाहर

“व्‍हाइटआउट” तब उत्‍पन्‍न होता है जब पृथ्‍वी सूर्य एवं मंगल के बीच आती है और संभवत:, अत्‍यधिक सौर विकिरण पृथ्‍वी के साथ संपर्क को असंभव बना सकती है। “व्‍हाइटआउट” की अधिकतम अवधि 14 दिवस है। एम.ओ.एम. का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि वह संपूर्ण स्‍वायत्त है जो बिना किसी भूमिगत हस्‍तक्षेप के लंबी अवधि तक अपनी देख-भाल स्‍वयं कर सकता है।

सूर्य के केंद्र में पृथ्‍वी एवं मंगल के बीच कोणीय पृथक्‍कन (संदर्भ: वर्तमान विज्ञान, वाल्‍यूम 109, सं. 6, 25 सितंबर, 2015)

सूर्य के केंद्र में पृथ्‍वी एवं मंगल के बीच कोणीय पृथक्‍कन
(संदर्भ: वर्तमान विज्ञान, वाल्‍यूम 109, सं. 6, 25 सितंबर, 2015)

वास्‍तविक घटना के दस दिन पूर्व ही “व्‍हाइटआउट” के लिए पूरी आयोजना एवं आदेश कार्य पूरा कर लिया गया था।“व्‍हाइटआउट” अवधि के दौरान उपग्रह पर कोई आदेश नहीं भेजा गया। नीतभार प्रचालन कार्य रोक दिया गया। त्रुटि का संसूचन तथा पुन:प्राप्ति को जारी रखा गया ताकि अंतरिक्षयान पर किसी प्रकार की आपात्‍कालीन स्थिति को संभाला जा सके। अंतरिक्षयान की अभिवृत्ति को प्राप्‍त करने के लिए और अभिवृत्ति के अभाव में भी पृथ्‍वी के साथ संपर्क सुनिश्चित करने के लिए मुख्‍य पुन:प्राप्ति क्रमित्र को प्रोग्राम किया गया।

अंतरिक्षयान 30 मई, 2016 को इस व्‍हाइटआउट ज्यामिती से बाहर आ गया और नियमित प्रचालनों के लिए इसे सामान्‍य किया गया है।

यह स्‍मरण रहे कि 2 जून, 2015 से 2 जुलाई, 2015 के दौरान सौरयुति के कारण एम.ओ.एम. को स्‍वायत्त विशेषताओं से आदेश प्राप्‍त हो रहे थे जिससे संचार ठप पड़ जाने वाली अवधि में बिना किसी भूमिगत आदेश या हस्‍तक्षेप के अपनी स्‍वत: नियंत्रण प्रणाली के कारण सफलतापूर्वक उभर पाया। इस अनुभव से मिशन दल को सभी प्रचालनों के लिए एक माह पूर्व अंतरिक्षयान का प्रोग्राम करने में सहायता मिली।