ऊपरी वायुमंडल के अध्यायन के लिए किए गए परिज्ञापी राकेट परीक्षण

इसरो के आर.एच.300 मार्क-III परिज्ञापी राकेट ने थुंबा भू-मध्‍य रेखीय राकेट प्रमोचन स्‍टेशन (टर्ल्‍स), वी.एस.एस.सी., तिरुवनंतपुरम से 06 अप्रैल, 2018 को 19:30 बजे 21वीं उड़ान भरी। इस प्रमोचन में, इस एकल चरणीय स्‍वदेशी परिज्ञापी राकेट ने स्‍वदेशी राकेट के साथ प्रथम सफल टी.एम.ए. परीक्षण को अंकित करते हुए 90-108 कि.मी की ऊँचाई पर ट्राईमिथेलएलुमिनियम (टी.एम.ए.) रसायन को सफलतापूर्वक निकाला।

इस मिशन का वैज्ञानिक लक्ष्‍य दो स्‍वतंत्र तकनीकों का प्रयोग करते हुए आयन मंडलीय घनत्‍व तथा आयनमंडल के ई-क्षेत्र में निष्‍प्रभावी पवन का मापन करना है, साथ ही इस तकनीकी द्वारा पवन के मापन का पुन: वैधीकरण करना, डायनेमो ऊँचाई पर इलेक्‍ट्रॉन घनत्‍व सहित निष्‍प्रभावी पवन में बदलावों की जांच करना तथा भू-मध्‍यरेखीय प्‍लाज़मा बुलबुला के जनन हेतु कारण प्रदान करने में उनके प्रभावों तथा स्‍पोरैडिक ई, ब्‍लैंकेटिंग ई. आदि जैसे ई. क्षेत्र अनियमितता के जनन में पवन की भूमिका का मूल्‍यांकन करना भी है। तदनुसार, उड़ाए गए प्रमुख वैज्ञानिक नीतभार निम्‍नलिखित थे:

  • ई. क्षेत्र (90 से 120 कि.मी.) में मौजूद निष्‍प्रभावी पवन के मापन के लिए इलेक्‍ट्रॉन तथा न्‍यूट्रान पवन (ई.एन.डब्‍ल्‍यू.आई.) प्रोब।
  • ई.एन.डब्‍ल्‍यू.आई. आंकड़ा के पुन: वैधीकरण के लिए टी.एम.ए. रसायन को निकालने की तकनीक।
  • इलेक्‍ट्रॉन घनत्‍व मापन के लिए लैंगमूर।

वी.एस.एस.सी. की अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला ने ई.एन.डब्‍ल्‍यू.आई. प्रोब का स्‍वेदशी रूप से विकास किया है और इसे परिज्ञापी राकेटों का प्रयोग करते हुए सूर्यग्रहण अभियान के दौरान वर्ष 2010 में पहले ही सफलतापूर्वक उड़ाया गया था। टी.एम.ए. एक ज्‍वलनशील द्रव है, जो कि ऑक्‍सीजन के संपर्क में आते ही जल जाता है। टी.एम.ए. तथा ऑक्‍सीजन के बीच की प्रतिक्रिया धीमी है तथा देर तक रहने वाली रसायनिक-संदीप्ति उत्‍पन्‍न करती है, जो कुछ मिनटों तक रहती है तथा इसका निशान धरती पर लगे श्‍वेत-प्रकाश कैमरों द्वारा प्राप्‍त किया जा सकता है। ई.एन.डब्‍ल्‍यू.आई. प्रोब, दिन में किसी भी समय पवन मूल्‍यांकन को प्रदान करने में सक्षम है, जबकि टी.एम.ए. धुंधले प्रकाश तथा रात के समय हेतु उपयुक्‍त है। टी.एम.ए. को जब धुंधले प्रकाश स्थिति में छोड़ा जाता है, तो यह रसायनिक संदीप्ति से संबंधित श्‍वेत प्रकाश तथा एल्‍युमीनियम अनुनाद उत्‍सर्जन लाइन के साथ संबंधित एक तेज नीले प्रकाश को उत्‍पन्‍न करता है।

भू चंबकीय भू-मध्‍यरेखा के ऊपर का डायनेमो क्षेत्र 90-120 कि.मी. के बीच के ऊँचाई क्षेत्र का प्रतिनिधित्‍व करता है, जहां विद्युत क्षेत्र तथा सहयोगी विद्युत-गतिकी प्रक्रियाओं के जनन तथा उत्‍पत्ति के नियंत्रण में निष्‍प्रभावी पवन उत्‍यधिक महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। यह पाया गया है कि इस क्षेत्र में मौजूद पवन तथा इसके उर्ध्‍वाधर संरचना में भिन्‍नता भू-मध्‍यरेखीय इलेक्‍ट्रोजेट (ई.ई.जे.) जैसी बृहत-पैमाने की प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। तथापि, डायनेमो क्षेत्र में मुख्‍य रूप से इस क्षेत्र में प्रोब की तकनीकी कमियों के कारण पवन पर बहुत सारे मापन नहीं किए गए हैं। कई कारणों से इस क्षेत्र में कोई भी पारंपरिक तकनीक कार्य नहीं करता है। विश्‍व भर में भी ऐसे मापन बहुत कम हैं, क्‍योंकि भू चुंबकीय भूमध्‍यरेखा भारतीय, अफ्रीकी तथा ब्राजील क्षेत्रों को छोड़कर अधिकांश स्‍थानों/रेखांशों पर समुद्र के ऊपर से गुजरात है। यद्यपि, इस  क्षेत्र के अध्‍ययन के लिए छुट-पुट प्रयास किए गए हैं, फिर भी इस में कई महत्‍वपूर्ण कमियां हैं, विशेषकर 90-120 कि.मी. ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इस डायनेमो क्षेत्र को बड़े ही सटीक रूप से वायुमंडलीय क्षेत्रों का ‘’उपेक्षित मंडल’’ (इग्‍नोरोस्‍फीयर) नाम दिया गया है।

टी.एम.ए. निष्‍कासन परीक्षण वायुमंडल के ई और निम्‍न आयनमंडल क्षेत्रों में पवन प्रसार के विशिष्‍टीकरण हेतु विशेष रूप से उपयोग किए जाते हैं। टर्ल्‍स से टी.एम.ए. नीतभार का प्रथम प्रमोचन फ्रांस सेंटौर परिज्ञापी राकेट का उपयोग करते हुए 02 मई, 1965 को किया गया। टी.एम.ए. नीतभारों के सात और प्रमोचन, क्रमश: फ्रांस, यू.एस.ए.; और ब्रिटेन के सेंटौर, नाइक अपाचे एवं पेट्रोल परिज्ञापी राकेटों का उपयोग करते हुए टर्ल्‍स रेंज से सम्‍पन्‍न किए गए हैं। टी.एम.ए. तकनीकी ऊपरी वायुमंडल में स्‍वस्‍थाने पवन प्रोफाइल मापने हेतु अभी भी पसंदीदा विधि है।

आर.एच.300 मार्क III 305 मि.मी. व्‍यास वाला एकल चरण, फिन स्थिरीकृत, प्रचक्रण परिज्ञापी राकेट है जिसकी कुल लंबाई 5.6 मी. है तथा 80 कि.ग्रा. का नीतभार वहन करने में सक्षम है। राकेट को ठोस नोदक बूस्‍टर मोटर द्वारा ऊर्जा प्राप्‍त होती है, जो लगभग 20 सेकेंड प्रज्‍वलित होता है और 65 के.एन. का अधिकतम प्रणोद उत्‍पन्‍न करता है। यह राकेट आमने-सामने की फिनों की चोटी पर लगे हुए दो प्रचक्रण राकेटों द्वारा प्रति सेकेंड लगभग 4.5 चक्‍कर लगाता है। प्रचक्रण राकेट 300 मि.ली. सेकेंडों तक कार्य करते हैं और फिर पृथक हो जाते हैं। इस राकेट में केंद्रीकृत अनुक्रमित्र कोडित्र लगा हुआ है जो प्रमोचक पश्‍चात सभी गतिविधियों पर नियंत्रण मुहैया कराता है। विभिन्‍न प्रणालियों द्वारा अर्जित आंकड़ा कार्यक्रम परक एस-बैंड ट्रांसमीटर के माध्‍यम से अनुवर्तन केंद्र को संप्रेषित किया जाता है।

राकेट 160 सेकेंडों में करीब 107 कि.मी. के अपभू में पहुंचा। उत्‍थापन के 100 सेकेंडों पर, जब राकेट 90 कि.मी. की तुंगता पर था, तब टी.एम.ए. द्रव का निष्‍कासान शुरु किया गया। यह निष्‍कासान 50 ग्राम/सेकेंड की औसत प्रवाह दर पर 43 सेकेंडों तक जारी रहा। टी.एम.ए. वाष्‍प मार्ग का तिरुवनंतपुरम, कोल्‍लम, कन्‍याकुमारी एवं तिरुनवेली नामक भूकेंद्रों से सफलतापूर्वक चित्र लिए गए थे। शुरुआत में यह मार्ग लगभग एक सीधी रेखा जैसा था चूंकि यह राकेट के प्रक्षेपपथ के साथ निकलता है। इसके पश्‍चात, ऊपरी वायुमंडल में धूर्णनी एवं गति अपरुपण मार्ग को विकृत कर देते हैं।

आंकड़ा पर सरसरी नजर र्इ.एन.डब्‍ल्‍यू.आई. एवं एल.पी. आंकड़ा में भूमध्‍यरेखीय इलेक्‍ट्रोजेट से समर्थित (प्लाज्‍मा संवृद्धियों की उपस्थिति दर्शाती है। टी.एम.ए. को शामिल करते हुए ऐसा प्रेक्षण भारत में अपनी तरह का पहला है और विशेष ध्‍यान आकर्षित करता है। टी.एम.ए. मार्ग स्‍पष्‍ट रूप से 90-105 कि.मी. के क्षेत्र में तेज पवन अपरूपणों एवं तरंगों की उपस्थिति दर्शाता है। जो ई. एवं एफ.-क्षेत्र प्‍लाज्‍मा अनियमितताओं के सृजन पर महत्‍वपूर्ण प्रत्‍यक्षीकरण रखता है। संक्षेप में, 06 अप्रैल, 2018 को आर.एच. 3000 मार्कIII के प्रमोचन के साथ परीक्षण वैज्ञानिक रूप से सफल रहा है।

विस्‍तृत विश्‍लेषण चल रहा है। यह संभावना है कि अंतिम परिणामों से भू चुम्‍बकत्‍व भूमध्‍यरेखा में निम्‍न आयनमंडल क्षेत्र में पवन संरचना से संवंधित कुछ अनुत्‍तरित प्रश्‍नों का समाधान निकालने में सहायता मिलेगी।

 

प्रतिरुपी आर.एच. 300 मार्क III परिज्ञापी राकेट

प्रतिरुपी आर.एच. 300 मार्क III परिज्ञापी राकेट

 

रोहिणी परिज्ञापी राकेट उत्था.पन निशान

रोहिणी परिज्ञापी राकेट उत्‍थापन निशान

 

तिरुवनंतपुरम भू केंद्र से देखा गया टी.एम.ए. निशान

तिरुवनंतपुरम भू केंद्र से देखा गया टी.एम.ए. निशान

 

कोल्लनम भू केंद्र से देखा गया टी.एम.ए. निशान

कोल्‍लम भू केंद्र से देखा गया टी.एम.ए. निशान

तिरुनेलवेली भू केंद्र से देखा गया टी.एम.ए. निशान

तिरुनेलवेली भू केंद्र से देखा गया टी.एम.ए. निशान

 

कन्याेकुमारी भू केंद्र से देखा गया टी.एम.ए. निशान

कन्‍याकुमारी भू केंद्र से देखा गया टी.एम.ए. निशान