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अंतरिक्ष विभाग
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन

लोक सूचना : सावधान : नौकरी पाने के इच्छुक उम्मीदवार

वर्तमान ई-प्रापण साइट का नई वेबसाइट में रूपांतरण करना प्रस्तावित है। सभी पंजीकृत/नये विक्रेताओं से नई वेबसाइट https://eproc.isro.gov.in का अवलोकन करने तथा इसरो केंद्रों के साथ भाग लेने के लिए अपने प्रत्यय-पत्र का वैधीकरण करने का अनुरोध किया जाता है।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष परिवहन नीति – 2020 का मसौदा

लघु उपग्रह

लघु उपग्रह परियोजना का द्रुत प्रतिवर्तन/प्रत्याावर्तन समय में भू प्रतिबिंबन एवं वैज्ञानिक मिशनों हेतु स्टेंकड-अलोन नीतभारों के लिए आधार मुहैया कराने के लिए विचार किया गया है। विभिन्न प्रकार के नीतभारों हेतु बहुमुखी आधार बनाने हेतु दो प्रकार की बसों का संरूपण एवं विकास किया गया है।

भारतीय लघु उपग्रह-1 (आई.एम.एस.-1)

आई.एम.एस.-1 बस 100 कि.ग्रा. श्रेणी की बहुमुखी बस के रूप में विकसित की गई है जिसमें लगभग 30 कि.ग्रा. की नीतभार क्षमता शामिल है। इस बस को विभिन्नक न्यूीनीकरण तकनीकों का इस्ते3माल करते हुए विकसित किया गया है। आई.एम.एस.-1 श्रृंखला का प्रथम मिशन कार्टोसैट-2ए के साथ सह-यात्री के रूप में 28 मार्च, 2008 को सफलतापूर्वक प्रमोचित किया गया था। यूथसैट इस श्रृंखला का द्वितीय मिशन है और 20 अप्रैल, 2011 को रिर्सोससैट-2 के साथ सफलतापर्वूक प्रमोचित किया गया था।

भारतीय लघु उपग्रह-2 (आई.एम.एस.-2) बस

आई.एम.एस.-2 बस को 400 कि.ग्रा. की श्रेणी मानक बस के रूप में विकसित किया गया है जिसमें लगभग 200 कि.ग्रा. की नीतभार क्षमता शामिल है। आई.एम.एस.-2 विकास एक महत्वसपूर्ण उपलब्धि है, क्यों्कि यह विभिन्नर प्रकार के सुदूर संवेदन अनुप्रयोगों हेतु विश्वससनीय उपग्रह बस है। आई.एम.एस.-2 का प्रथम मिशन सरल है। सरल इसरो एवं सी.एन.ई.एस. का सहयोगी मिशन है, जिसके नीतभार सी.एन.ई.एस. से प्राप्तव हुए हैं और अंतरिक्षयान बस इसरो से।