उच्च प्रणोद क्रायोजेनिक इंजन (CE20) विकास

उच्च प्रणोद क्रायोजेनिक इंजन (CE20) विकास

इसरो जीएसएलवी एमके III भारी उत्थापन प्रक्षेपण यान के ऊपरी चरण में इस्तेमाल करने के लिए उच्च प्रणोद क्रायोजेनिक इंजन विकसित कर रहा है। यह उच्च प्रणोद क्रायोजेनिक इंजन 434 सेकंड के विशिष्ट आवेग के साथ निर्वात में 196.5 केएन नामीय प्रणोद उत्पन्न करता है। इंजन "गैस जेनरेटर चक्र" पर कार्य करता है, जो एकीकृत इंजन परीक्षण से पहले प्रत्येक उप-प्रणाली के स्वतंत्र विकास के लिए सुनम्यता प्रदान करता है, इस प्रकार अंतिम विकासात्मक चरण में अनिश्चितता को कम करने और विकास के समय को कम करने में मदद करता है। जीएसएलवी के क्रायोजेनिक अपर स्टेज (सीयूएस) इंजन द्वारा उत्पन्न 1 मेगावाट की तुलना में यह इंजन लगभग 2 मेगावाट बिजली उत्पन्न करता है। उच्च प्रणोद क्रायोजेनिक इंजन दुनिया में ऊपरी चरणों में सबसे शक्तिशाली क्रायोजेनिक इंजन में से एक है।

इसरो ने 28 अप्रैल, 2015 को 1657 बजे महेंद्रगिरि में इसरो प्रोपल्सन परिसर में स्वदेशी उच्च प्रणोद क्रायोजेनिक इंजन का 635 ​​सेकंड की अवधि के भू परीक्षण के आयोजन द्वारा एक बड़ी उपलब्धी प्राप्त की  है। परीक्षण के दौरान सभी प्रणोदन मानकों को संतोषजनक और अनुमानों के साथ बारीकी से मिलान किए गए। कुछ हफ्तों में पहले 5.5, 7.5, 20 और 30 सेकंड के चार छोटी अवधि के परीक्षण के बाद यह भू परीक्षण  किया गया था ।

उच्च प्रणोद क्रायोजेनिक इंजन द्रव नोदन प्रणाली केंद्र (LPSC) वलियमला द्वारा विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी), तिरुवनंतपुरम के समर्थन के साथ तैयार किया गया है । इंजन का समुच्चय, समाकलन और परीक्षण इसरो प्रोपल्सन कॉम्प्लेक्स (IPRC) महेंद्रगिरि में किया गया है। भारतीय उद्योगों ने क्रायोजेनिक इंजन की प्राप्ति में सराहनीय योगदान दिया है।

अब तक आयोजित भू परीक्षण इसके डिजाइन पर्याप्तता और एकीकृत इंजन के प्रदर्शन को मान्य करते हैं, आगे विभिन्न ऑपरेटिंग स्थितियों के तहत अलग-अलग प्रदर्शन के मानकों को चिह्नित करने के लिए इंजन और स्तर पर प्रदर्शन परीक्षण की योजना बनाई है । परीक्षणों को पूरा होने के बाद, स्वदेशी उच्च प्रणोद क्रायोजेनिक इंजन और चरण को जीएसएलवी Mk- ।।।-डी 1 मिशन के लिए उड़ान परीक्षण करने की योजना बनाई है।