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राष्ट्रीय अंतरिक्ष परिवहन नीति – 2020 का मसौदा

इसरो दूरमिति, अनुवर्तन और आदेश संचार नेटवर्क (इस्ट्रै्क) ने रूबी वर्ष मनाया

इसरो दूरमिति अनुवर्तन और आदेश संचार नेटवर्क (इस्‍ट्रैक) की स्‍थापना 06 सितंबर 1976 को उपग्रह मिशन प्रचालनों को पूरा करने के साथ-साथ इसरो के प्रमोचक राकेटों तथा उपग्रहों के लिए संचार माध्‍यमों की सुगमता हेतु किया गया। तब से इसका विकास विश्‍व में हो रहे विकास के अनुरूप रहा है। इस्‍ट्रैक का आरंभ साधारण रूप से हुआ जहाँ उसने 1970 में टर्ल्‍स से प्रमोचित आर.एच. श्रेणी तथा 1975 में शार से आर्यभट्ट को पी./वी.एच.एफ. द्वारा सहायता प्रदान की। इस्‍ट्रैक आज अत्‍याधुनिक टी.टी.सी. नेटवर्क, गहन अंतरिक्ष नेटवर्क (डी.एस.एन.), टी.टी.सी. नेटवर्क नियंत्रण केंद्र, मिशन प्रचालन काम्‍प्‍लैक्‍स तथा अंतरिक्ष विज्ञान आंकड़ा केंद्र सहित एक विश्‍व स्‍तरीय भू सहायता प्रदान करने वाले केंद्र के रूप में उभर कर सामने आया है। यह इसरो नौवहन केंद्र, खोज और बचाव-आपदा प्रबंधन (एस.ए.आर.-डी.एम.एस.) प्रचालनों, अंतरिक्ष आधारित सेवाओं हेतु हब, प्रमोचक राकेटों के अनुवर्तन हेतु रेडार विकास और मौसम पूर्वानुमान के प्रचालन हेतु भी उत्‍तरदायी है।

कार निकोबार डाउन रेंज स्‍टेशन की स्‍थापना वर्ष 1975 में की गई तथा इसने सभी एस.एल.वी. मिशनों को सफलतापूर्वक समर्थन प्रदान किया। वर्ष 1976 के दौरान, कावालूर में रूबी  लेज़र रेडार तथा एक प्रकाशिकी अनुवर्तन तथा रेजिंग स्‍टेशन (एस.टी.ए.आर.एस.) की स्‍थापना की गई। वर्ष 1978 में, भास्‍कर मिशन की सहायता हेतु अहमदाबाद में एक वी.एच.एफ. प्रणाली की स्‍थापना की गई जिसने कक्षीय घटकों को अद्यतन बनाने हेतु अतिरिक्‍त आँकड़ा प्रदान किया। वर्ष 1981 में एप्‍पल के प्रमोचन के साथ टी.टी.सी. तथा मिशन सहायता में प्रमुख सुधार किए गए। मिशन के सामान्‍य चरण की सहायता हेतु शार और अहमदाबाद में नए सी-बैंड टर्मिनलों का निर्माण किया गया। उपग्रहों के साथ अतिरिक्‍त संपर्क साधने हेतु, तथा अधिक अनुवर्तन आंकड़ा प्राप्‍त करने के लिए आर.एस.ए., सी.एन.ई.एस. तथा डी.एल.आर. के बाह्य नेटवर्क स्‍टेशनों का प्रयोग किया गया।

वर्ष 1982 में, प्रमोचक राकेटों तथा उपग्रहों हेतु प्रचालनों की आवृत्ति को एस-बैंड में स्‍थानांतरित करने का एक महत्‍वपूर्ण निर्णय लिया गया। ए.एस.एल.वी./पी.एस.एल.वी./ आई.आर.एस. परियोजनाओं की आवश्‍यकतओं को पूरा करने के लिए, इस्‍ट्रैक ने शार स्थित प्रमोचन आधार टी.टी.सी. स्‍टेशन अतिरिक्‍त सुविधा सहित, कार निकोबार स्थित डाउन रेंज स्‍टेशन, तिरुवनंतपुरम स्थित मध्‍यवर्ती डाउन रेंज स्‍टेशन, मॉरीशस स्थित एक डाउन रेंज स्‍टेशन तथा विशेषकर आई.आर.एस. मिशनों की सहायता हेतु लखनऊ में एक स्‍टेशन नामक इस्‍ट्रैक विस्‍तार परियोजना के तहत इस्‍ट्रैक ने टी.टी.सी. नेटवर्क का प्रस्‍ताव तथा उसका संवर्धन किया।

वर्ष 1984 में इस्‍ट्रैक इसरो का एक यूनिट बना तथा आई.आर.एस. मिशनों की सहायता हेतु संबंधित टी.टी.सी. स्‍टेशनों और कंप्‍यूटर प्रणालियों सहित अंतरिक्षयान नियंत्रण केंद्र की स्‍थापना करने की दृष्टि से बेंगलूर में स्‍थानांतरित किया गया। इस महत्‍वपूर्ण कार्य को इस्‍ट्रैक द्वारा दिनांक 17 मार्च, 1988 को आई.आर.एस.-1ए के प्रमोचन हेतु समय पर स्‍थापित कर लिया गया। मारीशस में दक्षिणआबद्ध पी.एस.एल.वी. प्रमोचनों हेतु मारीशस में एक स्‍टेशन की स्‍थापना की गई। शार स्‍टेशन में ज्‍वाला क्षीणन की देख-रेख के लिए, 1987 में तिरुवनंतपुरम में     एक 8 मीटर एस.बैंड ऐंटेना की स्‍थापना की गई। साथ ही, बेंगलूर, लखनऊ तथा मारीशस में 2X10 मीटर एस-बैंड टर्मिनलों की भी स्‍थापना की गई। ए.एस.एल.वी. परियोजना के बंद होने के बाद वर्ष 1995 के दौरान कार निकोबार स्‍टेशन को पोर्ट ब्‍लेयर में स्‍थानांतरित किया गया।

इस्‍ट्रैक ने दस वर्षों की अवधि में भौगोलिक रूप से विस्‍तृत स्‍थानों में आठ एस-बैंड टी.टी.सी. स्‍टेशनों की स्‍थापना की। आज, इस्‍ट्रैक अपने कार्य क्षेत्र के ज्ञान का संग्रहालय बन चुका है तथा विभिन्‍न विविध गतिविधियों के लिए तैयार है। साथ ही, वर्ष 1997 के दौरान, इसरो के विभिन्‍न यूनिटों को साथ में जोड़ते हुए इस्‍ट्रैक ने उपग्रह आधारित संचार डी.ए.एम.ए. नेटवर्क भी मुहैया कराया।

जी.एस.एल.वी. के निरंतर दूरमिति आवश्‍यकताओं को पूरा करने हेतु, वर्ष 1998 के दौरान ब्रुनेई स्थित एक मध्‍यवर्ती डाउन रेंज स्‍टेशन तथा बियाक (इंडोनेशिया) स्थित एक डाउन रेंज स्‍टेशन की स्‍थापना की गई, जो स‍भी पूर्व-आबद्ध पी.एस.एल.वी./जी.एस.एल.वी. मिशनों को निरंतर सेवा प्रदान करता रहा। जैसे कि बियाक स्‍टेशन में कुछ विशिष्‍ट पास है, जोकि भारतीय स्‍टेशनों से दिखाई नहीं देते हैं, उपग्रह प्रचालनों को सहायता प्रदान करने हेतु भी इसका इष्‍टमी प्रयोग किया जा रहा है। वर्ष 2000 के दौरान इस्‍ट्रैक नेटवर्क आधुनिकीकरण (2 चरणों में) की पहल से लघु रूपांतरण तथा बहु-प्रकार्यात्‍मक क्षमताओं सहित अत्‍याधुनिक प्रणालियों की शुरूआत हुई, जिससे स्‍वचालित नेटवर्क नियंत्रण हेतु मार्ग प्रशस्‍त हुआ। जी.ई.ओ. मिशनों के एल.ई.ओ.पी. प्रचालनों की सहायता हेतु वर्ष 2005 के दौरान बियाक में दूसरा एस./सी.-बैंड टर्मिनल लगाया गया। साथ ही, इस अवधि के दौरान, हैमसैट मिशन की सहायता हेतु कम लागत पर पूर्ण रूप से स्‍वचालित वी.एच.एफ. टर्मिनल को भी स्‍थापित किया गया। वर्ष 2006 में, बेंगलूर तथा लखनऊ स्थित एस/एक्‍स टर्मिनलों का 3.7 मी. से 11 मी. टर्मिनल में अद्यतनीकरण का कार्य पूरा किया गया और कार्टोसैट मिशनों की सहायता हेतु वर्ष 2007 के दौरान एम.ओ.एक्‍स. कॉम्‍प्‍लैक्‍स में नए 11 एम.एस.-बैंड टी.टी.सी. टर्मिनल की स्‍थापना की गई।

चंद्रयान-1 मिशन हेतु भू-खंड की स्‍थापना करना इस्‍ट्रैक के लिए एक सबसे बड़ी चुनौती थी। वर्ष 2007 के दौरान चंद्रयान-1 मिशन की सहायता के लिए एक 18 मीटर एस-बैंड डी.एस.एन. ऐंटेना स्‍थापित किया गया तथा वर्ष 2008 में एक स्‍वदेशी 32 मीटर एस/सी बैंड गहन अंतरिक्ष ऐंटेना को पूरा किया, जोकि मात्र दो वर्ष के रिकार्ड समय में पर पूरा किया गया। भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान आंकड़ा केंद्र सभी चंद्र विज्ञान गतिविधियों का मुख्‍य केंद्र बिंदु बन गया। उसी अवधि के दौरान आई.एस.डी.एन. कॉम्‍प्‍लैक्‍स में विशेषकर एस्‍ट्रोसैट मिशन की सहायता हेतु एक 11 मी. एस/एक्‍स बैंड आंकड़ा अभिग्रहण हेतु एक एस/एक्‍स द्वितीय टर्मिनल लगाया गया और शार/तिरुवनंतपुरम स्थित ऐंटेनाओं की 11 मी. ऐंटेना से अद्यतित किया गया। इस्‍ट्रैक परिवहनीय टर्मिनलों ने क्रमश: रोडरिगस/प्रशांत महासागर/रोडरिगस से पी.एस.एल.वी.-सी19/रीसैट (2012), पी.एस.एल.वी.-सी25/एम.ओ.एम. (2013) तथा पी.एस.एल.वी.-सी34/कार्टोसैट-2 श्रृंखला उपग्रह मिशन (2016) की सहायता की। चंद्रयान-2 तथा एम.ओ.एम. मिशनों में मानव-मशीन सह्यता का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।

80 के दशक के मौजूदा अंतरिक्षयान नियंत्रण केंद्र का संरूपण एक मुख्‍य उपग्रह तथा सह-यात्री की सहायता के लिए किया गया। चूँकि उपग्रहों का विकास जटिलता तथा एक-के-बाद-एक अति शीघ्रता के साथ हुआ, अत: नए नियंत्रण केंद्रों की स्‍थापना करनी पड़ी तथा परिष्‍कृत एम.ओ.एक्‍स-1 (2008) तथा एम.ओ.एक्‍स.-2 (2010) को अलग-अलग कैंपस में पूरा किया गया, जोकि एक ही साथ युगल प्रमोचन मिशनों में सहायता प्रदान कर सकता है। उपग्रह प्रचालनों के स्‍वचालन से उपग्रहों का सुरक्षित मानीटरन तथा नियंत्रण संभव हो सका है। वर्तमान में, इस्‍ट्रैक 15 उपग्रहों की देख-रेख कर रहा है तथा उनकी सेवाओं को सुनिश्चित करता है। तथा किसी भी प्रकार के आपातकाल की स्थिति से निपटने के लिए इस्‍ट्रैक ने लखनऊ तथा आई.डी.एस.एन. में एक वैकल्पिक नियंत्रण केंद्र की स्‍थापना की है।

इस्‍ट्रैक ने अब तक 64 प्रमोचक राकेटों/उपग्रह मिशनों हेतु सहायता प्रदान की है। इस्‍ट्रैक ने वर्ष 1990/91 में ई.यू.टी.ई.एस.ए.टी. मिशन हेतु टी.टी.सी. सहायता प्रदान की है। इसने बाह्य एजेंसियो को टी.टी.सी. सहायता प्रदान कर एंट्रिक्‍स के व्‍यापार में भी योगदान दिया है तथा अब तक दो दर्जन मिशनों में सहायता प्रदान की है।

रेडार फ्रंट पर, इस्‍ट्रैक द्वारा डाप्‍लर मौसम रेडार तथा सी/एस बैंड ट्रैकिंग रेडार का डिजाइन, विकास तथा प्रचालन किया गया। आई.आर.एन.एस.एस. भू खंड में आई.एन.सी.-1 तथा 2, 41आर.सी.डी.आर. स्‍टेशन शामिल हैं, जिससे क्रांतिक आई.आर.एन.एस.एस. सेवाओं हेतु समर्थन प्राप्‍त होता है, का रखरखाव इस्‍ट्रैक द्वारा किया जाता है। इस्‍ट्रैक स्थित खोज और बचाव तथा आपदा प्रबंधन सुविधा विपदाग्रस्‍त लोगों को विश्‍वसनीय सेवाएं प्रदान कर रहा है। एल.ई.ओ.एल.यू.टी. को जी.ई.ओ.एल.यू.टी. के साथ संवर्धित किया तथा वर्तमान में. एम.ई.ओ.एस.ए.आर. से संबंधित कार्य की शुरूआत की गई। अंतरिक्ष आधारित सेवाओं के लिए हब दूर-शिक्षा, दूर-चिकित्‍सा तथा ग्राम संसाधन केंद्र जैसी विभिन्‍न समाजोपयोगी अनुप्रयोगों में सहायता प्रदान करता है।

विश्‍वनीयता तथा गुणवत्‍ता आश्‍वासन (आर.ई.क्‍यू.ए.) समूह ने इस्‍ट्रैक भू-खंड की अति विश्‍वसनीय प्रचालनात्‍मक सहायता को प्राप्‍त करने हेतु अपना ध्‍यान केंद्रित किया है। परीक्षण उपकरणों के संविरचन के लिए बेंगलूर में परीक्षण उपकरण सुविधा की स्‍थापना की है। इसने इस्‍ट्रैक के विभिन्‍न मिशनों की क्रांतिक प्रक्रियाओं हेतु अंशांकन करने, भावी निरीक्षण तथा प्रक्रिया के दौरान किए जाने वाले निरीक्षण सहायता प्रदान करने में उत्‍कृष्‍टता प्राप्‍त की है।

इस्‍ट्रैक ने आज (21 नवंबर, 2016) अपने अस्तित्‍व के 40 वर्ष पूरे होन के पश्‍चात् रूबी वर्ष मनाया। एस.एल.वी./ आर्याभट्ट मिशन के लिए ट्रैकिंग स्‍टेशन से लेकर अत्‍याधुनिक भू सहायता केंद्र, जोकि जी.एस.एल.वी. तथा मंगल कक्षित्र मिशन जैसी जटिल मिशनों की सहायता के लिए सक्षम केंद्र के रूप में इस्‍ट्रैक का विकास हुआ है, वह उल्‍लेखनीय है। प्रो. धवन द्वारा इस्‍ट्रैक के निर्माण की प्रक्रिया की शुरूआत की गई थी तथा उनके बाद इसरो के अध्‍यक्षों तथा निदेशकों ने इस्‍ट्रैक को विश्‍व-सतरीय टी.टी.सी. सेवा सुविधा तथा उपग्रह प्रचालन केंद्र के रूप में विकसित किया। आज इस्‍ट्रैक, एम.ओ.एक्‍स. में आयोजित रूबी  दिवस पर अध्‍यक्ष, इसरो तथा सचिव, अं.वि. श्री आ.सी. किरण कुमार द्वारा अध्‍यक्षीय भाषण दिया गया तथा स्‍मारिका का विमोचन किया गया। श्री के.वी.वी.एस.एस.एस.आर. आंजेनेलु, निदेशक, इस्‍ट्रैक ने सभी आमंत्रितों का स्‍वागत किया। इस्‍ट्रैक के पूर्व निदेशकों श्री के.वी. वेंकटाचारी, डॉ. एस. रंगराजन, डॉ. एस.के. शिवकुमार तथा श्री बी.एस. चंद्रशेखर ने आयोजन के दौरान अपने अनुभव साझा किए।

 

इस्‍ट्रैक में रूबी वर्ष समारोह

इस्‍ट्रैक में रूबी वर्ष समारोह

 

ऐप्‍पल नियंत्रण केंद्र

ऐप्‍पल नियंत्रण केंद्र

 

माननीय प्रधानमंत्री (इस्‍ट्रैक में) मंगल कक्षित्र मिशन के मंगल की कक्षा में सफल ऐतिहासिक अंत:क्षेपण को देखने के बाद इसरो को संबोधित करते हुए

माननीय प्रधानमंत्री (इस्‍ट्रैक में) मंगल कक्षित्र मिशन के मंगल की कक्षा में सफल ऐतिहासिक अंत:क्षेपण को देखने के बाद इसरो को संबोधित करते हुए

 

बियाक (इंडोनेशिया) स्थित डाउन रेंज स्‍टेशन

बियाक (इंडोनेशिया) स्थित डाउन रेंज स्‍टेशन

 

मारीशस स्थित इस्‍ट्रैक ऐंटेना

मारीशस स्थित इस्‍ट्रैक ऐंटेना