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अंतरिक्ष विभाग
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन

लोक सूचना : सावधान : नौकरी पाने के इच्छुक उम्मीदवार

वर्तमान ई-प्रापण साइट का नई वेबसाइट में रूपांतरण करना प्रस्तावित है। सभी पंजीकृत/नये विक्रेताओं से नई वेबसाइट https://eproc.isro.in का अवलोकन करने तथा इसरो केंद्रों के साथ भाग लेने के लिए अपने प्रत्यय-पत्र का वैधीकरण करने का अनुरोध किया जाता है।

यू.आर.राव उपग्रह केंद्र (यू.आर.एस.सी.)

 

 

यू.आर.राव उपग्रह केंद्र (यू्.आर.एस.सी.)

पुराना एयरपोर्ट रोड

विमानपुरा पोस्‍ट, बेंगलूरु- 560017

कर्नाटक, भारत

निदेशक: श्री पी. कुञ्हीकृष्‍णन

ई-मेल:[email protected]

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यू.आर. राव उपग्रह केंद (यू.आर.एस.सी.), बेंगलूरु, जिसे पहले इसरो उपग्रह केंद्र (आईजेक) के नाम से जाना जाता था, उपग्रह निर्माण तथा संबंधित उपग्रह प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए अग्रणी केंद्र है। संचार, नौवहन, मौसमविज्ञान, सुदूर संवेदन, अंतरिक्ष विज्ञान तथा अंतर-ग्रहीय अन्‍वेषणों के क्षेत्र में विभिन्‍न प्रयोक्‍ताओं को अनुप्रयोग प्रदान करने के लिए इन अंतरिक्षयानों का उपयोग किया जाता है। यह केंद्र भविष्‍य के मिशनों के लिए उन्‍नत प्रौद्यागिकियों पर भी कार्य कर रहा है। यू.आर.एस.सी. उपग्रहों के आद्योपान्‍त (शुरू से अंत तक) निर्माण हेतु अत्‍याधुनिक सुविधाओं से लैस है। इसरो उपग्रह समेकन और जाँच स्‍थापना (आई.एस.आई.टी.ई.) एक छत के नीचे 6.5 मीटर ताप-निर्वात चैंबर, 29 टन कंपन सुविधा, सुसंहत ऐंटेना जाँच सुविधा तथा ध्‍वानिक जाँच सुविधा सहित अंतरिक्षयान समेकन तथा जाँच सुविधाओं के लिए अत्‍याधुनिक स्‍वच्‍छ कक्ष सुविधाओं से लैस है। आई.एस.आई.टी.ई. में सभी संचार तथा नौवहन अंतरिक्षयानों का कोडांतरण, समेकन तथा जाँच की जाती है। आई.एस.आई.टी.ई. में उप-प्रणालियों के उत्‍पादनीकरण तथा मानकीकरण हेतु एक समर्थित सुविधा की स्‍थापना की गई है। 

यू.आर.एस.सी. की विद्युत प्रकाशिकी तंत्र प्रयोगशाला (लियोस) नामक एक यूनिट है, जो पीण्‍या, बेंगलूर में स्थि‍त है जो कि मुख्‍यत: इसरो कार्यक्रमों के लिए संवेदकों के अनुसंधान, विकास तथा उत्‍पादनीकरण हेतु उत्‍तरदायी है।

अपने आरंभ से, यू.आर.एस.सी. को वैज्ञानिक, संचार, नौवहन तथा सुदूर संवेदन जैसे विभिन्‍न अनुप्रयोगों के लिए 100 से भी अधिक उपग्रहों का निर्माण करने का श्रेय प्राप्‍त है। मानक उपग्रह हार्डवेयर का निर्माण करने में कई निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग भी यू.आर.एस.सी. की सहायता कर रहे हैं।