भारत बाढ़, भू-स्‍खलन, चक्रवात, दावानल, भूकंप, सूखा आदि जैसी कई प्राकृतिक आपदा प्रवण क्षेत्र है। उपग्रह नियमित अंतराल पर प्राकृतिक आपदाओं के संक्षिप्त प्रेक्षण प्रदान करते हैं, जो उत्‍तम योजना बनाने और आपदाओं के प्रबंधन में सहायक होते हैं। इस प्रकार की आपदाओं के कारण उत्‍पन्‍न जोखिमों को बेहतर समझने के लिए उपग्रह और क्षेत्र आधारित प्रेक्षण को समेकित करना तथा जोखिम ह्रास सिद्धांतों की ओर कार्य करना आवश्‍यक है। उपग्रह संचार और नौवहन प्रणालियां भी उन्नत प्रौद्योगिकीय विकल्पों के साथ आपदा प्रबंधन में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

आपदा प्रबंधन सहायता (डी.एम.एस.) कार्यक्रम अंतरिक्ष आधारित सूचनाओं का उपयोग करते हुए देश में प्राकृतिक आपदाओं के विविध पहलुओं का व्‍यापक रूप से समाधान करता है। इसरो प्रशासकों को प्रभाव की बेहतर समझ एवं बेहतर निर्णय सहायता हेतु भुवन, राष्‍ट्रीय आपातकालीन प्रबंधन आंकड़ा-आधार एवं मोसडैक जैसे विभिन्न भू-पोर्टलों के माध्यम से अन्‍योन्‍यक्रियाशील भू-स्‍थानिक क्षेत्र में संबंधित सूचना प्रसारित करता है।

इसरो, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों एवं राज्‍य मंत्रालयों/विभागों को प्राकृतिक आपदाओं से पहले, आपदा के दौरान एवं बाद में उपग्रह आधारित निकट वास्‍तविक समय में सूचना सहायता प्रदान करता है। इसके अतिरिक्‍त, इसरो आपदा प्रबंधन सहायता में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सूचना के उपयोग में क्षमता निर्माण भी प्रदान करता है। 

इसरो विभिन्‍न देशों के साथ आपदा प्रबंधन के संबंध में अंतरराष्ट्रीय कार्य-ढाँचे, जैसे अंतरराष्‍ट्रीय चार्टर ‘अंतरिक्ष एवं मुख्‍य आपदाएं’, प्रहरी एशिया, यूनिस्केप आदि के जरिए सक्रिय रूप से सम्मिलित है।

नवीनतम जानकारी

राष्‍ट्रीय
एन.आर.एस.सी./इसरो ने गृह मंत्रालय के साथ आपातकालीन प्रतिक्रिया हेतु अत्याधुनिक समेकित नियंत्रण कक्ष (आई.सी.आर.-ई.आर.) की संस्‍थापना करने हेतु तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए।

अंतरराष्‍ट्रीय
इसरो ने अंतरराष्‍ट्रीय चार्टर के तहत हाल की सुनामी की प्रतिक्रिया-स्वरूप अपने कार्य में इंडोनेशिया को सहायता प्रदान की। अधिक जानें..

अन्‍य
राज्‍य अधिकारियों को डी.एम.एस. पर एन.आर.एस.सी. प्रशिक्षण फरवरी, 2019