अंटार्कटिक अभियान में इसरो की भागीदारी

राष्‍ट्रीय अंटार्कटिक तथा समुद्री अनुसंधान केंद्र (एन.सी.ए.ओ.आर.), भू-विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रति वर्ष अंटार्कटिका के लिए भारतीय वैज्ञानिक मिशन का आयोजन किया जाता है तथा लंबे समय से इसरो की इसमें भागीदारी रही है। इस वर्ष, 35वें भारतीय वैज्ञानिक अभियान में इसरो ने अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (सैक) से एक मौजूदा परियोजना तथा राष्‍ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एन.आर.एस.सी.) से दो नई परियोजनाओं सहित तीन परियोजनाओं में भाग लिया है। अभियान के दौरान, परियोजना समूह ने उपग्रह प्रतिबिंबों के प्रस्‍तुतीकरण तथा वैधीकरण के लिए भू आंकड़ा संग्रहित किया तथा ऑस्‍ट्रल समर (नवंबर 2015 – मार्च 2016) के दौरान ग्रीन-हाउस गैसों और वायुमंडलीय ब्‍लैक कार्बन के मापन हेतु उपकरणों को भी प्रतिस्‍थापित किया।

अंटार्कटिका की हिम परतें जलवायु प्रणाली को प्रभावित करने में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वैश्विक जलवायु परिवर्तन का हिम परतों पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है क्‍योंकि वे वायु तथा समुद्री तापमान में बदलावों या अंटार्कटिका के समीप बहाव के प्रति संवेदनशील है। इसरो के वैज्ञानिकों द्वारा पूर्व में इस पर व्‍यापक रूप से कार्य किया गया है। 35वें भारतीय वैज्ञानिक अभियान के दौरान किए गए हाल के अध्‍ययनों का विवरण निम्‍नलिखित है:-

  • सैक ने स्‍वदेशी रूप से विकसित 500 मेगाहर्ट्ज के भू वेधी रेडार (जी.पी.आर.) का प्रयोग करते हुए भारती तथा मैत्री स्‍टेशनों के समीप भू प्रेक्षणों को संग्रहित किया। हिम परत, हिम शैल तथा हिम समुद्र आदि जैसे सत्रह स्‍थलों पर जी.पी.आर. आंकड़ा संग्रहित किया गया। जी.पी.आर. लगभग हिम समुद्र की समूची प्रेक्षित मोटाई को वेध गया, जो लगभग 2 मीटर पाई गई, जो कि क्षेत्र के अनुरूप है। जी.पी.आर. आंकड़ा हिम परतों, हिम शैलों के ऊपर शीर्ष स्‍तरीकृत परतों की मोटाई को भी माप सका।
  • सैक/इसरो, रिसैट, रिसोर्ससैट-2, एविफ्स, लिस-III, लिस-IV, सरल-अल्टिका नामक भारतीय उपग्रहों से आंकड़ा एवं उत्‍पादों का प्रयोग करते हुए वर्ष 2012 से एन.सी.ए.ओ.आर. के लिए निकट वास्‍तविक समय समुद्री हिम पारदर्शिता भी मुहैया करा रहा है। इससे अंटार्कटिका के समुद्री हिम भाग के माध्‍यम से सुरक्षित जहाज नौसंचालन में सहायता मिली है। 
  • दीर्घावधिक आधार पर अंटार्कटिका में ब्‍लैक कार्बन (बी.सी.), ग्रीन-हाउस गैसों एवं सौर वि‍किरण फ्लक्‍सों के मापन की दिशा में, एन.आर.एस.सी. ने भारती स्‍टेशन पर वायुमंडलीय CO­2 संवेदक की स्‍थापना की है और जहाजी यात्रा के दौरान कुल ओजोन का भी मापन किया है।
  • एन.आर.एस.सी. ने अंतरिक्ष आधारित एवं भू आधारित प्रेक्षणों का प्रयोग करते हुए अंटार्कटिका में हिम गलन/जमाव गतिकी एवं समुद्री हिम विशिष्‍टीकरण के अध्‍ययन में भाग लिया। गलन/जमाव गतिकी एवं सूक्ष्‍मतरंग सुदूर संवेदन आंकड़े के प्रति इसकी प्रतितिक्रया को समझने हेतु भारती एवं मैत्री स्‍टेशनों के समीप जी.पी.आर. (200 मेगाहर्ट्ज एवं 400 मेगाहर्ट्ज) एवं हिम फोर्क (घनत्‍व एवं नमीं) का प्रयोग करते हुए हिम गुण एकत्रित किए गए थे। समुद्री हिम मोटाई हेतु हिमसागर में 5 रूटों एवं परत हिम में 10 स्‍थानों पर जी.पी.आर. प्रोफाइल ए‍कत्रित किए गए थे।
  • 13 दिनों तक हिम फोर्क का प्रयोग करते हुए हिम घनत्‍व एवं नमीं प्रेक्षण एकत्रित किए गए थे और हिम की अधिकतम 1.2 मीटर गहराई के 20 गड्ढ़े खोदे गए थे।

ओशनसैट-2 एवं क्विकस्‍कैट पर ओ.एस.सी.ए.टी. से प्रकीर्णमापी आंकड़ों का प्रयोग करते हुए अंटार्कटिका पर सतह गलन का स्‍थान कालिक भुवन पोर्टल पर एन.आई.सी.ई.एस. कार्यक्रम के तहत उपलब्‍ध है। 

…जारी (अंटार्कटिका भू स्‍टेशन)

भारती स्‍टेशन, अंटार्कटिका का दृश्‍य

भारती स्‍टेशन, अंटार्कटिका का दृश्‍य 

 

मैत्री स्‍टेशन, अंटार्कटिका का दृश्‍य

मैत्री स्‍टेशन, अंटार्कटिका का दृश्‍य

 

क्विल्टि खाड़ी में जी.पी.आर. के साथ समुद्री हिम मापन  (1:वायु-हिम अंतरापृष्‍ठ, 2: हिम-समुद्र हिम अंतरापृष्‍ठ, 3-अगला मजबूत परावर्तन)

क्विल्टि खाड़ी में जी.पी.आर. के साथ समुद्री हिम मापन

(1:वायु-हिम अंतरापृष्‍ठ, 2: हिम-समुद्र हिम अंतरापृष्‍ठ, 3-अगला मजबूत परावर्तन)

 

 आइसबर्ग पर जी.पी.आर. मापन

आइसबर्ग पर जी.पी.आर. मापन 

 

भारती स्‍टेशन एन.आर.एस.सी. में वायुमंडलीय CO­2 संवेदकभारती स्‍टेशन एन.आर.एस.सी. में वायुमंडलीय CO­2 संवेदक

भारती स्‍टेशन एन.आर.एस.सी. में वायुमंडलीय CO­2 संवेदक

 

समुद्री यात्रा के दौरान कुल ओजोन का मापन

समुद्री यात्रा के दौरान कुल ओजोन का मापन 

 

समुद्री हिम पर जी.पी.आर. प्रेक्षण

समुद्री हिम पर जी.पी.आर. प्रेक्षण 

 

जी.पी.आर. प्रोफाइल

जी.पी.आर. प्रोफाइल 

 

हिम फोर्क प्रेक्षण

हिम फोर्क प्रेक्षण

हिम फोर्क प्रेक्षण