सैक, अहमदाबाद में ज़ीडीपी 2.0 अंतरिक्ष विज्ञान सम्मेलन आयोजित की गई।
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09 सितंबर, 2026
ज़ीडीपी 2.0 अंतरिक्ष विज्ञान सम्मेलन 19-20 अगस्त, 2026 को अहमदाबाद में सैक परिसर में आयोजित की गई। इस सम्मेलन को इसरो मुख्यालय के विज्ञान कार्यक्रम कार्यालय (एसपीओ), प्रणाली विश्वसनीयता एवं गुणवत्ता निदेशालय (डीएसआरक्यू) तथा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (सैक) ने मिलकर आयोजित किया था। अंतरिक्ष मिशन में निजी कंपनियों और गैर-इसरो/डीओएस शैक्षणिक संस्थानों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए यह सम्मेलन एक सक्रिय कदम के तौर पर आयोजित की गई थी। इसका उद्देश्य "ज़ीरो-डिफेक्ट" वैज्ञानिक उपकरण और डेटा उत्पाद सुनिश्चित करने के लिए मानकीकृत और एक समान प्रोटोकॉल स्थापित करना था।
इस दो-दिवसीय सम्मेलन में इसरो/डीओएस के अलग-अलग केंद्रों से लगभग 120 वैज्ञानिक और इंजीनियर शामिल हुए। सम्मेलन में प्रमुख शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों ने भी भाग लिया, जिनका वैज्ञानिक नीतभार विकसित करने और उसमें योगदान देने का लंबा अनुभव रहा है, इससे इसरो/डीओएस के अंदरूनी अंतरिक्ष –विज्ञान समुदाय और व्यापक वैज्ञानिक समुदाय के बीच वार्तालाप का एक मंच तैयार हुआ।
उद्घाटन सत्र में, स्थानीय आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. दीपक पुत्रेवु ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। एसपीओ के निदेशक डॉ. तीर्थ प्रतिम दास ने राष्ट्रीय सम्मेलन के संदर्भ से संबंधित जानकारी दी और डीएसआरक्यू के निदेशक श्री इम्तियाज़ अली खान ने ज़ीडीपी 2.0 का संक्षिप्त विवरण और इसको लागू करने के पहलुओं के बारे में बताया। सैक के निदेशक की ओर से, एसआरक्यूए, सैक के उप निदेशक श्री मनीष मेहता ने इस बैठक का उद्घाटन किया। पीआरएल के निदेशक प्रो. अनिल भारद्वाज ने अध्यक्षीय भाषण दिया और विज्ञान नीतभार विकास जीवन चक्र में गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। एसपीओ की उप निदेशक श्रीमती एस. मेगला ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
तकनीकी सत्रों में इसरो/डीओएस केंद्रों में अपनाए जाने वाले प्रणाली विश्वसनीयता (एसआर) के उम्दा तरीकों, डेटा उत्पादों को संग्रहीत और वितरित करने के दौरान अपनाए गए मानकों और एस्ट्रोसैट, आदित्य-एल1, एक्सपोसेट, चंद्रयान-1, 2, 3 और मंगल कक्षीय मिशन से मिले अनुभवों और सीखों पर चर्चा की गई। इन चर्चाओं से नीतभार के सम्पूर्ण जीवन-चक्र अर्थात डिज़ाइन से लेकर कक्षा में प्रचालन तक, के दौरान व्यावहारिक अनुभव साझा करने, नीतभार की गुणवत्ता बेहतर करने के सुझाव और बेहतरीन तरीकों को अपनाने में एकरूपता की आवश्यकता पर बात करने का मौका मिला।
यह राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन विज्ञान संबंधी नीतभार के विकास और विज्ञान संबंधी डेटा उत्पाद तैयार करने से जुड़ी प्रक्रियाओं को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम थी। साथ ही, इसने इसरो/डीओएस केंद्रों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर बातचीत और ज्ञान के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया। उम्मीद है कि इस सम्मेलन के नतीजे भविष्य के अंतरिक्ष विज्ञान मिशनों के लिए मज़बूत और मानक प्रक्रियाएँ स्थापित करने और उनसे मिलने वाले डेटा के वैज्ञानिक महत्व को बढ़ाने में योगदान देंगे।
सैक, अहमदाबाद में आयोजित ज़ीडीपी 2.0 अंतरिक्ष विज्ञान सम्मेलन के प्रतिभागियों की सामूहिक तस्वीर।